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संकट: राजधानी में ब्लैक फंगस का प्रकोप, 620 मरीजों का चल रहा इलाज, दवा की भारी कमी से जूझ रही दिल्ली
Thu, 27 May 2021 09:54 AM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Thu, 27 May 2021 09:54 AM IST
सार
दिल्ली में ब्लैक फंगस के मामलें तेजी से बढ़ रहे हैं। अब रोजाना 70 मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली को इस फंगल इंफेक्शन के इलाज में कारगर दवा एंफोटेरिसिन-बी की मात्र 3850 शीशियां मिली हैं, जबकि जरूरत 30,000 से अधिक की है।
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एंफोटेरिसिन-बी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
देशभर में कोरोना वायरस के साथ ही ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के भी नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। देश की राजधानी में भी यही स्थिति बनी हुई है। मालूम हो कि दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस से पीड़ित 620 मरीजों का इलाज चल रहा है। यहां बड़ी संख्या में लोग इस फंगल इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। बड़ी समस्या यह है कि दिल्ली में इस बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एकमात्र दवा एंफोटेरिसिन-बी की भी भारी कमी है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि शहर को मंगलवार (25 मई) तक एंफोटेरिसिन-बी की 3,850 शीशियां मिली हैं, जबकि एक सप्ताह में 30,000 से अधिक खुराक की आवश्यकता होती है।
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एक दिन में ब्लैक फंगस के दवा की 4 हजार शीशियों की जरूरत
वहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार (26 मई) को कहा, ‘दिल्ली को मंगलवार तक ब्लैक फंगस के दवा की लगभग 400 शीशियां मिलीं हैं और एक दिन पहले 400 अन्य शीशियां मिली थीं। शहर को एक दिन में ब्लैक फंगस के दवा की करीब 4 हजार शीशियों की जरूरत होती है। दवा की कमी के कारण मरीजों के इलाज में देरी हो रही है।’ इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, ‘दिल्ली में 23 मई को ब्लैक फंगस संक्रमण के 200 मामले सामने आए और अब रोजाना इसके करीब 70 मामले सामने आ रहे हैं। इस संख्या की तुलना में दिल्ली को एंफोटेरिसिन-बी की बहुत कम खुराक आवंटित की गई है। म्यूकरमाइकोसिस के कुल मरीजों में से लगभग दो-तिहाई दिल्ली से हैं और बाकी राज्य के बाहर के हैं।’
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एम्स में 100 से अधिक मरीजों का इलाज जारी
गौरतलब है कि राजधानी में अप्रैल के मध्य और मई की शुरुआत के बीच कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के बाद कुछ कोरोना मरीजों में एक जटिलता के रूप में ब्लैक फंगस के उदाहरण सामने आए। वर्तमान में एम्स में ब्लैक फंगस से पीड़ित 100 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, महामारी से पहले एक साल में यहां केवल 12 से 15 मामले ही आते थे। अधिकारियों ने कहा कि ब्लैक फंगस के इलाज के लिए एक मरीज को हर हफ्ते एंफोटेरिसिन-बी की कम से कम 50 शीशियों की जरूरत होती है। दिल्ली के ड्रग कंट्रोल विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘कुछ को 100 शीशियों की भी जरूरत होती है। यह संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करता है। इस बीमारी के दवा की कमी के कारण, हम एक मरीज के लिए एक बार में सभी 50 शीशियां जारी करने में असमर्थ हैं, इसलिए हम एक बार में 10 से 20 शीशियां देते हैं।’
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दिल्ली में चरम पर पहुंच सकते हैं ब्लैक फंगस के मामले
दिल्ली सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर दो महीने की अवधि में दवा की एक लाख खुराक की मांग करते हुए तर्क दिया है कि दिल्ली में फंगल संक्रमण के लगभग एक हजार मामले अपने चरम पर होने की संभावना है। राज्य ने एक विशेषज्ञ पैनल भी स्थापित किया है जो दवा के लिए अस्पतालों के अनुरोधों को मंजूरी देता है। बत्रा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एससीएल गुप्ता ने कहा, ‘पहले मरीजों को दवा की तलाश में शहर का चक्कर लगाना पड़ता था और अब सरकार सुनिश्चित करती है कि हम इसे प्राप्त करें। अगर किसी को तत्काल दवा की आवश्यकता होती है, तो हम इसे दूसरे मरीज के कोटे से देते हैं और बाद में इसकी भरपाई करते हैं।’
दवा के लिए भटक रहे लोग
हालांकि, कुछ मरीजों के परिजनों ने कहा कि वे अभी भी दवा लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। संक्रमण से पीड़ित एक 35 वर्षीय महिला के भाई ने कहा, ‘मेरी बहन को अब तक दवाओं की 10 खुराक दी गई हैं, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि उसे और 50 खुराक की जरूरत होगी। मैं शायद शहर के हर बड़े मेडिकल स्टोर में गया हूं, लेकिन मुझे यह दवा नहीं मिली।’