फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Centre extended ban on LTTE for anti national activities and declare it unlawful association

केंद्र सरकार ने लिट्टे पर लगा बैन बढ़ाया, बताया- भारतीयों के लिए गंभीर खतरा

Tue, 14 May 2019 12:45 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 14 May 2019 12:45 PM IST
विज्ञापन
Centre extended ban on LTTE for anti national activities and declare it unlawful association
लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

केंद्र सरकार ने मंगलवार को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) पर लगे प्रतिबंध को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने इसे गैरकानूनी संघ बताया है। नई अधिसूचना जारी करते हुए सरकार ने इसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है और इसे भारत विरोधी करार दिया है।

विज्ञापन


गृह मंत्रालय ने कहा कि लिट्टे का उद्देश्य सभी तमिलों के लिए अलग देश की मांग करने से भारत की एकता और अखंडता को खतरा पैदा हुआ है। भारत सरकार हर दो साल के लिए लिट्टे पर प्रतिबंध लगाता है और दो साल बाद उसे बढ़ा दिया जाता है। 27 साल पहले भारत ने 1992 में 14 मई को लिट्टे पर प्रतिबंध लगाया था। उसके बाद से इस प्रतिबंध को बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन


भारत सरकार ने पड़ोसी देश श्रीलंका के विद्रोही संगठन लिट्टे पर गैरकानूनी गतिविधियों संबंधी अधिनियम के तहत 14 मई 1992 को प्रतिबंधित किया था। इससे पहले यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका ने भी इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल 1992 में इस संगठन द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या किए जाने के बाद इस संगठन को गैर कानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम के तहत प्रतिबंध कर दिया गया था। भारत श्रीलंका में जाकर कई बार लिट्टे का मुकाबला कर चुका है।

अधिसूचना में कहा गया है कि क्षेत्र विशेष में लिट्टे इंटरनेट पोर्टल के जरिए यह प्रचारित कर रहा है कि भारत सरकार की वजह से उसकी हार हुई। इंटरनेट के जरिए वह भारत विरोधी प्रोपेगैंडा फैला रहा है। इसका भारत के बहुत बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है। मई 2009 में श्रीलंका में अपनी सैन्य हार के बाद भी, लिट्टे ने अपनी ईलम अवधारणा को नहीं छोड़ा है।


बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 1987 में भारतीय शांति सेना उत्तरी श्रीलंका में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से वहां गई लेकिन वहां लिट्टे के साथ युद्ध में उसके करीब 1,200 जवान मारे गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed