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विदेश से सोना लाने का मामला: अभिषेक की पत्नी के खिलाफ सितंबर में हो सकती है सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने तय की तार

Fri, 29 Jul 2022 08:37 PM IST
अभिषेक दीक्षित अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 29 Jul 2022 08:37 PM IST
सार

कस्टम विभाग का आरोप है कि पुलिस दोनों को एयरपोर्ट से जबरन निकालकर ले गई थी। कस्टम विभाग ने इसके बाद रुजिरा को मामले में पूछताछ के लिए हाजिर होने के लिए नोटिस भेजा था।

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Case of bringing gold from abroad Hearing against Abhishek Banerjee wife held in September in Supreme Court
अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी - फोटो : social media

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी के खिलाफ कस्टम विभाग की ओर से दायर मामले में सुप्रीम कोर्ट पांच सितंबर को सुनवाई कर सकता है। उन पर विदेश से गैरकानूनी ढंस से सोना देश में लाने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि मार्च 2019 में रुजिरा को कोलकाता एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने कथित तौर पर सोने के गहनों के साथ रोका था। रुजिरा के साथ उनकी बहन मेनका गंभीर भी थीं। दोनों बैंकॉक से कोलकाता पहुंची थीं।

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कस्टम विभाग का आरोप है कि पुलिस दोनों को एयरपोर्ट से जबरन निकालकर ले गई थी। कस्टम विभाग ने इसके बाद रुजिरा को मामले में पूछताछ के लिए हाजिर होने के लिए नोटिस भेजा था। रुजिरा ने इसके खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने कस्टम विभाग के नोटिस को खारिज कर दिया था, जिसके बाद कस्टम विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मामला किया गया था। अब जानकारी मिली है कि पांच सितंबर को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

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अन्नाद्रमुक विवाद पर शीर्ष अदालत का निर्देश

Case of bringing gold from abroad Hearing against Abhishek Banerjee wife held in September in Supreme Court
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने अन्नाद्रमुक पार्टी की आम परिषद की बैठक के खिलाफ ओ. पनीरसेल्वम गुट की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट को तीन हफ्ते के भीतर फैसला करने का शुक्रवार को निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश एनवी. रमण की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने ओ. पनीरसेल्वम और ई. पलानीस्वामी गुटों से पार्टी के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने को भी कहा। गौरतलब है कि पार्टी की आम परिषद की बैठक में अन्नाद्रमुक में दोहरे नेतृत्व वाले ‘मॉडल’ को समाप्त कर दिया गया था और ई. पलानीस्वामी को पार्टी के अंतरिम महासचिव के रूप में पदोन्नत किया गया था। वहीं, ओ. पनीरसेल्वम को ‘पार्टी-विरोधी’ गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया था।
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