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Bombay High Court: 'पति-पत्नी के झगड़े से नहीं बनता आत्महत्या का मामला', हाईकोर्ट की टिप्पणी; महिला को दी राहत

Sat, 04 Apr 2026 02:04 PM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shivam Garg Updated Sat, 04 Apr 2026 02:04 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच विवाद सामान्य है और केवल इसी आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। जानिए पूरा मामला...

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Bombay High Court: Marital Discord Alone Not Grounds for Abetment of Suicide
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ वैवाहिक विवाद के आधार पर किसी जीवनसाथी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने कहा कि घरेलू जीवन में मतभेद और तनाव सामान्य बात है और इसे सीधे तौर पर आत्महत्या से जोड़ना उचित नहीं है। नागपुर बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए एक 49 वर्षीय महिला के खिलाफ दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले को खारिज कर दिया। यह मामला 2019 में अमरावती पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने सीधे तौर पर पीड़ित को ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया या उसे उकसाया। केवल पति-पत्नी के बीच झगड़े या आरोप-प्रत्यारोप को इसका आधार नहीं बनाया जा सकता।
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न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के की एकल पीठ ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। ऐसे में इसे अधिकतम मानसिक तनाव का कारण माना जा सकता है, लेकिन इसे आत्महत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘मेंस रिया’ यानी अपराध करने की मंशा का होना जरूरी है। बिना इरादे या जानकारी के किसी को उकसावे का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। गुस्से में कही गई बातें भी इस अपराध की श्रेणी में नहीं आतीं। मामले में यह भी सामने आया कि मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था, जिससे यह साफ होता है कि महिला की भूमिका सीधे तौर पर साबित नहीं होती।


दरअसल, दोनों की शादी 1996 में हुई थी और समय के साथ उनके बीच विवाद बढ़ते गए। पति के परिवार ने महिला पर प्रताड़ना और अन्य आरोप लगाए, जबकि महिला ने भी अपने साथ हिंसा और दुर्व्यवहार का दावा किया। अदालत ने इन सभी तथ्यों को देखते हुए कहा कि यह मामला वैवाहिक विवाद का है और इसे आपराधिक उकसावे के रूप में नहीं देखा जा सकता।

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