फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Center told in the Parliament that in India only 374 deaths per million were killed due to corona read full details

संसद : केंद्र ने बताया- भारत में कोरोना से सबसे कम मौतें दस लाख पर सिर्फ 374 की गई जान, फोन टैपिंग पर क्या बोली सरकार, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Wed, 30 Mar 2022 06:43 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 30 Mar 2022 06:43 AM IST
सार

डब्ल्यूएचओ के इस आंकड़े से पहले तक कई रिपोर्टों ने भारत पर कोरोना मृतकों की तादाद छिपाने का आरोप लगाया था। साथ ही वास्तविक आंकड़ा सरकार द्वारा बताई गई संख्या से पांच से छह गुना होने का दावा किया गया था।

विज्ञापन
Center told in the Parliament that in India only 374 deaths per million were killed due to corona read full details
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत में कोरोना महामारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा दुनिया में तुलनात्मक रूप से सबसे कम रहा है। खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के हवाले से केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी।

विज्ञापन


केंद्र ने बताया, देश में कोरोना से प्रति 10 लाख लोगों पर सिर्फ 374 जानें गईं, जो तमाम सुविधा संपन्न अमेरिका से करीब आठ गुना कम हैं। वहीं, ब्राजील, रूस और मेक्सिको जैसे समान रूप से प्रभावित मुल्कों की तुलना में भी हमारे हालात काफी बेहतर रहे हैं।
विज्ञापन


मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने बताया, कुछ रिपोर्टों ने भारत में कोरोना से मौतों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है, जो आधिकारिक आंकड़े से बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा, ऐसी रिपोर्ट अमान्य तरीकों पर आधारित हैं या फिर उनके द्वारा इस्तेमाल डाटा स्रोत विश्वसनीय नहीं है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पवार ने कहा, ऐसे अधिकांश अध्ययनों के परिणाम कम आबादी वाले उपसमूहों के सीमित नमूनों से गणितीय मॉडलिंग तकनीकों के जरिए निकाले गए हैं। लिहाजा, इतनी कम जानकारी के आधार पर पूरे देश की सही तस्वीर पेश नहीं की जा सकती और इन रिपोर्टों के आंकड़ों पर यकीन नहीं किया जा सकता। भारत में कोरोना महामारी के दौरान सबसे ज्यादा मौतों का दावा करने वाली रिपोर्टों से जुड़े एक सवाल के उत्तर में मंत्री ने यह जवाब पेश किया है। 

ब्राजील, अमेरिका में करीब तीन हजार मरे
डब्ल्यूएचओ के डाटा के आधार पर केंद्र ने बताया, भारत प्रति 10 लाख आबादी पर सबसे कम मृत्यु वाले देशों में है। वहीं, महामारी से समान रूप से प्रभावित रहे अमेरिका में प्रति 10 लाख लोगों पर 2,920, ब्राजील में 3,092, रूस में 2,506 और मैक्सिको में 2,498 मौतें हुई हैं।

सभी राज्यों ने दी नियमित जानकारी
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने कहा, कोरोना मृतकों की संख्या बताने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को विस्तृत दिशानिर्देश दे रखे हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दस मई 2020 को देशभर से महामारी से होने वाली मौतों की उचित रिपोर्टिंग के लिए मार्गदर्शन जारी किया था। इसके तहत सभी राज्य स्वास्थ्य मंत्रालय को मृतकों की तादाद बताते हैं, जिसे नियमित तौर पर सार्वजनिक किया जाता है। 

प्रवीण पवार के मुताबिक, महामारी के दौरान कई राज्यों ने अपने आंकड़ों में पारदर्शिता से सुधार करते हुए छूटे हुए मृतकों की भी जानकारी दी है।

देश में मृत्यु पंजीकरण मजबूत
पवार ने कहा, भारत में कोरोना महामारी के पहले से सभी राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में मौतों का सही आंकड़ा दर्ज कराने के लिए मजबूत नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) और नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) मौजूद है। देशभर में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (आरबीडी) अधिनियम, 1969 के तहत राज्यों में संबंधित कर्मचारियों द्वारा मृतकों का पंजीकरण किया जाता है।
 

