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जम्मू-कश्मीर पर केंद्र ने कहा, अलगाववादी युवाओं को आतंकी बनाते हैं, क्या हम चुप रहें?

Fri, 22 Nov 2019 05:49 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 22 Nov 2019 05:49 AM IST
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Central government says, Separatists make terrorists by provoking youth, should we remain silent
अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद कुछ ऐसे थे जम्मू-कश्मीर के हालात - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, पिछले 70 वर्षों में राज्य में कई आतंकी घटनाएं हुई। हुर्रियत नेताओं को घाटी में अशांति फैलाने के लिए आईएसआई से पैसे मिलते हैं।

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वे युवाओं को गुमराह कर आतंकी बनाने की कोशिश करते हैं और भारत के खिलाफ उकसाते हैं। लंबे समय से इन लोगों को रोकने की कोशिश नहीं हुई क्या हमें खामोश रहना चाहिए था? क्या हम अलगाववादियों और आतंकियों को इसकी इजाजत देते रहना चाहिए?
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वेणुगोपाल ने कहा, राज्य में पहले का इतिहास देखते हुए धारा-144 लगाई गई। वहीं, जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि राज्य में लैंडलाइन फोन धीरे-धीरे बहाल किए गए। चार सितंबर को लैंडलाइन सेवा पूरी तरह बहाल हो गई।
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मेहता ने याचिकाकर्ताओं पर सवाल उठाते हुए कहा, तीन वर्ष पहले आतंकी बुरहान बानी की मौत के बाद तीन महीने घाटी में मोबाइल सेवा बंद थी। तब क्यों नहीं आवाज उठाई गई? अब उनका स्टेंड बदल क्यों गया? मेहता ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी असीम नहीं हो सकती। देश की सुरक्षा के मद्देनजर इसकी तार्किक सीमा होती है।

जैसे अमेरिका मेें वहां का राष्ट्रीय ध्वज जलाना अपराध नहीं है, जबकि भारत में यह अपराध है। अमेरिका में दुष्कर्म पीड़िता का नाम प्रकाशित कर सकते हैं जबकि यहां इसकी अनुमति नहीं है।

इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने कहा, हम जम्मू-कश्मीर के किसी हिरासती मामले की सुनवाई नहीं कर रहे। हम दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं जो अनुराधा भसीन और गुलाम नबी आजाद ने दायर की हैं। ये आवाजाही की स्वतंत्रता और प्रेस आदि से जुड़ी हैं।

इसके साथ ही पीठ ने कहा, एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लंबित है जो एक कारोबारी की हिरासत के खिलाफ है क्योंकि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के साथ जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी।

पत्थरबाजी में एक तिहाई कमी

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि पांच अगस्त के बाद राज्य में पत्थरबाजी की घटनाएं एक-तिहाई कम हो गई हैं। अब तक 17000 बड़ी सर्जरी हुईं और सात लाख से अधिक लोगों ने सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में इलाज कराया। अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां हैं। 11.59 लाख मिट्रिक टन सेब कश्मीर से बाहर बेचने के लिए भेजा गया।

राज्य में सभी अखबार छप रहे हैं

मेहता ने बताया कि राज्य में सभी अखबार प्रकाशित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन जम्मू से अखबार प्रकाशन कर रही हैं लेकिन पता नहीं क्यों कश्मीर से नहीं? डिश टीवी, डीडी, स्थानीय चैनल, एफएम सेवा पर कोई रोक नहीं है। पहली बार राज्य के लोगों को शिक्षा का अधिकार मिला है। बाल विवाह पर पाबंदी लग गई। 70 वर्ष के बाद 106 कानून जम्मू-कश्मीर में प्रभावी जो होंगे।

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