BSP: एक भी सांसद को टिकट नहीं देंगी मायावती! पिछले हफ्ते यह बनी है बसपा की सियासी रणनीति
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बहुजन समाज पार्टी के सांसद और बसपा की सुप्रीमो मायावती में अंदरूनी तौर पर जबरदस्त खींचतान मची हुई है। बहुजन समाज पार्टी के सांसद जहां लगातार भाजपा या अन्य सियासी दलों के संपर्क में है। वहीं मायावती भी अपने सांसदों को टिकट न देने का मन बना चुकी हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जल्द ही मायावती अपने पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर घोषणा करने वाली हैं। कहा यही जा रहा है कि मायावती अपने किसी भी सांसद को फिर से टिकट नहीं देने वाली हैं। पिछले सप्ताह हुई बसपा की महत्वपूर्ण बैठक में कई बिंदुओं पर मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश और निर्देश दे दिए हैं। उसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है।
बहुजन समाज पार्टी के 2019 में दस सांसद निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे थे। इन 10 सांसदों में बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने अमरोहा से बसपा सांसद दानिश अली को पार्टी से निष्कासित कर दिया। जबकि बसपा के सांसद अफजाल अंसारी को समाजवादी पार्टी ने टिकट दे दिया, उनकी लोकसभा से सदस्यता रद्द हो चुकी है। अंबेडकर नगर से बसपा के सांसद रहे रितेश पांडे ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बताया जा रहा है कि बिजनौर के सांसद मलूक नागर भी पाला बदलने की पूरी तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक नागर भाजपा गठबंधन के साथ जाने वाली राष्ट्रीय लोकदल के हिस्से आ रही बिजनौर सीट से प्रत्याशी हो सकते हैं। इसीलिए बीते कुछ समय से मलूक नागर की करीबी लोकदल में देखी जा रही है।
बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उनकी पार्टी के नेता जिस तरह से दूसरे दलों से संपर्क में हैं, मायावती उससे पहले ही इनके टिकट काटने का बंदोबस्त कर चुकी हैं। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि जिस तरह सहारनपुर के सांसद हाजी फजलुर रहमान समाजवादी पार्टी से अपने नजदीकियां बढ़ा रहे थे, बहनजी ने उसे भांपते हुए अपनी सीट को मजबूत करने का पूरा प्रबंध कर लिया। बहुजन समाज पार्टी ने सहारनपुर में माजिद अली को सहारनपुर सीट का इंचार्ज बना दिया। अब बसपा में इंचार्ज को ही टिकट देने का चलन माना जा रहा है। इसी तरह मायावती ने अपनी अन्य सीटों पर भी सियासी गोटियां सेट करते हुए वर्तमान सांसदों को किनारे करना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय में हुई बहुजन समाज पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों में कई सांसदों को बुलाया तक नहीं गया। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि यह वे नेता हैं, जो लगातार दूसरे दलों के संपर्क में रहे थे। पार्टी को इसकी भनक काफी पहले ही लग चुकी थी। यही वजह है कि बहुजन समाज पार्टी ने अपनी कोर कमेटी की बैठक में अपनी सभी दसों लोकसभा सीटों पर पर्यवेक्षकों के माध्यम से पूरा जमीनी फीडबैक भी ले लिया है। बहुजन समाज पार्टी के एक नेता बताते हैं कि इस बार एक या दो सीटों को छोड़कर कोई भी सीट पर दोबारा टिकट नहीं मिलने वाला है। सूत्रों का कहना है की नगीना से बहुजन समाज पार्टी के सांसद गिरीश चंद्र पर जरूर मायावती दोबारा दांव लगा सकती हैं। गिरीश चंद्र जी ऐसे नेता है जो बीती कुछ बैठकों में शामिल भी हुए। उनकी सीट क्या होगी यह अभी तय नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने पिछले सप्ताह उत्तराखंड के नेताओं के साथ बैठक में जल्द ही प्रत्याशियों की घोषणा करने का इशारा भी किया था। इसमें सबसे पहले मायावती उत्तर प्रदेश के साथ दक्षिण के कुछ राज्यों में प्रत्याशियों को उतारने की कवायद करेंगी। इसके अलावा पंजाब में भी मायावती जल्दी प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती हैं। बहुजन समाज पार्टी का शिरोमणि अकाली दल के साथ हुआ गठबंधन टूट गया है। बहुजन समाज पार्टी का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश में मजबूत प्रत्याशियों को उतार कर ज्यादा से ज्यादा सीटों के जीतने का है। इसके अलावा पार्टी ने पिछले सप्ताह हुई बैठक में पूरे देश में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में ज्यादा वोट प्रतिशत हासिल करने का लक्ष्य भी कार्यकर्ताओं और नेताओं को दिया है।