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भारतीय सेना: महिला एसएससी अधिकारियों के लिए रिक्तियां बढ़ाने की तत्काल जरूरत, कैग की रिपोर्ट में दी गई जानकारी

Wed, 06 Apr 2022 08:58 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 06 Apr 2022 08:58 PM IST
सार

कैग की एक रिपोर्ट में सेना में महिला एसएससी अधिकारियों के लिए रिक्तियां बढ़ाने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया गया है।

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CAG report says urgent need for increasing vacancies for women SSC officers in Army news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि भारतीय सेना में महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारियों के लिए रिक्तियां बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। यह बात कैग की ओर से बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कही गई। 

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'भारतीय सेना में अधिकारियों का चयन और प्रशिक्षण' नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2020 तक सेना में महिला अधिकारियों की संख्या 1648 थी। यह आंकड़ा सेना में कमीशन किए गए कुल अधिकारियों की संख्या का केवल चार फीसदी है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवाओं में शामिल होने की इच्छुक भावी महिला उम्मीदवारों की संख्या उनके लिए उपलब्ध रिक्तियों से कहीं अधिक थी। महिलाओं के लिए रिक्तियां बढ़ाने से सेना को अधिकारियों की कमी की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा।
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रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के लिए सभी चार प्रवेश पाठ्यक्रम पूरी तरह भरे हुए थे। वहीं, मेधावी महिला उम्मीदवार जो चिकित्सकीय रूप से फिट पाई गईं, वे रिक्तियों के आधार पर अंतिम रूप से चयनित उम्मीदवारों की संख्या से लगभग दोगुनी थीं।

इसके अलावा गैर तकनीकी पदों पर पुरुषों के अनुपात में साल 2015 के 29 फीसदी की तुलना में साल 2019 में रिक्तियों की संख्या 50 फीसदी हो गई थी। लेकिन तकनीकी पदों के लिए रिक्तियां 16 फीसदी से कम होकर आठ फीसदी पर पहुंच गई हैं।

रेल परिवहन व्यवस्था में सुधार नहीं: कैग
रेलवे ट्रैक से जुड़े बुनियादी ढांचे में वित्त वर्ष 2008 से 2019 के दौरान 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने के बावजूद अपनी परिवहन व्यवस्था के परिणाम में सुधार करने में विफल रहा है। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने संसद में बुधवार को पेश रिपोर्ट में यह बात कही। इसमें यह भी कहा गया है कि रेलवे की ‘मिशन रफ्तार’ योजना भी ट्रेनों की गति बढ़ाने में विफल रही।


भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना पर भी रिपोर्ट
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने कहा है कि भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना के प्रदर्शन ऑडिट से योजना और वित्तीय प्रबंधन में अपर्याप्तता उजागर हुई है तथा खराब अनुबंध प्रबंधन और खराब कार्यों के निष्पादन के चलते अनुचित देरी और लागत में वृद्धि हुई है। संसद में पेश की एक रिपोर्ट में कैग ने कहा कि केंद्र सरकार ने 3,853 करोड़ रुपये की लागत के साथ नवंबर 2010 में भारत-नेपाल सीमा पर बिहार (564 किमी), उत्तर प्रदेश (640 किमी) और उत्तराखंड (173 किमी) में 1,377 किलोमीटर सड़कों का निर्माण शुरू किया था। गृह मंत्रालय ने 31 मार्च 2021 तक इन राज्यों को कुल 1,709.17 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की। परियोजना को पूरा करने की समय सीमा मार्च 2016 थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर दिसंबर 2022 कर दिया गया।

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