अधिकृत एजेंसी को ही फोन टैपिंग का अधिकार
सरकार ने कहा, देश की अधिकृत एजेंसियों को ही टेलीफोन टैप करने या उसकी निगरानी करने का अधिकार है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र से लोकसभा में पूछा गया था कि क्या राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को व्हाट्सएप सहित किसी भी डिजिटल सूचना को डिक्रिप्ट या निगरानी करने का अधिकार है? इस पर मंत्री ने बताया, सूचना प्रौद्योगिकी कानून-2000 के तहत ये केवल अधिकृत एजेंसी को ही ऐसा करने का अधिकार है।

जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्यों के 34 लोगों ने खरीदे भूखंड
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश में दूसरे राज्यों के अब तक 34 लोगों ने जमीन खरीदी है। पहली बार कश्मीर घाटी के गांदरबल जिले में भी राज्य के बाहर के लोगों ने भूखंड खरीदे। गत दिसंबर महीने तक राज्य के बाहर के महज सात लोगों ने ही भूखंड खरीदे और वह भी सारे भूखंड जम्मू इलाके के थे।

लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक ये 34 भूखंड जम्मू, रियासी, ऊधमपुर और गांदरबल जिले में खरीदे गए हैं। इनमें से रियासी और ऊधमपुर जम्मू क्षेत्र में हैं, जबकि गांदरबल घाटी का हिस्सा है। 

अनुच्छेद 370 हटते ही विशेष दर्जा खत्म
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 हटा दिया था। साथ ही राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। 
- विशेष दर्जा खत्म होने के बाद यहां बाहरी लोगों को भी संपत्ति खरीदने का अधिकार मिल गया था।

2016 से 20 तक देश में 3400 सांप्रदायिक दंगे हुए
सरकार ने लोकसभा को बताया है कि 2016 से 2020 तक देश में करीब 3400 सांप्रदायिक दंगे हुए। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस दौरान देश में दंगों के 2.76 लाख मामले दर्ज हुए। 

- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के हवाले से मंत्री ने कहा कि 2020 में 857 सांप्रदायिक या धार्मिक दंगों के मामले दर्ज किए गए। 2019 में 438, 2018 में 512, 2017 में 723 और 2016 में 869 मामले दर्ज किए गए।

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की दो योजनाएं
केंद्र सरकार की तरफ से दो योजनाओं के तहत जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने मंगलवार को एक सवाल के जवाब में लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार 2015-16 से क्लस्टर और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए दो योजनाएं शुरू की हैं। 

फसल लगाने से कटाई तक कर रहे हैं मदद
इनमें परंरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डवलपमेंट चला रही है। दोनों योजनाएं जैविक किसानों की फसल लगाने से कटाई तक और उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रमाणन से विपणन तक प्रबंधन में मदद कर रही है। इसके साथ ही जैविक उत्पादों की लागत को कम करने में भी मदद की जा रही है।

प्रत्येक क्लस्टर पर 20 लाख की अतिरिक्त मदद
पीकेवीवाई के तहत किसानों को तीन साल के लिए 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें से 31,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सीधे किसानों को उनके बैंक खातों में दिए जाते हैं। इसके अलावा मूल्यवर्धन और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 1,000 हेक्टेयर के प्रत्येक क्लस्टर पर तीन साल के लिए 20 लाख की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाती है।

एमओवीसीडीएनईआर के तहत एफपीओ के निर्माण, गुणवत्तापूर्ण बीज व रोपण सामग्री और प्रशिक्षण, हैंड होल्डिंग और प्रमाणन के लिए तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर 46,575 रुपये की राशि प्रदान की जा रही है।

विपक्ष ने उठाया श्रमिकों की हड़ताल का मुद्दा 
कांग्रेस और वाम दलों ने राज्यसभा में मंगलवार को श्रमिक संगठनों की दो दिन की हड़ताल का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने केंद्र सरकार से श्रमिकों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया। सभापति वेंकैया नायडू ने सदस्यों को इस पर एक-एक मिनट में अपनी बात कहने का समय दिया। सभापति ने सदस्यों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के लिए अलग से समय देने से इनकार कर दिया। सभापति ने सदस्यों को सुझाया कि रोजगार और श्रम के मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी है, इसलिए यदि वह चाहेंगे तो इन मुद्दों को विस्तार से उठा सकेंगे।  

नायडू ने कहा कि वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान महंगाई पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि को लेकर विस्तार से चर्चा हो रही है। इसमें सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। इसी तरह से जब श्रम और रोजगार पर चर्चा हो तो सदस्य हड़ताल और उससे जुड़े मुद्दों को विस्तार से उठा सकते हैं। इस दौरान एक मिनट के समय में शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि मजदूर भारत की अर्थव्यवस्था की नींव हैं, लेकिन मौजूदा सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के चलते उन्होंने हड़ताल की है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से श्रमिकों के अधिकारों पर कुठाराघात हो रहा है। 

