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बिल्डरों को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत: रक्षा ठिकानों के पास अब नहीं अटकेगा काम, NOC की देरी पर लगाम

Wed, 06 May 2026 06:23 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 06 May 2026 06:23 PM IST
सार

रक्षा सुरक्षा के नाम पर वर्षों से चल रहे वैध निर्माण को आखिरी वक्त पर रोकना बिल्डरों और निवासियों के अधिकारों का हनन है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा चिंताओं पर प्रशासन को शुरुआत में ही जागना होगा, निर्माण पूरा होने के बाद नहीं। उच्च अदालत ने क्या-क्या कहा? जानिए...
 

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Bombay High Court On Construction Near Defence Establishments NOC MHADA
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिल्डरों को बड़ी राहत दी है। उच्च अदालत ने कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों के पास हो रहे निर्माण कार्यों के लिए अधिकारी बहुत देरी से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी की मांग नहीं कर सकते। अदालत ने मुंबई के वर्ली इलाके में आईएनएस त्राता के पास स्थित दो आवासीय इमारतों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट यानी कब्जे से जुड़े प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है।
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अधिकारियों का रवैया मनमाना और अनुचित
जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की पीठ ने कहा कि रक्षा अधिकारियों को एनओसी के लिए एक निष्पक्ष और तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। कोर्ट के अनुसार, कानून की आवश्यकताओं का पालन सख्ती से होना चाहिए। अदालत ने कहा कि यदि रक्षा प्रतिष्ठानों को सुरक्षा का कोई वास्तविक खतरा है, तो इसकी कार्रवाई निर्माण के शुरुआती चरण में ही होनी चाहिए।
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संपत्ति का अधिकार
हाईकोर्ट ने कहा कि जब निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शों के अनुसार काफी आगे बढ़ चुका हो, तब ऐसे मामलों में लापरवाही भरा रवैया नहीं अपनाया जा सकता। अदालत ने अनुच्छेद 300ए का हवाला देते हुए कहा कि संविधान संपत्ति के अधिकार की गारंटी देता है। इस अधिकार को कानूनी प्रक्रिया के बिना प्रभावित नहीं किया जा सकता है।
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क्या है पूरा मामला?
यह याचिका टेक्नो फ्रेशवर्ल्ड एलएलपी की ओर से दायर की गई थी। यह कंपनी प्रभादेवी इंद्रप्रस्थ को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की डेवलपर है। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी(म्हाडा) ने अक्टूबर 2025 में इन इमारतों को स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया था। इसका कारण नौसेना अधिकारियों से एनओसी न होना बताया गया था। म्हाडा ने इसी आधार पर इमारतों को ओसी देने से भी मना कर दिया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी
पीठ ने म्हाडा के नोटिस को मनमाना और अवैध करार दिया। उच्च अदालत ने पाया कि ये इमारतें निर्धारित मानदंडों से बाहर स्थित हैं, इसलिए यहां एनओसी की जरूरत ही नहीं थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि आईएनएस त्राता के पास ऐसी कई इमारतें पहले से मौजूद हैं जिन्होंने एनओसी नहीं ली है। कोर्ट ने कहा कि नौसेना अधिकारी चुनिंदा तरीके से एनओसी की शर्त नहीं थोप सकते।

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