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बिहार चुनाव: किसके सिर सजेगा जीत का ताज? एनडीए और महागठबंधन में छाई अजीब सी खामोशी
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बिहार चुनाव
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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कल बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। एनडीए और महागठबंधन अपनी-अपनी जीत के दावे ठोक रहे हैं। हालांकि अंदर खाने दोनों ही पक्षों में एक अजीब सी खामोशी है। इस दौरान सबसे दिलचस्प भूमिका तेजस्वी यादव की है। तेजस्वी यादव की टीम 14 नवंबर को होने वाली मतगणना की रणनीति बनाने में जुटी है। मतगणना की रणनीति बनाने में भाजपा और जद(यू) के नेता भी व्यस्त हैं। पटना के सूत्र बताते हैं कि जद(यू) के नेता और केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की व्यस्तता काफी बढ़ गई है। राजद के नेताओं को 100 सीट के पार जाने का भरोसा है। नाम न छापने की शर्त पर लालू प्रसाद यादव के जमाने के नेता ने कहा कि जिम्मेदार का अब बोलना ठीक नहीं है। वह बड़े उत्साह में कहते हैं कि नतीजा चाहे जिसके पक्ष में हो, लेकिन 2025 का बिहार विधान सभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति में पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए ‘लाइफ लाइन’जैसा है। राजद नेता के इस सवाल पर राहुल गांधी के सचिवालय के सूत्र ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बस इतना कहा कि हमारे सर्वे में एनडीए की सरकार बनवाने वाले देश के ‘एक्जिट पोल’झूठे साबित होने की पूरी संभावना है।
बेअसर हुए प्रशांत किशोर?
कांग्रेस के नेता इ,स विषय में अभी नहीं बोल रहे हैं। राजद के संदय यादव जैसे नेता मुस्कराकर रह जाते हैं। जद(यू) के पूर्व नेता पवन वर्मा ने प्रशांत किशोर को कड़ी मेहनत करने वाला बताया था। कहा था बिहार विधानसभा चुनाव 2025 परिवर्तन का है। लेकिन प्रशांत किशोर खुद चुनाव ही नहीं लड़े। भाजपा के अमित मालवीय कहते हैं कि उन्हें सुनने लोग आए, भीड़ आई, लेकिन वोट में नहीं बदली। चुनाव भी नहीं लड़े। उनके प्रत्याशी भी महागठबंधन और एनडीए की पृष्ठभूमि वाले रहे। लिहाजा प्रशांत किशोर और उनकी जनसुराज पार्टी बेअसर साबित होगी। 5 प्रतिशत से शायद ही अधिक वोट पाए। सीट में खाता खुल जाए तो बड़ी बात। वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार कहते हैं कि प्रशांत किशोर को बिहार के लोग सुनना चाहते थे। राजनीतिक बदलाव की उम्मीद थी। उन्होंने अच्छा मुद्दा उठाया था। किशोर कहते थे कि वह बिहार को बदलने आए हैं, लेकिन चुनाव की घोषणा होते-होते खुद बदल गए।
राजद के नेता क्यों बता रहे हैं ‘लाइफ लाइन’
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कांग्रेस और तेजस्वी यादव दोनों के लिए अहम है। लगातार दो विधानसभा चुनाव में विपक्ष की तरफ से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में ‘प्रोजेक्ट’हैं। सफलता न मिलने पर तेजस्वी की राजनीतिक, सामाजिक दोनों छवि को बड़ा झटका लगेगा। तेजस्वी के साथ-साथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक कौशल पर सवाल उठेंगे। हालांकि कांग्रेस के इस नेता की छवि को ध्यान में रखकर पार्टी ने पहले ही थोड़ी सावधानी बरत ली है। इस चुनाव में राहुल गांधी ने केन्द्रीय चुनाव आयोग को कठघरे में कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर बिहार की ‘गली-गली में वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा लगा। राहुल और प्रियंका ने चुनाव की घोषणा से पहले पूरे बिहार और देश में प्रचार का मॉडल खड़ा कर दिया था, लेकिन चुनाव की घोषणा के बाद महागठबंधन इसे एकजुटता के साथ तालमेल बनाकर कायम नहीं रह पाए। राहुल और प्रियंका का प्रचार अभियान ‘एडवेंचर कैंपेन’तक सिमट कर रह गया। इसका असर विपक्ष के नेताओं के राजनीतिक मनोबल पर पड़ सकता है।
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बिहार में राजनीतिक सर्वेक्षण में अच्छा समय देने वाले अनुपम कहते हैं कि नतीजा महागठबंधन के पक्ष में आएगा तो एनडीए और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की राजनीतिक छवि को झटका लगेगा। विपक्ष का उत्साह बढ़ेगा और आगामी राज्यों के चुनाव में भाजपा की मुश्किल बढ़ सकती है। लेकिन नतीजा एनडी के पक्ष में आने पर तेजस्वी की राजनीतिक लड़ाई थोड़ी बड़ी हो जाएगी। राहुल गांधी के सामने भी स्टार प्रचारक से आगे बढ़कर नेता के तौर पर अपने राजनीतिक कौशल को साबित करने की चुनौती बढ़ेगी।
क्या कह रही है भाजपा, क्या जद(यू) तीसरे नंबर की पार्टी बनेगी?
