कोरोना: बिना टीकाकरण वाले लोगों के लिए लोकल ट्रेन यात्रा पर प्रतिबंध कितना उचित, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार से किया सवाल
उच्च न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार बताए कि तब क्या शर्तें थीं, जब कोरोना को लेकर लोकल ट्रेनों में बिना टीकाकरण वाले लोगों के लिए लोकल ट्रेन यात्रा पर प्रतिबंध पहली बार लगाया गया था और क्या यह आज उचित है?
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि अब जब कोरोना की स्थिति में सुधार हो रहा है ऐसे में बिना टीकाकरण वाले लोगों के लिए लोकल ट्रेन यात्रा पर प्रतिबंध कितना उचित है। साथ ही कोर्ट ने राज्य में कोरोना की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी देने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की पीठ ने कहा कि वर्तमान में कोरोनावायरस संक्रमण की दर में कमी आई है। अब राज्य में उतनी कोरोना संक्रमण दर नहीं है, जितनी 2020 और 2021 में थी। इस दौरान पीठ ने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार अब भी मानती है कि मुंबई में लोकल ट्रेन यात्रा और सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों पर समान प्रतिबंध वर्तमान में जरूरी है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार बताए कि तब क्या शर्तें थीं, जब कोरोना को लेकर लोकल ट्रेनों में बिना टीकाकरण वाले लोगों के लिए लोकल ट्रेन यात्रा पर प्रतिबंध पहली बार लगाया गया था और क्या यह आज उचित है?
दरअसल, अधिवक्ता नीलेश ओझा के माध्यम से एक फिरोज मिथिबोरवाला ने एक जनहित याचिका दायर कर 1 मार्च, 2022 को राज्य सरकार के एक सर्कुलर को चुनौती दी थी। सरकार के इस परिपत्र में कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा उपायों को बताया गया है। साथ ही कहा गया था कि इसे नागरिकों को COVID-19 महामारी के मद्देनजर पालन करना चाहिए। इस सर्कुलर में लोकल ट्रेनों सहित सार्वजनिक परिवहन पर लगे प्रतिबंध को इस सर्कुलर में शामिल किया गया था।
मिथिबोरवाला की याचिका में कहा गया है कि इस तरह का प्रतिबंध मनमाना, असंवैधानिक और महाराष्ट्र सरकार द्वारा टीकाकरण को अनिवार्य बनाने का 'अप्रत्यक्ष प्रयास' है।
हाईकोर्ट ने इसी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सोमवार को जनहित याचिका का जवाब देते हुए महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि प्रतिबंध विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लगाए गए हैं। राज्य सरकार ने टीकाकरण को लेकर कोर्ट को बताया कि राज्य में 8.76 करोड़ लोगों ने कोरोना-वैक्सीन की पहली डोज ले ली है और 6.87 करोड़ लोगों को कोरोना की दोनों डोज लग चुकी हैं, इसके अलावा महाराष्ट्र में 16.45 लाख बूस्टर डोज लग चुकी हैं।