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दुनिया को गणतंत्र का पाठ पढ़ाने वाला बिहार हुआ 106 साल का
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 22 Mar 2018 10:55 AM IST
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आज बिहार 106 साल का हो गया है। बिहार 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग होकर एक राज्य बना था। इसलिए विश्वभर में जहां जहां बिहार के लोग हैं वह इस दिन को बिहार दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। बिहार दिवस के मौके पर जहां आज उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू पटना जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार दिवस की बधाई दी है।
वह बिहार ही है जिसने दुनिया को गणतंत्र की सीख दी थी। लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार के शासकों का चयन जनता के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाने लगा था और गणतंत्र की स्थापना हुई थी। आज वैश्विक स्तर पर जिस लोकशाही को अपनाया जा रहा है, वह यहाँ के लिच्छवी शासकों की ही देन है। प्राचीन वैशाली नगर अति समृद्ध एवं सुरक्षित नगर था जो एक-दूसरे से कुछ अन्तर पर बनी हुई तीन दीवारों से घिरा था।
1912 में बंगाल के विभाजन के बाद बिहार अस्तित्व में आया।1935 में उड़ीसा इससे अलग किया गया था। जबकि बिहार का विभाजन एक बार और 2000 में हुआ और फिर इससे झारखंड बना.
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वह बिहार ही है जिसने दुनिया को गणतंत्र की सीख दी थी। लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार के शासकों का चयन जनता के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाने लगा था और गणतंत्र की स्थापना हुई थी। आज वैश्विक स्तर पर जिस लोकशाही को अपनाया जा रहा है, वह यहाँ के लिच्छवी शासकों की ही देन है। प्राचीन वैशाली नगर अति समृद्ध एवं सुरक्षित नगर था जो एक-दूसरे से कुछ अन्तर पर बनी हुई तीन दीवारों से घिरा था।
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1912 में बंगाल के विभाजन के बाद बिहार अस्तित्व में आया।1935 में उड़ीसा इससे अलग किया गया था। जबकि बिहार का विभाजन एक बार और 2000 में हुआ और फिर इससे झारखंड बना.
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बिहार दिवस के अवसर पर बिहारवासियों को शुभकामनाएं देने हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद। @narendramodi https://t.co/ZWfvUwTJSB
— Nitish Kumar (@NitishKumar) March 22, 2018
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बिहार के इतिहास के बगैर भारत का इतिहास अधूरा है
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बिहार के इतिहास के बगैर भारत का इतिहास अधूरा है। बिहार के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने, उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है, ताकि परंपरा को प्रगति से जोड़ कर इतिहास को आगे ले जाया जा सके। आखिर इतिहास सिर्फ पढ़ने नहीं, बल्कि समाज को समझने और उसे बदलने का भी उपकरण है।
लंबे समय तक भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु बिहार ही माना जाता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार के चंपारण से ही अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की कहानी लिखी गई थी। यही नहीं भारत छोड़ो आंदोलन में भी बिहार की अहम भूमिका रही है।
आजादी के बाद बिहार का एक और विभाजन हुआ और वर्ष 2000 में इससे अलग होकर झारखंड बना। बुद्ध, महावीर की धरती कहे जाने वाले बिहार की संस्कृति भी काफी संपन्न रही है। महात्मा बुद्ध के काल से यदि शुरू किया जाये, तो उस समय हर्यक वंश का शासन था। बिम्बिसार इस वंश के राजा थे। उनके पुत्र अजातशत्रु ने अपने शासन का विस्तार भारत के बड़े भू-भाग पर किया। इसके बाद नंद वंश का शासन रहा।
अधिकतर क्षेत्र में उसका शासन रहा। फिर मौर्य वंश का शासन आया। इसके राजा चंद्रगुप्त ने अपने गुरु कौटिल्य के साथ मिल कर शासन का विस्तार किया। गुप्त वंश के शासन में समृद्धि आयी। इसी तरह उत्तर वैदिक काल में जायें, तो वैदिक साहित्य, ब्राह्मण ग्रंथ, उपनिषद, महाकाव्य आदि की रचनाएं बिहार में ही हुई।
मिथिला के राजा का दरबार काफी समय तक पूरे भारत की सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। वहां दार्शनिक शास्त्रार्थ और ज्ञान प्राप्ति के लिए आते थे। इसके प्रमाण प्राचीन साहित्य में भरे पड़े हैं। मिथिला के जनकवंशी अंतिम राजा के समय लोकतंत्र की स्थापना हुई थी, जो दुनिया का सबसे पुरानी गणतांत्रिक शासन पद्धति थी।
लंबे समय तक भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु बिहार ही माना जाता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार के चंपारण से ही अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की कहानी लिखी गई थी। यही नहीं भारत छोड़ो आंदोलन में भी बिहार की अहम भूमिका रही है।
आजादी के बाद बिहार का एक और विभाजन हुआ और वर्ष 2000 में इससे अलग होकर झारखंड बना। बुद्ध, महावीर की धरती कहे जाने वाले बिहार की संस्कृति भी काफी संपन्न रही है। महात्मा बुद्ध के काल से यदि शुरू किया जाये, तो उस समय हर्यक वंश का शासन था। बिम्बिसार इस वंश के राजा थे। उनके पुत्र अजातशत्रु ने अपने शासन का विस्तार भारत के बड़े भू-भाग पर किया। इसके बाद नंद वंश का शासन रहा।
विश्व को लोकतंत्र की राह दिखाने वाले ज्ञान व संस्कृति की भूमी बिहार की समस्त जनता को बिहार दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ! #BiharDiwas
— Rajiv Pratap Rudy (@RajivPratapRudy) March 22, 2018
अधिकतर क्षेत्र में उसका शासन रहा। फिर मौर्य वंश का शासन आया। इसके राजा चंद्रगुप्त ने अपने गुरु कौटिल्य के साथ मिल कर शासन का विस्तार किया। गुप्त वंश के शासन में समृद्धि आयी। इसी तरह उत्तर वैदिक काल में जायें, तो वैदिक साहित्य, ब्राह्मण ग्रंथ, उपनिषद, महाकाव्य आदि की रचनाएं बिहार में ही हुई।
मिथिला के राजा का दरबार काफी समय तक पूरे भारत की सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। वहां दार्शनिक शास्त्रार्थ और ज्ञान प्राप्ति के लिए आते थे। इसके प्रमाण प्राचीन साहित्य में भरे पड़े हैं। मिथिला के जनकवंशी अंतिम राजा के समय लोकतंत्र की स्थापना हुई थी, जो दुनिया का सबसे पुरानी गणतांत्रिक शासन पद्धति थी।