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10 दिन में वीजी सिद्धार्थ के पास आयकर की दर्जनों कॉल, दो उद्योगपतियों से लगातार हुई बातचीत

Wed, 31 Jul 2019 08:44 AM IST
Gaurav Pandey जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Wed, 31 Jul 2019 08:44 AM IST
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Cafe chain CCD Owner VG Siddhartha Missing, Bengaluru police is investigating in his office
वीजी सिद्धार्थ - फोटो : ट्विटर
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  • वीजी सिद्धार्थ के गायब होने से पहले उनके मोबाइल फोन पर आयकर विभाग की दर्जनों कॉल
  • कर्नाटक के ही दो उद्योगपति भी फोन पर लगातार उनके संपर्क में रहे हैं
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  • मॉरीशस और सिंगापुर की कंपनियां भी वीजी सिद्धार्थ के कारोबार में बतौर प्राइवेट इक्विटी शेयर होल्डर शामिल रही हैं
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  • पुलिस अब आयकर विभाग के पूर्व डीजी से पूछताछ करेगी


कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद और मशहूर कैफे चेन सीसीडी (कैफे कॉफी डे) के मालिक वीजी सिद्धार्थ के गायब होने से पहले उनके मोबाइल फोन पर आयकर विभाग की दर्जनों कॉल आई थीं। इसके अलावा कर्नाटक के ही दो उद्योगपति भी फोन पर लगातार उनके संपर्क में रहे थे। बुधवार को उनका शव मंगलुरू के हौजी बाजार के पास नेत्रावती नदी के किनारे से बरामद हुआ है।

पुलिस को यह भी मालूम चला है कि पिछले सप्ताह वीजी सिद्धार्थ की कुछ लोगों के साथ बैठक हुई थी। यह बैठक घर या दफ्तर में नहीं, बल्कि किसी अन्य जगह रखी गई। मंगलूरू पुलिस को वीजी सिद्धार्थ के फोन की जांच में अभी तक यही जानकारी मिली है। पुलिस ने मंगलवार को सिद्धार्थ के बंगलूरू स्थित दफ्तर में पूछताछ शुरू कर दी है।

सोमवार रात से लापता थे सिद्धार्थ

बता दें कि सोमवार रात से वीजी सिद्धार्थ लापता थे। वे 29 जुलाई को बंगलूरू से मंगलूरू जाने के दौरान रास्ते में करीब आठ बजे नेत्रावती नदी के पुल पर गाड़ी से उतर गए थे। शिकायतकर्ता ड्राइवर बसवराज पाटिल के मुताबिक, सिद्धार्थ यह कहकर गए थे कि वह थोड़ी देर सैर करना चाहते हैं। उन्होंने ड्राइवर से कहा कि वह नदी के दूसरे छोर पर इंतजार करे। इसके बाद ड्राइवर गाड़ी में बैठ गया, लेकिन एक घंटे बाद भी वह नहीं लौटे। 

मंगलूरू पुलिस कमिश्नर संदीप पाटिल के अनुसार, वीजी सिद्धार्थ के फोन की कॉल डिटेल्स निकाली जा रही है। प्रारंभिक जांच में केवल इतना पता चला है कि सिद्धार्थ के मोबाइल पर कई दिनों से फोन आ रहे थे। इनमें कई कॉल अननोन (अज्ञात) नंबर से हैं। दिल्ली के आयकर विभाग में कार्यरत एक अधिकारी की मानें तो वीजी सिद्धार्थ की कंपनी को लगातार नोटिस भेजे जाते रहे हैं। कई बार टेलीफोन पर भी उनके दफ्तरों में नोटिस की जानकारी दी गई। सिद्धार्थ कई बार खुद भी आईटी विभाग के मुख्यालय आए थे। 

पत्र में लिखे कई उद्योगपतियों के नाम

विभाग के पूर्व डीजी के बारे में अधिकारी ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उनका केवल इतना कहना था कि पूर्व डीजी, वीजी सिद्धार्थ के केस को खुद देख रहे थे। इस केस से जुड़ी हर अपडेट डीजी साहब को दी जाती थी। दूसरी ओर, पुलिस अब उन लोगों से पूछताछ करेगी, जिनके बारे में वीजी सिद्धार्थ ने अपने पत्र में लिखा है। इनमें कई उद्योगपतियों के नाम भी शामिल हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि इन लोगों का कैफे कॉफी डे में कितना शेयर था और उसकी शर्तें क्या रही हैं। 



