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BJP Vs AAP: केजरीवाल के मिशन गुजरात पर भारी पड़ सकता है भाजपा का स्टिंग, सिसोदिया गए जेल तो बदलेंगे समीकरण!

Tue, 06 Sep 2022 10:01 AM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 06 Sep 2022 10:01 AM IST
सार

BJP Vs AAP: आम आदमी पार्टी गुजरात विधानसभा चुनावों में मजबूती से काम कर रही है। पार्टी जानती है कि भाजपा की गहरी जड़ों वाले राज्य गुजरात में वह एक झटके में सत्ता में नहीं आ सकती। लेकिन उसका प्लान है कि वह कम से कम इतनी सीटें जीत सके कि वह गुजरात में कांग्रेस को हटाकर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आ जाए...

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BJP Vs AAP: bjp sting video on aap on delhi liquor scam before Gujarat Election 2022
arvind kejriwal and manish sisodia - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

गुजरात विधानसभा चुनाव में अब तीन से चार महीने का समय शेष रह गया है। भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ इस बार आम आदमी पार्टी भी यहां अपनी किस्मत आजमाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। गुजरात में पार्टी को मजबूत करने के लिए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ-साथ कार्यकर्ताओं की एक मशीनरी लगातार सक्रिय है। लेकिन जिस तरह भाजपा ने सोमवार को दिल्ली के एक शराब व्यवसायी का स्टिंग वीडियो जारी कर व्यवसायियों के द्वारा दिल्ली सरकार को ब्लैक मनी के रूप में भारी मात्रा में धन पहुंचाने का दावा किया है, मनीष सिसोदिया पर सीबीआई का शिकंजा कस गया है। यदि सत्येंद्र जैन की तरह मनीष सिसोदिया को भी जेल जाना पड़ा, तो इससे आम आदमी पार्टी के ‘मिशन गुजरात’ पर असर पड़ सकता है।

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भाजपा ने सोमवार को एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया है कि दिल्ली की नई शराब नीति में व्यवसायियों का कमीशन दो फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया। इसके बदले में शराब व्यवसायियों को छह फीसदी का कमीशन आम आदमी पार्टी के पास वापस पहुंचाना था। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को शराब घोटाले में शामिल एक आरोपी के पिता का बताया गया है। वे स्वयं भी एक शराब व्यवसायी हैं। वीडियो की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं और सीबीआई इस पर संज्ञान लेती है तो इससे मनीष सिसोदिया के जेल जाने की संभावना बढ़ जाएगी।

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ईमानदारी के दावे को लगेगी चोट

आम आदमी पार्टी अपने चुनाव प्रचार में दिल्ली की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को सबसे बेहतर बताती रही है। लेकिन संयोग की बात है कि उसके स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पहले ही जेल की सलाखों के पीछे हैं, और अब शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर भी जेल जाने की तलवार लटक रही है। यदि मनीष सिसोदिया भी जेल जाते हैं तो इससे आम आदमी पार्टी की ईमानदार राजनीति करने के दावे को गहरी चोट पहुंचेगी।

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मनीष सिसोदिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद अरविंद केजरीवाल ने उन्हें ले जाकर गुजरात में ही प्रेस कांफ्रेंस कर स्वयं को सही ठहराने की कोशिश की थी। लेकिन यदि सिसोदिया जेल जाते हैं तो जनता के बीच आम आदमी पार्टी की विश्वसनीयता को गहरी चोट लगेगी, जिससे उबर पाना पार्टी के लिए मुश्किल होगा। पार्टी के लिए एक स्टार कैंपेनर की कमी भी हो जाएगी, जिसको पार्टी इस स्थिति में झेल नहीं पाएगी।

क्या है आम आदमी पार्टी का प्लान?

दरअसल, आम आदमी पार्टी गुजरात विधानसभा चुनावों में मजबूती से काम कर रही है। पार्टी जानती है कि भाजपा की गहरी जड़ों वाले राज्य गुजरात में वह एक झटके में सत्ता में नहीं आ सकती। लेकिन उसका प्लान है कि वह कम से कम इतनी सीटें जीत सके कि वह गुजरात में कांग्रेस को हटाकर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आ जाए। इससे अरविंद केजरीवाल पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य से उन पर सीधा हमला कर सकेंगे, जिसका कहीं ज्यादा व्यापक असर होगा। इससे उनका राष्ट्रीय राजनीति में महत्त्व भी बढ़ जाएगा और वे विपक्षी दलों के खेमे में बड़े नेता के तौर पर उभर सकेंगे। यह रास्ता विपक्षी खेमे की ओर से पीएम पद की दावेदारी तक जा सकता है।   

