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CJI BR Gavai: टैक्स ट्रिब्यूनल में ₹6.85 लाख करोड़ से संबंधित मामले लंबित, सीजेआई गवई ने जताई चिंता
Wed, 08 Oct 2025 11:41 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 08 Oct 2025 11:41 PM IST
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चीफ जस्टिस बीआर गवई ने लंबित मामलों पर चिंता जताई (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में लंबित मामलों की भारी संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे बड़ी समस्या बताया और कहा कि केवल आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) में ही लगभग ₹6.85 लाख करोड़ के विवाद लंबित हैं। सीजेआई गवई ने कहा, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का दो प्रतिशत से अधिक हैं। चीफ जस्टिस गवई ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित संगोष्ठी 'आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) – भूमिका, चुनौतियां और आगे का रास्ता' में लंबित मामलों के निपटारे के प्रयासों को भी रेखांकित किया।
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उन्होंने ITAT की सराहना करते हुए कहा, पिछले पांच वर्षों में लंबित मामलों की संख्या 85,000 से घटाकर 24,000 कर हुई है। यह उपलब्धि न्यायाधिकरण के सदस्यों और अधिवक्ताओं के सहयोग से ही संभव हो पाई है। बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सीजेआई गवई ने कहा, ITAT ने त्वरित न्याय निष्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, अब समय है कि इसकी संरचना और प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार किए जाएं।
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सीजेआई गवई ने कहा, पारदर्शिता, एकरूपता और क्षमता निर्माण ITAT की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए जरूर हैं। चीफ जस्टिस गवई ने कहा, सुधारों में नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल, प्रशिक्षण, केस प्रबंधन और तकनीक को एक साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए, न कि अलग-अलग नीतिगत कदमों के रूप में। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, विभिन्न बेंचों के परस्पर विरोधी निर्णय जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब न्यायालय और अधिकरण तर्कसंगत व सुसंगत निर्णय देते हैं, तब कानून स्थिर और विश्वसनीय बनता है। विरोधाभासी निर्णय न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं।
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