{"_id":"5f0148f7eb1dff54f946f8fe","slug":"central-government-is-considering-removing-defence-projects-from-the-union-environment-ministry-purview","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरक्षा परियोजनाओं के लिए नहीं लेनी होगी पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी, केंद्र सरकार बना रही योजना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुरक्षा परियोजनाओं के लिए नहीं लेनी होगी पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी, केंद्र सरकार बना रही योजना
Sun, 05 Jul 2020 08:58 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sun, 05 Jul 2020 08:58 AM IST
विज्ञापन
भारतीय सेना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दायरे से रक्षा परियोजनाओं को हटाने पर विचार कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसा होने के बाद रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण जैसी परियोजनाओं को उनके पर्यावरणीय प्रभाव के लिए मूल्यांकन नहीं किया जाएगा और अब पर्यावरण और वन मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
विज्ञापन
वर्तमान में सामरिक महत्व की परियोजनाओं के लिए पहले पर्यावरणीय और वन मंजूरी की आवश्यकता होती है, हालांकि उनका विवरण सुरक्षा चिंताओं के कारण सार्वजनिक डोमेन में नहीं डाला गया है। बता दें कि नियमित परियोजनाओं का विवरण प्रचारित किया जाता है और लोगों को अपनी प्रतिक्रिया देने की अनुमति दी जाती है। ऐसी परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के लिए सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित की जाती है ताकि उन्हें समझने और अपनी सहमति देने का अवसर मिल सके।
विज्ञापन
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय के सचिव आरपी गुप्ता ने कहा कि अभी तक कोई औपचारिक नीति नहीं है और रक्षा परियोजनाओं को पूर्व मंजूरी से छूट देने का विचार एक वैचारिक स्तर पर है। हम एक औपचारिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसमें सभी रक्षा परियोजनाओं को कवर किया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि रणनीतिक परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं पहुंचनी चाहिए।
विज्ञापन
यह प्रस्ताव ऐसे समय में लाया गया है जब जब भारत अपनी सीमा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, खासकर चीन के साथ। 15 जून को लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के मारे जाने के बाद से भारत अपनी सीमा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में लगा है।
हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ता इसको लेकर चिंतित हैं। उन्हें चिंता है कि रक्षा परियोजनाओं को हरित मंजूरियों से मुक्त करने की नीति से मुख्य रूप से पूर्वी और पश्चिमी हिमालय में पारिस्थितिक रूप से नाजुक और जैव विविधता संपन्न सीमा क्षेत्रों में पर्यावरणीय गिरावट हो सकती है। वे कहते हैं कि इसका मतलब है कि आपदाग्रस्त क्षेत्रों, तटों, घने जंगलों के साथ अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर में रक्षा परियोजनाओं की छानबीन नहीं की जाएगी।