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CBI: 8 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी गिरफ्तार, सीबीआई से बचने के लिए बदला था नाम; 50 हजार रुपये का था इनाम

Thu, 17 Jul 2025 07:49 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 17 Jul 2025 07:49 PM IST
सार

बैंक धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से फरार घोषित अपराधी मणि एम. शेखर को सफलतापूर्वक सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। मेसर्स इंडो मार्क्स प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों के नाम पर गैर-निधि-आधारित सीमाओं के दुरुपयोग के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक, ओवरसीज शाखा, बेंगलुरु को 8 करोड़ रुपये की बेईमानी और धोखाधड़ी से धोखा देने का आरोप है।

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CBI: Accused of fraud of 8 crores arrested, had changed name to escape CBI
सीबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 8 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से फरार घोषित अपराधी मणि एम. शेखर का सफलतापूर्वक पता लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला सीबीआई बीएसएफबी बेंगलुरु में 01.08.2006 को रामानुजम मुथुरामलिंगम शेखर उर्फ आरएम शेखर, एमडी, मेसर्स इंडो मार्क्स प्राइवेट लिमिटेड और मणि एम. शेखर, निदेशक, मेसर्स इंडो मार्क्स एंड बीटीसी होम प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सहित आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। इन सभी पर 2002 से 2005 की अवधि के दौरान एक आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप था। मेसर्स इंडो मार्क्स प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों के नाम पर गैर-निधि-आधारित सीमाओं के दुरुपयोग के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक, ओवरसीज शाखा, बेंगलुरु को 8 करोड़ रुपये की बेईमानी और धोखाधड़ी से धोखा देने का आरोप है।

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जांच पूरी होने के बाद, मामले में आरोप पत्र 10.12.2007 को दायर किया गया था। दोनों आरोपी, रामानुजम मुथुरामलिंगम शेखर उर्फ आरएम शेखर (पति) और मणि एम. शेखर (पत्नी) मुकदमे में शामिल होने या सम्मन/वारंट का जवाब देने में विफल रहे। इसके बाद, उन्हें 27.02.2009 के अदालती आदेश के तहत उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया। वर्षों से उनका पता लगाने के निरंतर प्रयासों के बावजूद, ये फरार आरोपी अब तक लापता थे, जिससे सीबीआई को सूचना देने वालों का सुराग देने के लिए प्रत्येक पर 50,000/- रुपये का इनाम घोषित करना पड़ा। 
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अन्य सह-आरोपियों पर मुकदमा चला और उन्हें मामले में दोषी ठहराया गया/बरी कर दिया गया। इन दो फरार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लंबित रहा। उन्होंने अपना नाम बदलकर कृष्ण कुमार गुप्ता (पति) और गीता कृष्ण कुमार गुप्ता (पत्नी) रख लिया। अपने मोबाइल नंबर, ईमेल, पैन नंबर और अन्य जानकारी भी चार्जशीट दाखिल होने से पहले बदल ली। सीबीआई ने इन फरार लोगों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करने के लिए इमेज सर्च की उन्नत विश्लेषणात्मक क्षमताओं का लाभ उठाया। छवि तुलना और विश्लेषण उपकरणों की मदद से इंदौर, मध्य प्रदेश में बदले हुए नाम और पहचान के तहत रह रहे इन दो आरोपियों की पहचान हुई। इस मिलान पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई अधिकारियों की एक टीम ने सावधानीपूर्वक फील्ड सत्यापन के बाद आरोपियों को इंदौर, मध्य प्रदेश में सफलतापूर्वक ढूंढ निकाला, जहां वे फर्जी पहचान के तहत रह रहे थे।
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तलाशी अभियान के दौरान पता चला कि एक आरोपी रामानुजम मुथुरामलिंगम शेखर उर्फ आरएम शेखर की 2008 में ही (नई पहचान के तहत) मृत्यु हो चुकी थी। अन्य आरोपी मणि एम. शेखर को अंततः 12.07.2025 को गिरफ्तार किया गया। उन्हें बेंगलुरु की अदालत में पेश किया गया, जिसने आरोपी को आगे की सुनवाई के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वर्तमान में, आरोपी लगभग दो दशकों तक फरार रहने के बाद मुकदमे का सामना कर रहा है। यह मामला इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे प्रौद्योगिकी-संचालित प्लेटफॉर्म को जमीनी स्तर पर जांच अधिकारियों के समर्पित प्रयासों के साथ जोड़कर, लंबे समय से फरार अपराधियों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने में कानून प्रवर्तन एजेंसी की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया जा सकता है।

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