एनएसई घोटाले में ट्रेडिंग प्रणाली तक पहुंच गए थे कुछ दलाल : वित्तमंत्री
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के को-लोकेशन घोटाले के दौरान कुछ शेयर दलाल कंपनियां ट्रेडिंग प्रणाली तक पहुंच गई थीं। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में मंगलवार को दी। 

उन्होंने बताया कि एनएसई में उच्च स्तर पर नियुक्ति में नियमों का उल्लंघन हुआ। यह केस भ्रष्टाचार निवारण व आईटी अधिनियम में दर्ज हुआ है। एनएसई की पूर्व सीईओ व एमडी चित्रा रामकृष्णा व अन्य अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया। चित्रा और सहयोगी व एनएसई का पूर्व जीओओ सीबीआई की हिरासत में हैं। 

सेबी ने किए कई सुधार : शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के सवाल के जवाब में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सेबी ने इन घपलों की विस्तृत जांच की है। कई सुधार व बदलाव किए गए। इनमें तकनीकी उपकरणों का उपयोग, फॉरेंसिक ऑडिटरों की तैनाती प्रमुख हैं।

कोविड के प्रभाव से तेजी से उबरी अर्थव्यवस्था से बनी रहेगी विकास की गति
वित्तमंत्री निर्मला सीतारणम ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि अर्थव्यवस्था कोविड के प्रभावों से तेजी से उबरी है, जिसकी वजह से आने वाले वर्षों में अच्छी विकास दर हासिल करने में मदद मिलेगी। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार सरकार मध्यम स्तर पर विकास और सूक्ष्म स्तर पर समावेशी कल्याण की योजना को लेकर आगे बढ़ रही है।

इसके लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, प्रौद्योगिकी सक्षम विकास, ऊर्जा संक्रमण और जलवायु कार्रवाई को प्रोत्साहन देने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने इसे निवेश और विकास का पुण्य चक्र बताते हुए कहा, 2014 में ही सरकार ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया था। जीएसटी, दिवाला और दिवालियापन संहिता व कॉर्पोरेट कर की दर में कमी निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख सुधार रहे हैं। 

विनियोग और वित्त विधेयक को राज्यसभा में भी मिली मंजूरी
 लोकसभा के बाद राज्यसभा में मंजूरी के लिए पेश विनियोग और वित्त विधेयक को दो दिन की चर्चा के बाद मंगलवार को मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्तमान बजट आने वाले सालों में विकास की गति को बनाए रखने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया के 32 विकसित देशों की अर्थव्यवस्था कोविड महामारी से प्रभावित हुई उन्होंने खुद को पटरी पर लाने और संसाधन जुटाने के लिए करों में बढ़ोत्तरी की जबकि भारत ने करों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 

चार्टर्ड एकाउंटेंट से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा में केंद्र को घेरा, लगाया आरोप
संसद में विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) पर कॉरपोरेट मंत्रालय का शिकंजा कस रही है और इससे जुड़ा संशोधन विधेयक इस पेशे की आजादी का हनन करेगा। मंगलवार को लोकसभा में ‘चार्टर्ड एकाउंटेंट, लागत व संकर्म लेखापाल और कंपनी सचिव (संशोधन) विधेयक, 2021’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने कहा कि केंद्र ने वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सुझावों को शामिल नहीं किया है, जिसके पास बिल को जांच के लिए भेजा गया था।

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद डॉ एमके विष्णु प्रसाद ने कहा, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) एक वैधानिक और स्वायत्त निकाय है लेकिन फिर भी यह अब तक कॉरपोरेट मामलात मंत्रालय के अधीन है जबकि वह संस्थान को फंडिंग भी नहीं देता। उन्होंने आईसीएआई में अनुशासन समिति का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इसमें नए कानून से अपने नामित लोगों की संख्या बढ़ाने जा रही है, जिससे इसका स्वतंत्र कामकाज प्रभावित होगा और सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा।

वहीं, द्रमुक सांसद ए राजा और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि विधेयक लाने के पीछे सरकार का कोई छिपा एजेंडा प्रतीत होता है। सदन में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा ने कहा कि समय के साथ किसी भी कानून में संशोधन जरूरी होता है। सरकार इन संस्थानों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए ठोस तंत्र बनाना चाहती है और इससे उनकी स्वायत्तता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ब्यूरो

