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Bombay HC: बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने श्रद्धा हत्या मामले के लिए 'इंटरनेट सामग्री' को दोषी ठहराया

Sun, 20 Nov 2022 07:00 AM IST
देव कश्यप एएनआई, मुंबई।
एएनआई, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 20 Nov 2022 07:00 AM IST
सार

पुणे में शनिवार को दूरसंचार विवाद वक्तव्य अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) द्वारा आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति दत्ता ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि श्रद्धा वॉकर की हत्या जैसे अपराध इसलिए किए जा रहे हैं क्योंकि इंटरनेट पर ऐसी सामग्री भारी मात्रा में मौजूद हैं।

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Bombay High Court Chief Justice blames Shraddha murder case on access to material on internet
बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता। - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने शनिवार को देश भर में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर चिंता जताई। न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने श्रद्धा वालकर हत्याकांड पर खुलकर बात की। मुंबई की महिला श्रद्धा वालकर की उसके लिव-इन पार्टनर द्वारा हत्या का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि यह मामला आज के युग में लोगों की आसानी से इंटरनेट तक पहुंच और उस पर पड़े सामग्री के दूसरे पहलू का एक उदाहरण है। गौरतलब है कि श्रद्धा की हत्या के बाद उसके लिव-इन पार्टनर ने उसके शरीर को 35 टुकड़ों में काट दिया था और उसे दिल्ली के छतरपुर के जंगलों में फेंक दिया था।

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पुणे में शनिवार को दूरसंचार विवाद वक्तव्य अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) द्वारा 'दूरसंचार, प्रसारण, आईटी और साइबर क्षेत्रों में विवाद के समाधान तंत्र' विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति दत्ता ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि "आपने अभी-अभी अखबारों में मुंबई में प्यार और दिल्ली में आतंक (श्रद्धा वॉकर कांड) के बारे में कुछ कहानियां पढ़ी हैं, इस तरह के अपराध इसलिए किए जा रहे हैं क्योंकि इंटरनेट पर ऐसी सामग्री भारी मात्रा में मौजूद हैं। अब मुझे यकीन है कि भारत सरकार सही दिशा में सोच रही है। भारतीय दूरसंचार विधेयक है, लेकिन अगर वास्तव में हमें अपनी सभी बिरादरी के नागरिकों के लिए न्याय पाने के अपने वादे को पूरा करने के लक्ष्य को हासिल करना है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखा जा सके, तो हमें ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कुछ और मजबूत कानून बनाने की आवश्यकता है।"
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उन्होंने कहा कि "नए युग में नए उपकरणों का आविष्कार किया जा रहा है। 1989 में हमारे पास कोई मोबाइल फोन नहीं था। दो या तीन साल बाद हमारे पास पेजर आ गए। तब हमारे पास मोटोरोला के बड़े मोबाइल हैंडसेट थे और अब वे छोटे फोन में संघनित हो गए हैं, जो हर उस चीज से लैस हैं जिसकी कोई कल्पना कर सकता है। हालांकि, उन्हें कोई हैक भी कर सकता है, जिससे यह हमारी निजता पर हमला हो सकता है।"
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न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा हमें यह पता लगाना चाहिए कि क्या दिल्ली में एक प्रमुख पीठ (टीडीसैट) होने के बजाय छह अन्य स्थानों पर बैठने की अनुमति है, हमारे पास राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम के अनुरूप क्षेत्रीय बेंच होनी चाहिए, लेकिन पूरे भारत में एनजीटी की पांच बेंच हैं। उन्होंने कहा ये हमारे संस्थापकों द्वारा निर्धारित उच्च लक्ष्य हैं। उन्होंने हमारे संविधान को बहुत सावधानी से तैयार किया था, जिसे हम विफल न करें।

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