कमजोर पड़ जाएगा दावा

राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता ने अमर उजाला से कहा कि जिस तरह आम आदमी पार्टी के एक-एक नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, उससे उसके ईमानदार की छवि वाले दावे को गहरी चोट पहुंच रही है। यदि मनीष सिसोदिया भी जेल जाते हैं तो अरविंद केजरीवाल गुजरात या हिमाचल में अपनी ईमानदार राजनीति या शिक्षा-स्वास्थ्य की बेहतरी का दावा मजबूती से नहीं कर पाएंगे। चूंकि, आम आदमी पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक को तोड़कर आगे बढ़ने का काम करती रही है, इसका सबसे पहला लाभ कांग्रेस को हो सकता है और उसके वोट बिखरने से बच जाएंगे।

वर्तमान चुनाव का समीकरण यह है कि यदि कांग्रेस के वोट बैंक में बिखराव होता है, तो इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा और उसकी गुजरात की जीत एक बार फिर आसान हो सकती है, लेकिन लंबे समय में भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि उसे कांग्रेस की बजाय आम आदमी पार्टी से मुकाबला करना पड़े। इसका कारण है कि भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल से ही अर्थव्यवस्था के लिए वही कदम उठाती रही है, जो लंबे समय तक देश की आर्थिक स्थिति के लिए बेहतर रहा हो। नरेंद्र मोदी के शासनकाल में यह कोशिश और ज्यादा मजबूत होती दिखाई पड़ती है।

लेकिन आम आदमी पार्टी पंजाब की खराब आर्थिक हालात के बाद भी मुफ्त की योजनाओं की जमकर घोषणा करती दिखी है। जबकि पंजाब चुनाव जीतने के बाद भगवंत मान सरकार अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए केंद्र से मदद मांगते हुए देखे जा चुके हैं। लेकिन यदि भाजपा को गुजरात में भी आम आदमी पार्टी का मुकाबला करना पड़ता है, तो उसे यहां भी उसी तरह मुफ्त के दावों की पोटली खोलनी पड़ेगी, जैसे वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करने को मजबूर हुई थी।

दूसरा बड़ा कारण है कि भाजपा के लिए कांग्रेस का मुकाबला करना ज्यादा आसान रहेगा। कांग्रेस नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप और गांधी परिवार पर परिवारवाद का आरोप भाजपा को उसकी तुलना में मजबूत स्थिति में ला देता है। यही कारण है कि भाजपा भी अपने मुकाबले कांग्रेस को देखना पसंद करेगी।

पंजाब चुनाव में इस्तेमाल हुआ पैसा

भाजपा नेता संबित पात्रा ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर दो स्टिंग वीडियो जारी किया। भाजपा का आरोप है कि शराब व्यवसायियों से प्राप्त यह पैसा पंजाब विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल किया गया था। जिस व्यक्ति का वीडियो जारी किया गया है, उसे दिल्ली के शराब घोटाले में चल रही जांच के एक आरोपी के पिता का बताया गया है।

सिसोदिया ने कहा, सीबीआई पर दबाव

वहीं, आम आदमी पार्टी ने भाजपा के इस वीडियो को फर्जी बताया है। दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस कर दावा किया कि सीबीआई को उनके घर और लॉकर की जांच के बाद भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सीबीआई के ऊपर उन्हें गिरफ्तार करने का भारी दबाव है। लेकिन सबूतों के बिना उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई को कानूनी राय देने वाले एक अधिकारी जितेंद्र कुमार ने दो दिन पहले आत्महत्या कर ली, क्योंकि उनके ऊपर उनकी गिरफ्तारी को सही ठहराने की राय देने का दबाव था।

सीबीआई ने कहा आरोप गलत, कोई क्लीन चिट नहीं

भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच चल रही इस रस्साकसी में सोमवार को सीबीआई को भी सामने आना पड़ गया। एजेंसी ने कहा कि उसकी तरफ से शराब घोटाले में अब तक किसी को क्लीन चिट नहीं दी गई है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जितेंद्र कुमार का शराब घोटाले की जांच से कोई लेना-देना नहीं था। आम आदमी पार्टी की तरफ से एजेंसी पर लगाए गए आरोप को उसने पूरी तरह फर्जी करार दिया।

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