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पुरी मंदिर के अंदर होगा भगवान जगन्नाथ की चंदन जात्रा और अक्षय तृतीया त्योहारों का आयोजन

Sat, 25 Apr 2020 09:01 PM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Sat, 25 Apr 2020 09:01 PM IST
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Chandan Jatra and Akshaya Tritiya festivals of Lord Jagannath to be organized inside Puri temple
फाइल फोटो - फोटो : social media

भगवान जगन्नाथ की वार्षिक चंदन जात्रा और अक्षय तृतीय उत्सवों का आयोजन रविवार को ओडिशा के पुरी मंदिर परिसर में ही किया जाएगा। हालांकि, इस दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण केवल पुजारी और सेवक ही सभी अनुष्ठान करेंगे। यानी कि किसी भी श्रद्धालु को मंदिर में आने की इजाजत नहीं होगी।

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मंदिर प्रबंधन समिति के प्रमुख की तरफ से यह जानकारी शनिवार को दी गई। बता दें कि इन दो उत्सवों को इसलिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वे ओडिशा की तीर्थ नगरी में प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत करते हैं।
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पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ को समर्पित है।

मंदिर प्रबंधन बोर्ड के प्रमुख पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देब ने कहा, “चुनिंदा पुजारी और सेवक ही अनुष्ठान करेंगे। ऐसे में श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के भीतर आने की अनुमति नहीं होगी।”
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श्री जगन्नाथ यात्रा को तय कार्यक्रम के मुताबिक 23 जून को आयोजित किए जाने की संभावना पर देब ने कहा कि इस संबंध में फैसला तीन मई के बाद लिया जाएगा। मालूम हो कि देश भर में लागू किए गए लॉकडाउन की बढ़ाई गई अवधि तीन मई को खत्म होनी है।



इस साल रथ यात्रा के आयोजन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शुक्रवार को चर्चा की थी।
अक्षय तृतीया जो कि वार्षिक यात्रा के लिए रथ के निर्माण की शुरुआत की घोषणा करती है, उसका आयोजन मंदिर के बाहर रथ कला में होता है। वहीं, चंदन जात्रा पुरी में एक सरोवर में आयोजित होती है।

जगन्नाथ मंदिर संस्कृति पर शोध करने वाले भास्कर मिश्रा ने कहा, “ यह भगवान जगन्नाथ का सबसे लंबा उत्सव है जो दो चरणों में चलता है। यह उत्सव 42 दिनों तक चलता है।”

महाराज दिव्य सिंह देब ने बताया कि मंदिर परिसर के भीतर उत्सवों के आयोजन का फैसला गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के साथ मंदिर की प्रबंध समिति की शुक्रवार रात हुई बैठक में लिया गया।


देब ने पत्रकारों को बताया, “गुरुजी (शंकराचार्य) की सलाह पर, यह तय किया गया है कि अक्षय तृतीया और चंदन जात्रा दोनों का आयोजन मंदिर के परिसर में ही किया जाएगा। गुरुजी ने कहा कि मंदिर की परंपरा को बरकरार रखना होगा और सदियों पुराने अनुष्ठानों को रोका नहीं जा सकता।”

गजपति महाराज ने पहले कहा था कि मंदिर प्रशासन बंद के मद्देनजर मंदिर परिसर से बाहर कोई भी गतिविधि नहीं करेगा। गजपति महाराज के अलावा, जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति, पुरी जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक ने शंकराचार्य से मुलाकात कर बंद के बीच अनुष्ठानों के तरीकों पर परामर्श लिया।

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