विधेयक में यह बदलाव : इस विधेयक के जरिए चार्टर्ड एकाउंटेंट्स अधिनियम 1949, लागत व संकर्म लेखापाल अधिनियम, 1959 और कंपनी सचिव अधिनियम, 1980 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इसमें अनुशासन निदेशालयों की शिकायतों और सूचना संबंधी क्षमताओं को बढ़ाकर अनुशासन तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ संस्थानों के सदस्यों के विरूद्ध मामलों के जल्दी निपटारे के लिए समय सीमा निर्धारित करने का उपबंध किया गया है।

एक दशक में अर्द्धसैनिक बलों के 1,205 अफसरों जवानों ने की आत्महत्या
बीते एक दशक में देश के अर्द्धसैनिक बलों के 1,205 कर्मचारियों ने आत्महत्या की है। एक सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि सबसे ज्यादा 156 मामले 2021 में सामने आए।
 
इसके अलावा 2020 में 143, 2019 में 129, 2018 में 96, 2017 में 125, 2016 में 92, 2015 में 108, 2014 में 125, 2013 में 113 और 2012 में 118 कार्मिकों ने आत्महत्या की। राय ने बताया कि इनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल्स के जवान व अधिकारी शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में आत्महत्या की वजह घरेलू समस्याएं, बीमारी और आर्थिक तंगी थी। ब्यूरो

जीआईसी के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं 
 सरकार ने कहा कि जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (जीआईसी) के निजीकरण का कोई सवाल नहीं है। वित्त राज्यमंत्री भागवत के कराड ने राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि जीआईसी के निजीकरण का सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सूचना के मुताबिक, 31 मार्च, 2021 तक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और जीआईसी के पास क्रमश: 38.04 लाख करोड़ और 1.35 लाख करोड़ की संपत्ति है।

nएक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले पांच सालों में सरकारी बैंकों को 2,86,043 करोड़ की पूंजी दी और अब उनके पास पर्याप्त पूंजी है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पिछले तीन सालों में पूंजी की स्थिति में सुधार आया है। 

सुल्ली डील्स और बुल्ली बाई एप मामले में छह की गिरफ्तारी
सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पुलिस ने ‘सुल्ली डील्स’ और ‘बुल्ली बाई’ एप से जुड़े मामलों में दिल्ली और मुंबई में प्राथमिकी दर्ज की है और इस मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी हुई है। सुल्ली डील्स मामले में 4 मार्च को एक आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र ने एक सवाल के जवाब में यज जानकारी दी। 

 

ई-वीजा सुविधा फिर 156 देशों के नागरिकों को उपलब्ध
गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि कोविड से पहले 171 देशों के नागरिकों को ई-वीजा सुविधा दी जा रही थी। मार्च 2020 में कोविड रोकथाम के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के तहत इस सुविधा को बंद कर दिया गया। हालांकि, अब इसे फिर से शुरू कर दिया गया है। अभी तक 156 देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा की सुविधा शुरू की जा चुकी है।

भाजपा सांसद गौतम गंभीर की तरफ से उठाए गए सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि ई-वीजा पांच श्रेणियों में उपलब्ध है। इनमें टूरिस्ट वीजा, ई-बिजनेस वीजा, ई-मेडिकल वीजा आदि शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सुरक्षा, पर्यटन और निवेश संबंधित द्विपक्षीय संबंधों आदि के मुद्दों पर विचार करने के बाद ई-वीजा सुविधा प्रदान की जाती है। 
 

दो साल में 466 एनजीओ के विदेशी चंदा लाइसेंस रद्द
सरकार ने कहा है कि विदेशी चंदा नियमन कानून के तहत 2020 से अब तक 466 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन को अस्वीकार किया गया है। 
गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुनिल के प्रश्न के उत्तर में कहा कि आवेदनों को इसलिए अस्वीकृत किया गया, क्योंकि उन्होंने विदेशी चंदा नियमन कानून के प्रावधानों के पात्रता मानदंड को पूरा नहीं किया था।

मंत्री ने कहा कि 2020 में कुल 100 एनजीओ के आवेदन, 2021 में 341 आवेदन और इस साल 21 मार्च तक 25 एनजीओ के आवेदनों को नामंजूर किया गया है। मंत्री ने कहा कि पंजीकरण दिशानिर्देश में बदलाव का सरकार का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed