भ्रामक विज्ञापन करने पर मशहूर हस्तियों को होगी जेल
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नामचीन हस्तियां अब भ्रामक विज्ञापन के जरिये लोगों को उत्पाद के प्रति लुभा नहीं पाएंगी। भ्रामक विज्ञापन करने पर उन्हें जुर्माने के तौर पर मोटी रकम अदा करने के अलावा जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
उपभोक्ता संरक्षण विधेयक में सुधार की सलाह देते हुए संसद की खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण पर बनी स्थाई समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी है। समिति ने सरकार से भ्रामक विज्ञापन करने वाले नामचीन हस्तियों के खिलाफ कडे़ कानून बनाने की सिफारिश की है।
समिति ने भ्रामक विज्ञापन करने वाले नामचीन हस्तियों के लिए कानून के नियम कडे़ करने की सिफारिश करते हुए कहा है कि प्रख्यात व्यक्तियों के जरिये पहली बार भ्रामक विज्ञापन का अपराध होने पर 10 लाख का जुर्माना या एक साल की कैद अथवा दोनों से दंडित किया जाना चाहिए।
समिति ने कहा है कि दूसरी बार अपराध होने के मामले में दोषी को 50 लाख रुपये का जुर्माना और 5 साल की कैद से दंडित किया जाए। समिति ने कहा है कि खाद्य उत्पाद की गलत व्याख्या को गंभीरता से लेना चाहिए। संसदीय समिति ने कहा है कि भ्रामक विज्ञापनों के मामले में नामचीन हस्तियों पर नकेल कसने के लिए मौजूदा कानून में नियम कड़े नहीं हैं।
नामचीन हस्तियों पर भ्रामक विज्ञापन के लिए कड़े दंड की वकालत करते हुए समिति ने कहा है कि विभिन्न उत्पादों के प्रचार के लिए ऐसे सम्मानित और प्रख्यात व्यक्तियों को ब्रांड एंबेसडर बनाया जाता है। जिनके दावों पर लोग आंखें बंद करके विश्वास कर लें।
लोगों में नामचीन हस्तियों के दावे पर विश्वास की प्रवृति होती है। ऐसा देखा गया है कि नामचीन लोग अक्सर ऐसे अवास्तविक दावे करते हैं जोकि भ्रामक होते हैं। समिति का मानना है कि नामचीन हस्तियों की इस प्रवृति पर रोक लगनी चाहिए।
केंद्र सरकार के पाले में पहुंचा मामला
संसदीय समिति की सिफारिश के बाद नामचीन हस्तियों के खिलाफ कडे़ नियम बनाने का मामला अब दोबारा से केंद्र सरकार के पाले में आ गया है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान उपभोक्ताओं के हित का ध्यान रखते हुए यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि संसदीय समिति ने भ्रामक विज्ञापन को लेकर नामचीन हस्तियों के खिलाफ नियम कडे़ बनाने की सिफारिश करेगी। तो सरकार पीछे नहीं हटेगी।
रअसल सरकार को कहीं न कहीं कंपनियों के नाराजगी का भी भय है। लेकिन संसदीय समिति ने नामचीन हस्तियों के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन पर कड़े नियम बनाने की वकालत करके सरकार की राह आसान कर दी है।