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Caste Census: कर्नाटक कैबिनेट में 'जाति गणना' की रिपोर्ट पेश, 17 अप्रैल तक मंत्री सिफारिशों पर करेंगे विचार

Fri, 11 Apr 2025 10:51 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 11 Apr 2025 10:51 PM IST
सार

कर्नाटक में जाति जनगणना का सर्वे 2015 में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में शुरू हुआ था। जो दूसरे कार्यकाल के दौरान अब पूरा हुआ है। बहुप्रतीक्षित सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट शुक्रवार को कर्नाटक कैबिनेट के समक्ष पेश की गई।

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'Caste Census' report presented in Karnataka Cabinet, ministers will consider the recommendations by April 17
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : ANI

विस्तार

बहुप्रतीक्षित सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट शुक्रवार को कर्नाटक कैबिनेट के समक्ष पेश की गई। इस रिपोर्ट को 'जाति गणना' के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, कुछ मंत्रियों ने कहा कि वे पहले सिफारिशों पर विचार करना चाहते हैं। इस कारण 17 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक होगी। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि यह निर्णय किया गया है कि 17 अप्रैल को एक विशेष कैबिनेट बैठक में जाति जनगणना पर चर्चा की जाएगी।
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50 खंडों में है जाति जनगणना रिपोर्ट- तंगादागी
पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री शिवराज तंगादागी के अनुसार, जाति जनगणना रिपोर्ट 50 खंडों में है। इसमें 1.38 करोड़ परिवारों के 5.98 करोड़ लोग शामिल हैं। तंगादागी ने पत्रकारों से कहा, इसमें 94.77 प्रतिशत लोग शामिल हैं। केवल 5.23 प्रतिशत लोग इसके दायरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना 1.6 लाख अधिकारियों की मदद से तैयार की गई थी, जिसमें 79 आईएएस अधिकारी, 777 वरिष्ठ स्तर के अधिकारी, 1,33,825 शिक्षक और कृषि एवं अन्य विभागों के 22,190 कर्मचारी शामिल थे।
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पिछले साल पेश हुई थी सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट
सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट पिछले साल फरवरी में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के जयप्रकाश हेगड़े की ओर से मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को सौंपी गई थी। बता दें कि, जाति जनगणना का यह सर्वे 2015 में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में शुरू हुआ था। ये एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था, जिसमें 1.6 लाख से ज्यादा कर्मचारियों ने 162 करोड़ रुपये की लागत से 1 करोड़ से अधिक घरों का दौरा किया।

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