पुलिस की जांच में सामने आया है कि मॉरीशस और सिंगापुर की कंपनियां भी वीजी सिद्धार्थ के कारोबार में बतौर प्राइवेट इक्विटी शेयर होल्डर शामिल रही हैं। इनमें एनएलएस मॉरीशश, केकेआर मॉरीशस और मरिना वेस्ट सिंगापुर आदि कंपनियां हैं। इन सभी विदेशी कंपनियों के शेयर 15 फीसदी के दायरे में हैं। पुलिस को पता चला है कि इन कंपनियों की तरफ से अपने शेयरों बाबत कोई ई-मेल सिद्धार्थ के पास नहीं आया है।

सिद्धार्थ की आखिरी बैठक किसके साथ हुई थी, पुलिस जांच में जुटी

बंगलूरू पुलिस की एक टीम ने मंगलवार को वीजी सिद्धार्थ के दफ्तर में पहुंचकर कई लोगों से बातचीत की है। हालांकि अभी इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि पिछले सप्ताह के दौरान वीजी सिद्धार्थ के फोन पर हुई बातचीत और उनकी व्यक्तिगत मुलाकात, यह सब जानकारी एकत्रित की जा रही है। खासतौर पर वह बैठक, जिसमें वीजी सिद्धार्थ के साथ कोई अन्य व्यक्ति उनकी गाड़ी चलाकर ले गया था। वह ड्राइवर बता सकता है कि सिद्धार्थ किससे मिलने गए थे। 

पुलिस ने सिद्धार्थ की लिखी चिट्ठी को लेकर उनके दफ्तर के कई लोगों से पूछताछ की है। सिद्धार्थ ने इसमें लिखा है, 'मैंने बहुत संघर्ष किया, लेकिन एक इक्विटी पार्टनर के दबाव को और बर्दाश्त नहीं कर सकता। वह मुझ पर लगातार उन शेयरों को बाईबैक करने (वापस खरीदने) का दबाव डाल रहा है, जिसका ट्रांजैक्शन आंशिक तौर पर छह महीने पहले ही किसी दोस्त के साथ पूंजी जमा करने के लिए किया था।' सिद्धार्थ ने अपने पत्र में निवेशकों और कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से माफी मांगते हुए सरेंडर करने की बात लिखी है। उनकी कंपनी पर छह हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था।

आयकर विभाग के पूर्व डीजी सहित कई अफसरों से होगी पूछताछ

इस केस में अब कई पेच फंसते जा रहे हैं। एक तरफ आईटी रेड तो दूसरी ओर निवेशकों का दबाव, सिद्धार्थ ने अपने पत्र में इनका जिक्र किया है। पुलिस अब आयकर विभाग के पूर्व डीजी से पूछताछ करेगी। इसके अलावा विभाग के जेडी और जोनल निदेशक को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सिद्धार्थ ने अपने खत में आयकर विभाग के एक पूर्व डीजी पर प्रताड़ना का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक पूर्व डीजी ने माइंडट्री के साथ डील ब्लॉक करने के लिए उनके शेयर्स को दो बार अटैच किया, जबकि संशोधित रिटर्न्स उनकी ओर से फाइल किए जा चुके थे। 

सिद्धार्थ ने आईटी विभाग की इस कार्रवाई को अनुचित बताया है।अपने पत्र में लिखा है कि इसके चलते उनके पास पैसे की कमी हो गई थी। नतीजा, सिद्धार्थ को लार्सन ऐंड ट्यूब्रो (एलएंडटी) को 3,300 करोड़ रुपये में अपने शेयर बेचने पड़े। पुलिस उन दो उद्योगपतियों की कॉल डिटेल निकाल रही है। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने कई बार सिद्धार्थ के साथ बातचीत की है। जांच के बाद सामने आएगा कि क्या ये वही लोग हैं, जिनके अत्यधिक दबाव का जिक्र सिद्धार्थ ने अपने पत्र में किया है। 
 

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