BJP: मुख्यमंत्री के चयन में सामाजिक समीकरण साधेगा भाजपा नेतृत्व, पीएम मोदी, नड्डा और शाह ने किया मंथन
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सरकारी आवास पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंगलवार को लंबी चर्चा की। इस दौरान तीनों राज्यों से मिले फीडबैक पर चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बैठक में विधायक दल की बैठक की तारीख और पर्यवेक्षक के नामों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
विस्तार
विधानसभा चुनाव के नतीजे आने और तीन राज्यों में जीत हासिल करने के बाद भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय करने के मामले में जल्दबाजी में नहीं है। चूंकि चंद महीने बाद देश में लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में अंतिम फैसला करने से पहले पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरे की तलाश में है जिस पर सर्वसम्मति बनने के साथ उसे लोकसभा चुनाव में सामाजिक समीकरण की दृष्टि से लाभ मिले। हालांकि शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि पार्टी के भविष्य के लिए इन राज्यों में नए चेहरे को पुराने चेहरे पर तरजीह दी जाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सरकारी आवास पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंगलवार को लंबी चर्चा की। इस दौरान तीनों राज्यों से मिले फीडबैक पर चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बैठक में विधायक दल की बैठक की तारीख और पर्यवेक्षक के नामों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इन राज्यों में कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इसके लिए पार्टी नेतृत्व नतीजे आने के बाद से ही मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से फीडबैक ले रहा है। अंतिम फैसला लेते समय इन राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक संतुलन का भी ध्यान रखा जाएगा।
मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में चुप्पी, राजस्थान में हलचल
सीएम के चेहरे के सवाल पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुप्पी है, मगर राजस्थान का सियासी पारा गरम है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व जो भी जिम्मेदारी देगा, स्वीकार है। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह ने भी ऐसे ही बयान दिए हैं। ऐसे में नेतृत्व को लगता है कि सीएम का चेहरा तय करने में इन दो राज्यों में मशक्कत नहीं करनी होगी। इन राज्यों में पार्टी नेतृत्व क्रमश: पिछड़ा वर्ग औैर आदिवासी नेता पर दांव लगाएगी। जहां तक राजस्थान का सवाल है तो वहां हलचल तेज है और वसुंधरा राजे अपनी ताकत का इजहार कर रही हैं। इसलिए पार्टी चेहरा तय करते समय अलग-अलग गुट के नेताओं को साधना चाहती है। अगर फीडबैक की प्रक्रिया पूरी हो गई तो चेहरा तय करने के लिए इसी हफ्ते शनिवार या रविवार को संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी।
कहां फंसा है मामला?
दरअसल, इस चुनाव में भाजपा ने तीनों राज्यों में केंद्रीय राजनीति के कई दिग्गजों को मैदान में उतारा था। इसके जरिये पार्टी इन राज्यों के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखने वाले नेताओं को चुनाव लड़ा कर संबंधित क्षेत्र में सियासी लाभ हासिल किया। इनमें से कई दिग्गज चुनाव जीत गए हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन साधने की समस्या है और फीडबैक के जरिये पार्टी यही कोशिश कर रही है।