Jammu and Kashmir: इन पांच 'तीरों' के सहारे सत्ता तक पहुंचेगी भाजपा, मगर कश्मीर में क्यों चाहिए 'टोटका'
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विस्तार
भाजपा ने इस बार जम्मू-कश्मीर में अपने बलबूते सत्ता की दहलीज तक पहुंचने का प्लान तैयार किया है। राज्य की सियासत में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'पांच' बाण छोड़ दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन बाणों का असर जम्मू संभाग में तो पूरा दिख रहा है, मगर 'कश्मीर' का साथ मिलने में दिक्कत आ रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 25 सीटें मिली थीं, लेकिन इनमें कश्मीर से एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं हो सकी। इस बार भाजपा ने 56000 करोड़ रुपये के निवेश से लेकर पहाड़ी समुदाय को आरक्षण व महाराजा हरि सिंह को भुनाने जैसे पांच बाण छोड़ दिए हैं। इसके बावजूद भाजपा अपने दम पर आधी सीटें लेने की स्थिति में नहीं आ पा रही है। पार्टी, कश्मीर में किसी ठोस टोटके की तलाश में है। इन सबके मद्देनजर, भाजपा को अपने जूनियर साथियों की मदद लेने की अग्रिम रणनीति बनानी पड़ रही है।
प्रदेश की सियासत में भाजपा ने छोड़े हैं ये पांच तीर
जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में नौ सीटें अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित की गई हैं। अब कश्मीर संभाग में 47 सीट तो जम्मू संभाग में 43 सीटें हो गई हैं। ये भाजपा का पहला तीर रहा है। गुर्जर-मुस्लिम समुदाय के गुलाम अली को राज्यसभा में भेजना, इसे दूसरा तीर बताया गया है। पहाड़ियों को आरक्षण देने का भरोसा, यह तीसरा तीर है। महाराजा हरि सिंह के जन्मदिवस पर राजकीय अवकाश की घोषणा और 26 अक्तूबर (जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के लिए महाराजा हरि सिंह ने दस्तखत किए थे) को यादगार दिवस के तौर पर मनाना, यह चौथा बाण रहा है। पांचवां तीर, विकास का है। अमित शाह का तर्क है कि 70 साल तक तीन परिवारों के शासन में जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था। पीएम मोदी ने 3 साल में ही 56,000 करोड़ रुपये का निवेश लाने का काम किया है। युवाओं के हाथ में अब पत्थर और बंदूक नहीं, बल्कि लेपटॉप व मोबाइल फोन है।
जम्मू तो साध लिया, मगर कश्मीर बाकी है
जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) बताते हैं, भाजपा ने अपने पांच बाण तो चला दिए हैं। इसके बावजूद वह अपने दम पर सरकार बनाने की रेखा तक नहीं पहुंच सकी है। जम्मू संभाग में भाजपा के सारे तीर सही लग रहे हैं। जम्मू संभाग की 43 विधानसभा सीटों पर उसे पूरा फायदा मिलेगा, इसमें शक की गुंजाइश नहीं है। बात कश्मीर की है। यहां पर सवाल ये है कि पार्टी इस बार 'जीरो' से आगे बढ़ेगी या नहीं। ऐसा भी नहीं है कि पांच बाण केवल जम्मू संभाग के लिए थे, उनका कुछ असर कश्मीर में भी देखने को मिल सकता है। जैसे पहाड़ियों को एसटी का दर्जा मिल जाता है तो वह फैक्टर जम्मू के अलावा कश्मीर में भी भाजपा की मदद करेगा। हालांकि इसे सीटों के तौर पर बयान नहीं कर सकते कि वहां पार्टी को कितनी सीट मिलने के आसार हैं। कश्मीर संभाग की 47 सीटें, भाजपा के लिए चुनौती बनी हैं।
पहाड़ियों को आरक्षण, दोनों तरफ होगा इसका फायदा
बतौर अनिल गौर, जम्मू-कश्मीर में पहाड़ियों को आरक्षण देने का फायदा, पूरे राज्य में पार्टी को मिल सकता है। राज्य की 12 से 15 सीटों पर इस घोषणा का असर देखने को मिलेगा। जो सीट, सीधे तौर पर रिजर्व हैं, वहां तो फायदा मिलेगा ही, इसके अलावा जहां रिजर्व सीट नहीं हैं, वहां भी लाभ मिलेगा। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी, इन दोनों दलों की वह स्थिति आज नहीं रही। इनके कई बड़े नेता भाजपा का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में इन दलों को मिलने वाले वोट भाजपा की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। इससे चार-पांच सीटों पर भाजपा की दावेदारी मजबूत होने की संभावना है। राज्य में पैंथर पार्टी लगभग खत्म हो चुकी है। इस साल पार्टी सुप्रीमो प्रो. भीम सिंह के निधन के बाद ऐसा कोई नेता नहीं बचा है जो पार्टी को आगे ले जा सके। पार्टी में तीन बार के पूर्व एमएलए बलवंत सिंह मनकोटिया ने भी अब भाजपा ज्वाइन कर ली है। कांग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थिति, ऐसी नहीं है कि वह भाजपा को टक्कर दे सके।
आठ से दस सीटों की खातिर लेना पड़ेगा इनका साथ
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव में भाजपा को सरकार बनाने के लिए आठ से दस सीटों की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए पार्टी को अपने जूनियर साथियों की आवश्यकता पड़ेगी। इसमें कोई हैरानी नहीं कि बदलती परिस्थितियों में नेशनल कांफ्रेंस भी भाजपा को मदद पहुंचा सकती है। पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन और अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी, भी चुनाव के बाद की स्थिति में भाजपा के मददगार बन सकते हैं। इनके साथ ही गुलाम नबी आजाद भी, भाजपा के लिए पराए नहीं हैं। उनकी पार्टी दो-चार सीट लाती है तो वह भाजपा को समर्थन देने से पीछे नहीं हटेंगे। पार्टी ने अपने डोगरा वोट बैंक को पहले से काफी अधिक मजबूत कर लिया है। महाराजा हरि सिंह को लेकर जो कार्यक्रम शुरु किए जा रहे हैं, वह भी पार्टी को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, महाराजा हरि सिंह ने जम्मू और कश्मीर के सम्मान व स्वाभिमान को व्यक्त किया था। नतीजा, सभी क्षेत्रों में लोगों द्वारा उनका उच्च सम्मान किया जाता है। राजपत्रित अवकाश की घोषणा का केंद्र शासित प्रदेश में स्वागत किया गया है। जब इस मुद्दे पर जम्मू क्षेत्र में भारी जश्न मनाया जा रहा था तो कश्मीर घाटी में सभी वर्गों के लोगों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया था।
जम्मू-कश्मीर में हो रहा सर्वांगीण विकास
बारामूला में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, पीएम मोदी चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद समाप्त हो। जम्मू-कश्मीर भारत का स्वर्ग बन कर रहे। मोदी सरकार दहशतगर्दी को कतई सहन नहीं करेगी। जम्मू-कश्मीर में चाहे घाटी हो या जम्मू, श्रीनगर हो या बारामूला, सरकार ने सब जगह सर्वांगीण विकास का काम किया है। पहले एक लाख लोग ऐसे थे जिनके पास यहां की बर्फीली हवाओं में भी रहने के लिए पक्का घर नहीं था। 2014 से लेकर 2022 तक जम्मू और कश्मीर में एक लाख लोगों को घर देने का काम किया है। 70 साल तक तीन परिवारों के शासन में जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था और पीएम मोदी ने तीन साल में ही 56,000 करोड़ रुपये का निवेश लाने का काम किया है। इससे पांच लाख युवाओं को नौकरी के अवसर हासिल होंगे। पहले यह टेररिस्ट हॉटस्पॉट था, आज टूरिस्ट हॉटस्पॉट बन गया है। पहले घाटी के युवाओं के हाथ में पत्थर और बंदूक पकड़ा दी गई थी, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां उद्योग लगाकर युवाओं के हाथ में मोबाइल और लेपटॉप थमाने का काम किया है ताकि युवा रोजगार हासिल कर सकें।