फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   case of the Indian baby currently in foster care in Germany is a sensitive matter mea

MEA: जर्मनी में भारतीय जोड़े को नहीं मिल रही अपनी ही बेटी से मिलने की अनुमति, विदेश मंत्रालय ने कही ये बात

Fri, 25 Nov 2022 07:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 25 Nov 2022 07:14 PM IST
सार

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, जर्मनी में भारतीय बच्ची का मामला संवेदनशील और न्यायाधीन है। भारत सरकार सितंबर 2021 (एक साल से ज्यादा समय) से इस मामले में जर्मन अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है।

विज्ञापन
case of the Indian baby currently in foster care in Germany is a sensitive matter mea
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची - फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)

विस्तार

जर्मनी में रहने वाले गुजराती जोड़े को पिछले दो साल से अपनी ही बेटी से मिलने की अनुमति नहीं मिल रही है। बच्ची जर्मन प्रोटेक्शन अथॉरिटी के पास है। पहले उन्हें फिट टू बी पैरेंट्स सर्टिफिकेट लाने को कहा गया था। उन्होंने भारत सरकार से भी मामले में मदद की गुहार लगाई थी। इस बीच, विदेश मंत्रालय का शुक्रवार को इस मामले को लेकर बयान सामने आया है। 

विज्ञापन


विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, जर्मनी में भारतीय बच्ची का मामला संवेदनशील और न्यायाधीन है। भारत सरकार सितंबर 2021 (एक साल से ज्यादा समय) से इस मामले में जर्मन अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है। मंत्रालय ने कहा, हम निजता के मुद्दों और मामले से जुड़ी परिस्थिति की संवेदनशील प्रकति को लेकर सचेत हैं। बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास भी परिवार को प्रासंगिक कांसुलर सहायता प्रदान कर रहा है।
विज्ञापन


मंत्रालय ने कहा कि वह अदालती कार्यवाही से शीघ्र निष्कर्ष की अपेक्षा के साथ जर्मन अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है। बच्ची की सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है ये पूरा मामला

भावेश और धारा गुजरात के रहने वाले हैं। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में साल 2018 से राजधानी बर्लिन में जॉब कर रहे हैं। 2021 में बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद बिटिया के नाना-नानी भी अपनी नातिन से मिलने पहुंचे। एक दिन बच्ची के प्राइवेट पार्ट में किसी वजह से चोट लगी और खून बहने लगा। फिर धारा उसे स्थानीय अस्पताल ले गई। यहां डॉक्टर्स ने उनसे कहा कि बच्चों में इस तरह की चोट सामान्य है। फिर धारा बेटी को घर ले आईं। 

लेकिन दूसरे दिन भी बच्ची की ब्लीडिंग नहीं रुकी तो वह उसे फिर अस्पताल लेकर पहुंची। अस्पताल के स्टाफ ने चाइल्ड प्रोटेक्शन टीम को इसकी जानकारी दी। अफसरों को पहली नजर में यह यौन उत्पीड़न का मामना लगा तो उन्होंने उसे इसी डिपार्टमेंट के हवाले कर दिया। इसके बाद जांच में यौन उत्पीड़न की भी बात साबित नहीं हुई। 

जांच में यह बात साबित न होने पर भी जोड़े को बच्ची को नहीं सौंपा गया। उनसे यह सबाति करने के लिए कहा गया कि वे बच्ची को पालने के काबिल हैं। उन्हें फिट टू बी पेरेंट्स सर्टिफिकेट लाने को कहा गया। पति-पत्नी इस सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिए लीगल अथॉरिटी के कई सेशन अटैंड कर चुके हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया अब भी जारी है।  


भारत-यूएई के केंद्रीय बैंकों ने रुपये, दिरहम में व्यापार पर चर्चा की 
इस बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के केंद्रीय बैंक लेनदेन की लागत कम करने के मकसद से रुपये और दिरहम में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा कर रहे हैं। यूएई में भारत के राजदूत संजय सुधीर ने कहा कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए अवधारणा पत्र का विचार भारत ने रखा था। भारत और यूएई ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए फरवरी में पहले ही मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed