मंत्रियों के कामकाज को लेकर सरकार सख्त, तरक्की के लिए देनी होगी अच्छी परफॉरमेंस
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रविवार को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्रियों के नपने और उनके तरक्की का मुख्य आधार कामकाज का प्रदर्शन रहेगा। यही वजह है कि विस्तार की साईज बेहद बड़ी रहने वाली है।
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सरकार के तीन साल बीत जाने के बाद पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों के काम का पूरा अवलोकन किया है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों के काम का पैमाना नापने के लिए पीएम मोदी ने उनके टेबल पर लंबित रहने वाली फाइलों और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की रफ्तार को आधार बनाया है।
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जो मंत्री इन दोनों पैमानों पर खरा नहीं उतरेंगे उन्हें पीएम मोदी दंण्डित कर सकते हैं। इसके अलावा ओबीसी आयोग के राज्यसभा में पारित होने वाले दिन सदन से बिना कारण नदारद रहने वाले मंत्रियों को भी पीएम मोदी दंण्डित कर सकते हैं।
टेबल पर फाइलें लटकाना कई मंत्रियों को पड़ सकता है भारी
टेबल पर फाइलें लटकाने का शौक कई मंत्रियों को भारी पड सकता हैं। बताया जा रहा है कि पीएमओ ने चंद माह पहले सभी मंत्रियों के कार्यालय से फाइलों के निपटान की स्थिति का एक गहन आंकलन करवाया है।
इसके लिए मंत्रियों को अंक भी आवंटित किए गए हैंं। फाईल निपटान के मामले में कम अंक लाने वाले मंत्रियों को सरकार से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
मोदी का दिल पसीजा तो धमेंद्र और पीयूष की होगी तरक्की
बताया जा रहा है कि उर्जा मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कामकाज का प्रदर्शन दुरूष्त रहने के बावजूद भी उनके पद्दोनत्ती की राह में एक बडा संकट है। ये दोनों ही मंत्री संसद के बीते सत्र में पीएम मोदी के पसंदीदा ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के समय राज्यसभा में हुई वोटिंग से नदारद थे।
इनके अलावा निर्मला सितारमन, रवि शंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी, एमजे अकबर और विजय गोयल सरीखे मंत्री भी वोटिंग के दौरान संसद में नहीं थे। तब निर्मला सरकारी आयोजन के लिए चीन के दौरे पर थीं।
स्मृति भी गुजरात के निकाय चुनावों में प्रचार के लिए गई थीं। जबकि विजय गोयल अस्पताल में शामिल थे। लेकिन कुछ मंत्री दिल्ली में रहते हुए सदन से नदारद थे उसे लेकर पीएम मोदी की नाराजगी अभी बनी हुई है।
सूत्र बताते हैं कि सत्र के दौरान सदन में बेपरवाह रहने वाले मंत्रियों को भी पीएम मोदी दंडित कर सकते हैं। पीएम मोदी के इसी गुस्से का शिकार पीयूष और धर्मेंद्र हो सकते हैं। यदि इन दोनों मंत्रियों के काम को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी का दिल पसीजा तो इनकी तरक्की तय है।
पसंदीदा उज्जवला योजना को जमीन पर उतारने के मामले को लेकर धमेंद्र प्रधान के कामकाज से पीएम खुश हैं। तो पीयूष का प्रदर्शन भी उर्जा मंत्रालय में बढिया रहा है।
पसंदीदा योजनाओं का प्रदर्शन भी है मंत्रिमंडल विस्तार का पैमाना
मंत्रिमंडल विस्तार में पीएम मोदी के पसंदीदा योजनाओं के प्रदर्शन से भी मंत्रियों का भाग्य जुडा है। नमामि गंगे अभियान के जमीन पर न उतर पाने का खामियाजा उमा भारती को भूगतना पडा है।
तो रूढी की छूट्टी के पीछे कौशल विकास योजना की असफलता को कारण माना जा रहा है। स्मार्ट सिटी, किसानों की आय दोगुनी, बेटी बचाओ बेटी पढाओ और सांसद आदर्श ग्राम सरीखे पीएम मोदी की अहम पसंदीदा योजनाएं भी जमीन पर धडाम रही है। इसे ध्यान में रखते हुए इन विभागों के मंत्रियों के कामकाज में बदलाव होगां।