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Centre vs Delhi: दिल्ली की दलील- सेवाओं पर नियंत्रण के बिना काम नहीं कर सकती सरकार, जानें कोर्ट ने क्या कहा
Tue, 10 Jan 2023 10:30 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Tue, 10 Jan 2023 10:30 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को यह बात माननी होगी कि लोक व्यवस्थ, पुलिस और भूमि (राज्य सूची की) उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इसलिए, अगर नौकरशाहों को इनसे संबंधित विभागों में तैनात किया जाता है, तो यह दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्ति के बाहर भी होगा।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि अगर सरकार का सेवाओं पर नियंत्रण नहीं है तो वह काम नहीं कर सकती है, क्योंकि नौकरशाहों का कार्य बहिष्कार शासन को नकार देगा और अधिकारियों को लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं बनाएगा। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ से दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी ने अनुरोध किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) में सेवारत सिविल सेवकों को निर्वाचित सरकार के माध्यम से लोगों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
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यह संविधान पीठ सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र बनाम दिल्ली सरकार विवाद मामले की सुनवाई कर रही है। सिंघवी ने संविधान पीठ के समक्ष तर्क दिया कि सेवाओं के नियंत्रण न होने के कारण हर छोटे-छोटे मुद्दे पर दिल्ली सरकार की भागदौड़ थम जाती। उन्होंने कहा कि हिंदी में एक प्रसिद्ध कहावत है कि एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकते।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
दिनभर चली सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सूची के विषयों की लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि जैसी तीन प्रविष्टियों का हवाला दिया, जहां दिल्ली सरकार अनुच्छेद 239AA (दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान) के अनुसार कानून नहीं बना सकती है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार को यह बात माननी होगी कि लोक व्यवस्थ, पुलिस और भूमि (राज्य सूची की) उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इसलिए,अगर सिविल सेवकों को इनसे संबंधित विभागों में तैनात किया जाता है, तो यह दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्ति के बाहर भी होगा।
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सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि पर कानून नहीं बना सकती दिल्ली सरकार
पीठ ने कहा कि संविधान की 7वीं अनुसूची में तीन सूचियां हैं- संघ, राज्य और समवर्ती। केंद्र और राज्य सरकारों को पहली दो सूचियों में उल्लिखित विषयों पर कानून बनाने का विशेष अधिकार है। अनुसूची की समवर्ती सूची में उल्लिखित विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार, अनुच्छेद 239AA के अनुसार, राज्य सूची में शामिल सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि पर कानून नहीं बना सकती है।