सीबीआई चीफ बने रहेंगे आलोक वर्मा, बड़े फैसले लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
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सीबीआई विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। फैसले से जहां केंद्र सरकार को झटका लगा है वहीं जांच एजेंसी के निदेशक वर्मा को भी पूरी तरह से राहत नहीं मिली है। सीबीआई निदेशक ने सरकार द्वारा उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। आज इस मामले में उन्हें 75 दिन बाद राहत मिली है। अदालत ने सरकार के 23 अक्तूबर को दिए आदेश को निरस्त कर दिया है लेकिन यह भी कहा है कि सीवीसी जांच पूरी होने तक वर्मा कोई बड़ा निर्णय नहीं ले सकते हैं। इसके साथ ही सीबीआई के अतंरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है।
फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के आदेश को रद्द करने के बाद आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल कर दिया है। अदालत का कहना है कि डीएसपीई अधिनियम के तहत उच्च शक्ति समिति एक हफ्ते के अंदर उनके मामले पर कार्रवाई करने का विचार करें। जब तक उच्च स्तरीय समिति आलोक वर्मा पर कोई फैसला ने ले वह कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते हैं।
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अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को आलोक वर्मा को हटाने के मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधान मंत्री और विपक्ष के नेता वाली चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। बता दें कि वर्मा का सीबीआई मुखिया के तौर पर कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है।
वर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा उनके अधिकार छीनने और जबरन छुट्टी पर भेजने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सरकार ने वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच विवाद सार्वजनिक होने के बाद यह कार्रवाई की थी। हालांकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आज छुट्टी पर थे इसलिए उनकी अनुपस्थिति में जस्टिस संजय किशन कौल ने फैसला पढ़ा।
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इससे पहले 6 दिसंबर को मामले की सुनवाई हुई थी। जिसमें आलोक वर्मा, केंद्र और सीवीसी की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने एनजीओ कॉमन कॉज की याचिका पर भी सुनवाई की थी। इस याचिका में राकेश अस्थाना समेत सीबीआई अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अदालत की निगरानी में एसआईटी जांच करने की मांग की गई थी।
वर्मा ने सीवीसी और कार्मिक विभाग के 23 अक्तूबर 2018 के कुल तीन आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। उनका आरोप था कि ये आदेश क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर किए गए हैं। साथ ही यह संविधान के मौलिक अधिकारों के विपरीत है।
CBI Director Alok Verma's plea: Supreme Court says, the government should have referred to the Select Committee consisting of the Chief Justice of India, Prime Minister and Leader of Opposition to initiate Alok Verma’s removal.
— ANI (@ANI) January 8, 2019