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केंद्र ने बदले वायु और जल प्रदूषण कानून के नियम, उद्योगों को मिली राहत, अब बार-बार मंजूरी की जरूरत नहीं
Wed, 28 Jan 2026 07:08 PM IST
नवीन पारमुवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Wed, 28 Jan 2026 07:08 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने वायु और जल प्रदूषण कानूनों के तहत उद्योगों के लिए नियमों को आसान बना दिया है। अब उद्योगों को मिली संचालन की सहमति रद्द होने तक मान्य रहेगी, जिससे बार-बार रिन्यूअल का झंझट खत्म हो जाएगा।
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भारतीय उद्योग
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
केंद्र सरकार ने उद्योगों के लिए व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वायु और जल प्रदूषण से जुड़े कानूनों के तहत दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उद्योगों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को और सरल बनाना है। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और उद्योगों को अपना काम जारी रखने में मदद मिलेगी।
अब बार-बार रिन्यूअल की जरूरत नहीं
नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव संचालन की सहमति (Consent to Operate - CTO) की वैधता को लेकर किया गया है। अब एक बार सीटीओ मिलने के बाद यह तब तक वैध रहेगा, जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता। हालांकि, पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण जारी रहेगा। अगर कोई उद्योग नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी सहमति रद्द की जा सकती है।
लाल श्रेणी के उद्योगों को भी राहत
इस बदलाव से बार-बार रिन्यूअल कराने की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। इसके अलावा लाल श्रेणी (Red Category) के उद्योगों के लिए सहमति देने की प्रक्रिया का समय 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दिया गया है। इससे सीटीओ के रिन्यूअल में होने वाली देरी से संचालन में आने वाली अनिश्चितता भी खत्म होगी।
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एक ही आवेदन में मिलेगी सभी मंजूरी
एक और बदलाव एकीकृत सहमति और प्राधिकरण (Consolidated Consent and Authorisation) के प्रावधान से जुड़ा हुआ है। अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) एक ही आवेदन पर विचार कर सकेंगे। इसी एक आवेदन के आधार पर वायु और जल अधिनियमों के साथ-साथ विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत भी एकीकृत अनुमति जारी की जाएगी।
यह भी पढ़ें: भारत के एविएशन सेक्टर की लंबी उड़ान: 2044 तक चाहिए होंगे 3300 नए विमान, जानिए बोइंग के आउटलुक में क्या?
छोटे उद्योगों के लिए खास नियम
अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे उद्योगों के लिए स्थापना की सहमति (Consent to Establish - CTE) एक स्व-प्रमाणित आवेदन जमा करने पर ही स्वीकृत मान ली जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इन औद्योगिक क्षेत्रों का पर्यावरण की दृष्टि से पहले ही मूल्यांकन किया जा चुका होता है।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
नए दिशानिर्देशों में न्यूनतम दूरी के कठोर मानदंडों को भी हटा दिया गया है। अब इसकी जगह साइट-विशिष्ट पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्यों को 5 से 25 साल की अवधि के लिए एकमुश्त सीटीओ शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई है। साथ ही, शुल्क के मूल्यांकन में स्पष्टता लाने के लिए "पूंजी निवेश" की एक समान परिभाषा भी दी गई है। ये सभी बदलाव व्यापार करने में आसानी और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हैं।
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अब बार-बार रिन्यूअल की जरूरत नहीं
नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव संचालन की सहमति (Consent to Operate - CTO) की वैधता को लेकर किया गया है। अब एक बार सीटीओ मिलने के बाद यह तब तक वैध रहेगा, जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता। हालांकि, पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण जारी रहेगा। अगर कोई उद्योग नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी सहमति रद्द की जा सकती है।
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लाल श्रेणी के उद्योगों को भी राहत
इस बदलाव से बार-बार रिन्यूअल कराने की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। इसके अलावा लाल श्रेणी (Red Category) के उद्योगों के लिए सहमति देने की प्रक्रिया का समय 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दिया गया है। इससे सीटीओ के रिन्यूअल में होने वाली देरी से संचालन में आने वाली अनिश्चितता भी खत्म होगी।
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एक ही आवेदन में मिलेगी सभी मंजूरी
एक और बदलाव एकीकृत सहमति और प्राधिकरण (Consolidated Consent and Authorisation) के प्रावधान से जुड़ा हुआ है। अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) एक ही आवेदन पर विचार कर सकेंगे। इसी एक आवेदन के आधार पर वायु और जल अधिनियमों के साथ-साथ विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत भी एकीकृत अनुमति जारी की जाएगी।
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छोटे उद्योगों के लिए खास नियम
अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे उद्योगों के लिए स्थापना की सहमति (Consent to Establish - CTE) एक स्व-प्रमाणित आवेदन जमा करने पर ही स्वीकृत मान ली जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इन औद्योगिक क्षेत्रों का पर्यावरण की दृष्टि से पहले ही मूल्यांकन किया जा चुका होता है।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
नए दिशानिर्देशों में न्यूनतम दूरी के कठोर मानदंडों को भी हटा दिया गया है। अब इसकी जगह साइट-विशिष्ट पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्यों को 5 से 25 साल की अवधि के लिए एकमुश्त सीटीओ शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई है। साथ ही, शुल्क के मूल्यांकन में स्पष्टता लाने के लिए "पूंजी निवेश" की एक समान परिभाषा भी दी गई है। ये सभी बदलाव व्यापार करने में आसानी और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हैं।