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तकनीकी सहायता घोटाले की जांच के तहत छह कंपनियों के खिलाफ सीबीआई की छापेमारी
Sat, 17 Oct 2020 12:02 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 17 Oct 2020 12:02 AM IST
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सांकेतिक चित्र
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने छह कंपनियों के खिलाफ छापेमारी में 190 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति बरामद की है। इन कंपनियों के खिलाफ माइक्रोसॉफ्ट उपभोक्ताओं को एक तकनीकी सहायता घोटाले के तहत निशाना बनाने के लिए मामला दर्ज किया गया है। अमेरिका के न्याय विभाग ने इस जांच की प्रशंसा की है। यह जानकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को दी।
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सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौड़ ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि सीबीआई ने गत 17 सितंबर को की गई छापेमारी के दौरान 55 लाख रुपये का सोना, कुल 25 लाख रुपये की नकदी के अलावा काफी डिजिटल सबूत जब्त किये जिससे दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश स्थित छह आरोपी कंपनियों की इस कथित गतिविधियों में लिप्त होने के संकेत मिलते हैं।
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उन्होंने कहा कि सीबीआई उन धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ अमेरिकी एजेंसियों और अन्य मित्र देशों के अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है जिन्होंने कम्प्यूटर उपयोगकर्ताओं को उनके सिस्टम में मैलवेयर होने का पॉप-अप संदेश कथित तौर पर भेजकर उनके कंप्यूटरों को रिमोट कंट्रोल पर लिया।
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अधिकारियों ने बताया कि जब उपयोगकर्ता पॉप-अप पर दिए गए नंबर को डायल करते थे तो कॉल केंद्र के अधिकारियों को जुड़ जाती थी जो गैर-मौजूद मैलवेयर को हटाने के लिए भारी रकम की मांग करते और वे उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटरों में अनावश्यक हानिकारक सॉफ्टवेयर्स भी लगा देते थे।
केंद्रीय एजेंसी ने आरोपी कंपनियों- नयी दिल्ली स्थित सॉफ्टविल इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड और सबुरी टीएलसी वर्ल्डवाइड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर स्थित इनोवाना थिंक लैब्स लिमिटेड और सिस्टविक सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा स्थित बेनोवेलिएंट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और नोएडा एवं गुरुग्राम स्थित सबूरी ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के परिसरों में छापेमारी की।
गौड़ ने कहा कि इस मामले में जारी जांच के तहत छापेमारी जयपुर, दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) सहित विभिन्न स्थानों पर निजी कंपनियों के परिसरों और आरोपी व्यक्तियों के आवासीय परिसरों में की गई।
अमेरिका के न्याय विभाग (डीओजे) ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि आज एक शिकायत दर्ज किये जाने के साथ-साथ भारत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक ‘‘अभूतपूर्व सहयोगी’’ प्रयास के तहत दिल्ली, नोएडा, गुरूग्राम और जयपुर स्थित कॉर्पोरेट और व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की।
सिविल डिवीजन के कार्यवाहक सहायक अटॉर्नी जनरल जेफरी बोसर्ट क्लार्क ने अमेरिका में एक बयान में कहा, ‘‘न्याय विभाग तकनीकी-समर्थन धोखाधड़ी, सरकार को धोखा देने और अमेरिकी जनता के खिलाफ निर्देशित अन्य सभी प्रयासों को रोकने और मामला चलाने के सीबीआई के प्रयासों की सराहना करता है।’’
अमेरिकी प्राधिकारियों ने इस घोटाले के खिलाफ फ्लोरिडा की एक अदालत में शिकायत दायर की है, जिस पर बृहस्पतिवार को अदालत ने कथित धोखाधड़ी करने वालों के इंटरनेट आधारित बुनियादी ढांचे को विघटित करने का एक आदेश जारी किया।
डीओजे के बयान में कहा गया कि शिकायत के अनुसार कैलिफोर्निया के ग्लेनडेल के 59 वर्षीय माइकल ब्रायन कॉटर ने इस योजना को आगे बढ़ाने में भारत स्थित सहयोगियों को जानबूझकर अमेरिकी समर्थन प्रदान किया।
इसमें कहा गया, ‘‘कॉटर ने कई कंपनियों के माध्यम से इस योजना में सुविधा प्रदान की, जिसमें सिंगापुर में पंजीकृत ग्लोबल डिजिटल कंसियर्ज पीटीई लिमिटेड, जिसे पहले टेक लाइव कनेक्ट पीटीई लिमिटेड के रूप में जाना जाता था, नेवाडा में पंजीकृत कंपनियों सेंसई वेंचर्स इनकॉर्पोरेटेड और एनई लैब्स इंक, न्यूयॉर्क में पंजीकृत केविसॉफ्ट एलएलसी और ब्रिटेन में पंजीकृत केविसॉफ्ट यूके लिमिटेड शामिल हैं। आज अदालत द्वारा जारी अस्थायी निरोधक आदेश इन प्रतिवादियों की अमेरिकी अवसंरचना, जैसे वेबसाइटों और भुगतान प्रसंस्करण संबंधों को नष्ट करता है और प्रतिवादियों को कथित योजना को सुविधाजनक बनाने पर रोक लगाता है।’’
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कॉटर डोमेन स्थापित करने, शेल कंपनियों की स्थापना और बैंकों और भुगतान ऑपरेटरों के माध्यम से भुगतान बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए 2011 से भारतीय षड्यंत्रकारियों के साथ काम कर रहा था
इसमें कहा गया है, ‘‘आरोप है कि पीड़ितों ने अवांछित और अनावश्यक तकनीकी-सहायता सेवाओं के लिए योजना को हजारों डॉलर का भुगतान करने की सूचना दी है।’’
गौड़ ने कहा कि सीबीआई द्वारा अन्य देशों की संघीय एजेंसियों के साथ इसी तरह का समन्वय किया जा रहा है।