'पिछड़ों' को साधने में जुटी भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी को बनाएगी 'चेहरा'
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आगामी लोकसभा और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग को साधने में जुट गई है। इसके लिए पार्टी ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसके तहत भाजपा का ओबीसी मोर्चा पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि ओबीसी और एमबीसी तक पहुंच बनाई जा सके। पार्टी की कोशिश है कि खुद पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले प्रधानमंत्री मोदी को इनके हितैषी के रूप में पेश किया जा सके।
हाल ही में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कांग्रेस के ओबीसी सम्मेलन से घबराई भाजपा ने तुरंत ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राम कृपाल यादव जरिए प्रेस कान्फ्रेंस कर कांग्रेस पर ओबीसी समुदाय की अनदेखी करने और ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा न दने का आरोप लगाया।
भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस की पिछड़े वर्ग को लुभाने की कोशिशों से पार्टी के कान खड़े हो गए हैं। भाजपा को डर है कि कांग्रेस आने वाले चुनावों में ओबीसी का इस्तेमाल भाजपा के खिलाफ कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने हाल ही में ओबीसी और एमबीसी नेताओं के साथ हुई एक बैठक में इस मामले पर चर्चा की और एक रोड मैप बनाने और कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया।
सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में ओबीसी मोर्चा के मुखिया दारा सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार, केन्द्रीय मंत्री अजय टमटा, केन्द्रीय मंत्री हंसराज अहीर, यूपी में मंत्री एसपीएस बघेल, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव समेत देशभर के ओबीसी से जुड़े 60 से 65 नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक में फैसला लिया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले पार्टी के नेता सभी राज्यों का दौरा करें। पार्टी का यह अभियान जुलाई से शुरू होगा और 30 अगस्त तक चलेगा।
ओबीसी वोटर्स का झुकाव क्षेत्रीय दलों की तरफ ज्यादा
पार्टी सूत्रों के इस अभियान के तहत ओबीसी मोर्चा देशभर के पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगा, ताकि रणनीति के तहत पार्टी बेहद पिछड़ा जातियों (ईबीसी) और अति पिछड़ा जातियों (एमबीसी) तक अपनी पहुंच बना सके।
पिछड़ों को साधने के इस अभियान पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनावों, 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों और 2017 के यूपी चुनावों में भी पार्टी ने पिछड़े वर्ग में शुमार जातियों का समर्थन हासिल करने की जबर्दस्त कोशिश की थी और कई क्षेत्रों में उसे कामयाबी भी मिली। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में ओबीसी वोटर्स का झुकाव क्षेत्रीय दलों की तरफ ज्यादा दिखता रहा है और अब उन्हें एकजुट करने की कोशिश है।
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की जाति पहचान अभी भी प्रासंगिक है और यह छवि पार्टी के लिए अभी भी काम कर रही है, आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी इसका इस्तेमाल फिर से करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने बताया कि खुद प्रधानमंत्री मोदी भी ओबीसी और एमबीसी के लिए फिक्रमंद हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की हाल ही में 27 मई को यूपी के बागपत में एक रैली में प्रधानमंत्री ने कहा था कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण नीति में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत ओबीसी यानी अन्य पिछड़े वर्गों के कोटे के अंदर बेहद या अति पिछड़ी जातियों के लिए अलग से आरक्षण देने का प्रस्ताव है। इसके लिए सरकार ने ओबीसी में उपवर्गीकरण के लिए एक कमीशन यानी आयोग का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट 26 जून आने की उम्मीद है। हाल ही में सरकार ने इस आयोग का कार्यकाल बढ़ा कर 31 जुलाई किया है।
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने ग्रुप सी और डी की नौकरियों में नियुक्तियों में होने वाले साक्षात्कार को खत्म करने का फैसला किया है, जिसका फायदा ओबीसी और एमबीसी तक पहुंचाए जाने की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक इन नौकरियों में ओबीसी का प्रभुत्व था, लेकिन अब रेलवे, पुलिस की नौकरियों और अन्य सेवाओं में बड़ी संख्या में अति पिछड़े भी लाभान्वित हो रहे हैं। पार्टी की योजना है कि इस फैसले से फायदा पाए लाभार्थियों को पार्टी के अभियान के तहत सामने लाया जाए ताकि अति पिछड़ों में पार्टी सेंध लगा सके।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस परिस्थिति का आकलन कर रही है कि क्या एमबीसी और ईबीसी उत्तर प्रदेश में निर्णायक भूमिका निभाएंगे, जहां एनडीए ने 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें हासिल की थीं। पार्टी की कोशिश है कि यूपी में इस अभियान को ज्यादा से ज्यादा चलाया जाए। जिसके तहत उत्तर प्रदेश में लगभग एक दर्जन ऐसे कार्यक्रम होंगे, जबकि सात बैठकें अन्य राज्यों में आयोजित की जाएंगी। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र पर ज्यादा फोकस किया जाएगा क्योंकि यहां विपक्षी एकता से पार्टी को नुकसान होने का आकलन है।