RepublicDay: 56 पदकों से सम्मानित हुए BSF जांबाज, 5 वीरता पदक तो 5 विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक
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19 अगस्त 2022 को मुख्य आरक्षक गिरजेश कुमार उद्दे, त्रिपुरा के अति संवेदनशील इलाके में स्थित सीमा चौकी 'सीमना II' के इलाके के निगरानी के लिए निकली गश्त पार्टी के स्काउट का कार्य कर रहे थे। जब उनकी पार्टी सीमा चौकी सीमना II से अगले स्टैंडिंग पेट्रोल बेस की तरफ बढ़ रही थी, तभी उनकी पार्टी उग्रवादियों की भयंकर गोली-बारी की चपेट में आ गई। कई गोलियां गिरजेश को लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद, उन्होंने सामरिक कौशल अपनाया और उग्रवादियों को लक्ष्य कर जवाबी कार्रवाई जारी रखी। उनकी इस जवाबी कार्रवाई से उग्रवादियों को विशेष क्षति पहुंची। इससे उन्होंने गिरजेश को एक बार फिर लक्षित किया और उनपर भयंकर फायर खोला। इस हमले से गिरजेश की न सिर्फ राइफल क्षतिग्रस्त हुई, बल्कि उनकी दाहिनी बांह और जांघ में घुसी गोलियों ने उनको मरणासन्न कर दिया। अंततोगत्वा बहादुरी से लड़ते हुए यह बहादुर सीमा प्रहरी वीरगति को प्राप्त हुआ। मुख्य आरक्षक गिरजेश की इस स्तुत्य वीरता और उच्च कोटि के रणकौशल ने न सिर्फ उग्रवादियों के इरादों पर पानी फेरा, बल्कि अपने साथियों की जीवन-रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बलिदानी सीमा प्रहरी की वीरता और साहस से अभिभूत राष्ट्र ने इस बहादुर सीमा प्रहरी को मरणोपरांत 'वीरता के लिए पदक' से सम्मानित किया है।
- निरीक्षक (जीडी) जीतू देवरी, 61 बटालियन,
- आरक्षक (जीडी) रतन कुमार योगी, 75 बटालियन
- आरक्षक (जीडी) अवधेश कुमार यादव, 123 बटालियन, संयुक्त राष्ट्र मिशन, कांगो (आईएनडीएफपीयू-2)
8 किमी लंबी यात्रा के दौरान कई सड़क अवरोधों को पार करते हुए और छोटे हथियारों की भारी गोलीबारी के साथ-साथ टीम पर मोलोटोव कॉकटेल का सामना करते हुए, इंस्पेक्टर जीतू देवरी की पार्टी ने संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को सफलतापूर्वक निकाला। 75 बटालियन बीएसएफ के कांस्टेबल रतन कुमार योगी और 123 बटालियन बीएसएफ के कांस्टेबल अवधेश कुमार यादव निकासी टीम में अग्रणी थे। इन दोनों ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों की जान बचाने और बुटेम्बो हवाई अड्डे तक उनको पहुंचाने में, अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना अनुकरणीय साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पित प्रदर्शन किया। विद्रोहियों की गोलीबारी का मुकाबला करने, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों की जान बचाने और उनकी निकासी को सुविधाजनक बनाने में बल कार्मिकों की कार्रवाई, दृढ़ संकल्प, साहस और बहादुरी के लिए, इन तीनों कर्मियों को वीरता पदक (जीएम) से सम्मानित किया गया है।
कांस्टेबल (जीडी) भागीरथ सिंह राठौड़-120 बटालियन ...
कांस्टेबल भागीरथ सिंह राठौड़ जम्मू क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीमा चौकी विक्रम पर तैनात थे। 26 अक्टूबर 2023 को उनकी तैनाती फॉरवर्ड डिफ़ेन्डेड पोस्ट पर रात्रि ड्यूटी के लिए थी। जब वह अपने ड्यूटी प्वाइंट पर जा रहे थे, तब सीमा पार से 82 मिलीमीटर मोर्टार और आटोमेटिक हथियारों से अकारण गोलीबारी शुरू हो गई। कांस्टेबल भागीरथ ने तुरंत कवर लिया और जवाबी कार्रवाई की। डेढ़ घंटे बाद बीओपी विक्रम की क्यू आर टी ने उन्हें निकाला। कांस्टेबल भागीरथ को बीओपी विक्रम में लौटने का निर्देश दिया गया, लेकिन उन्होंने बीओपी विक्रम के बजाय फॉरवर्ड डिफ़ेन्डेड पोस्ट में अपने ड्यूटी स्थान पर ही रहने का अनुरोध किया। ड्यूटी प्वाइंट पर पहुंचने के बाद उन्होंने एलएमजी से पाक की ओर जवाबी गोलीबारी शुरू कर दी। दुर्भाग्य से, उक्त एलएमजी ने कुछ तकनीकी खराबी के कारण फायरिंग बंद कर दी। पाक पोस्ट इकबाल शहीद पर हावी होने के लिए कांस्टेबल भागीरथ खुले में आ गए और अपनी जान की परवाह किए बिना भारी गोलाबारी के बीच अपने 51 मिमी मोर्टार से गोले दागे। कांस्टेबल भागीरथ सिंह राठौड़ की वीरतापूर्ण कार्रवाई और सटीक फायरिंग के कारण दुश्मन को गोलीबारी रोकने पर मजबूर होना पड़ा। पाकिस्तान की ओर से भारी गोलीबारी के बीच सूझबूझ, बहादुरी, कुशलता और अदम्य साहस दर्शाने वाले 120 बटालियन बीएसएफ के कांस्टेबल भागीरथ सिंह राठौड़ को 'वीरता पदक' (जीएम) से सम्मानित किया गया।