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माननीयों के खिलाफ लंबित मामलों के जल्द निपटारे का केंद्र सरकार ने किया समर्थन

Thu, 17 Sep 2020 01:20 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 17 Sep 2020 01:20 AM IST
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central government supports Supreme Court for early disposal of pending cases against former and current MPs MLAs
supreme court - फोटो : पीटीआई

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्व व मौजूदा सांसदों, विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के जल्द निपटारे का समर्थन किया है और कहा कि ऐसे मामलों को समयसीमा के भीतर अपने तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

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जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मामलों के जल्द निपटारे के लिए दिए वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया के सुझावों से कोई परेशानी नहीं है।
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अगर किसी सांसद या विधायक के खिलाफ सुनवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है तो शीर्ष अदालत को समयसीमा के भीतर मामलों पर फैसला लेने का निर्देश देना चाहिए। अगर किसी मामले में जांच एजेंसी (सीबीआई या ईडी) रोक नहीं होने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा रही है तो मामले को अगले स्तर पर उठाना चाहिए।
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पीठ ने संकेत दिया कि वह पूर्व और मौजूदा सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई एक वर्ष के भीतर खत्म करने और संबंधित हाईकोर्ट को इसके कार्यान्वयन के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत करने का आदेश पारित करेगी।

पीठ ने कहा कि वह विभिन्न हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से एक उचित ब्लू प्रिंट मांगेगी कि कैसे लंबित मुकदमों का जल्द निपटारा संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने सांसद व विधायकों के खिलाफ सभी लंबित मामलों को राज्य में केवल एक विशेष अदालत में आवंटित करने पर भी चिंता जताई।


जिले में विशेष अदालत बनाने का दिया था सुझाव
पिछली सुनवाई में मामले में न्यायमित्र हंसारिया ने सुझाव दिया था कि राज्य के प्रत्येक जिले में विशेष अदालत को लंबित मामलों का निपटारा करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। विधायकों से संबंधित मामलों को लेकर विशेष अदालतों के संबंध में एकरूपता नहीं है। शीर्ष अदालत ने पाया कि पूर्व व मौजूदा सांसद, विधायकों के खिलाफ 4442 मामले लंबित थे, लेकिन विशेष कानूनों के तहत लंबित मामलों को जोड़ने पर इनकी संख्या और ज्यादा हो गई। वहीं याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति लंबित मामलों की संख्या के अनुसार की जा सकती है।

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