भाजपा का उत्साह इस समय आसमान पर है। एक्जिट पोल के नतीजे ने भी उत्साह से भर दिया है। आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय कहते हैं कि बस थोड़ा सा इंतजार कर लीजिए। इस तरह से एनडीए 145-165 सीट पा सकता है। अमित मालवीय तेजस्वी यादव के बारे में भी विष्लेषण देते हैं। कहते हैं कि 2020 में तेजस्वी लालू प्रसाद यादव के वारिस और नेतत्व वाले नेता के तौर पर उभरे थे, लेकिन 2025 आते-आते वह विलासी, हिलने डुलने में परहेज करने वाले, स्वाथ्य में ढीले, शारीरिक वजन में अधिक और जन सभा स्थगित करने वाले वाले नेता का व्यवहार किए हैं। इसका उनके दल को नुकसान हो सकता है।
आइए जद(यू) की तरफ चलें, क्या नंबर -1 पर रहेगी?
अमित मालवीय भले पहले नंबर पर भाजपा और इसके आस-पास राजद को बताएं। तीसरा नंबर जद(यू) को, चौथा कांग्रेस और पांचवां लोजपा(10-15 सीट, 50 प्रतिशत स्ट्राइकिंग रेट) दें। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को अधिकतम पांच प्रतिशत वोट के साथ फुस्स बताएं, लेकिन जद(यू) के नेता अभी संयम नहीं खोना चाहते। जद(यू) के एक वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के मंत्री का कहना है कि क्या पता तीसरे नंबर पर भाजपा ही रहे। नंबर-1 हमारे पास हो। सूत्र ने सवाल पूछते हुए कहा कि पूरा चुनाव बीत गया, आपने कहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कोई नाराजगी, जनता में सरकार विरोधी लहर या कुछ देखा? सूत्र का कहना है कि जद(यू) के नेता अभी नीतीश कुमार हैं। जनता में उनकी छवि है। बेदाग है। आप बता दीजिए कि किसी राज्य में 20 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले किस नेता की ऐसी छवि है? कोई भाजपा में ऐसा कोई नेता है क्या? जद(यू) को उम्मीद है कि उसकी सीटें और राजद की सीटें लगभग बराबर रहेगी।
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बेअसर हुए प्रशांत किशोर?
कांग्रेस के नेता इ,स विषय में अभी नहीं बोल रहे हैं। राजद के संदय यादव जैसे नेता मुस्कराकर रह जाते हैं। जद(यू) के पूर्व नेता पवन वर्मा ने प्रशांत किशोर को कड़ी मेहनत करने वाला बताया था। कहा था बिहार विधानसभा चुनाव 2025 परिवर्तन का है। लेकिन प्रशांत किशोर खुद चुनाव ही नहीं लड़े। भाजपा के अमित मालवीय कहते हैं कि उन्हें सुनने लोग आए, भीड़ आई, लेकिन वोट में नहीं बदली। चुनाव भी नहीं लड़े। उनके प्रत्याशी भी महागठबंधन और एनडीए की पृष्ठभूमि वाले रहे। लिहाजा प्रशांत किशोर और उनकी जनसुराज पार्टी बेअसर साबित होगी। 5 प्रतिशत से शायद ही अधिक वोट पाए। सीट में खाता खुल जाए तो बड़ी बात। वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार कहते हैं कि प्रशांत किशोर को बिहार के लोग सुनना चाहते थे। राजनीतिक बदलाव की उम्मीद थी। उन्होंने अच्छा मुद्दा उठाया था। किशोर कहते थे कि वह बिहार को बदलने आए हैं, लेकिन चुनाव की घोषणा होते-होते खुद बदल गए।
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राजद के नेता क्यों बता रहे हैं ‘लाइफ लाइन’
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कांग्रेस और तेजस्वी यादव दोनों के लिए अहम है। लगातार दो विधानसभा चुनाव में विपक्ष की तरफ से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में ‘प्रोजेक्ट’हैं। सफलता न मिलने पर तेजस्वी की राजनीतिक, सामाजिक दोनों छवि को बड़ा झटका लगेगा। तेजस्वी के साथ-साथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक कौशल पर सवाल उठेंगे। हालांकि कांग्रेस के इस नेता की छवि को ध्यान में रखकर पार्टी ने पहले ही थोड़ी सावधानी बरत ली है। इस चुनाव में राहुल गांधी ने केन्द्रीय चुनाव आयोग को कठघरे में कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर बिहार की ‘गली-गली में वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा लगा। राहुल और प्रियंका ने चुनाव की घोषणा से पहले पूरे बिहार और देश में प्रचार का मॉडल खड़ा कर दिया था, लेकिन चुनाव की घोषणा के बाद महागठबंधन इसे एकजुटता के साथ तालमेल बनाकर कायम नहीं रह पाए। राहुल और प्रियंका का प्रचार अभियान ‘एडवेंचर कैंपेन’तक सिमट कर रह गया। इसका असर विपक्ष के नेताओं के राजनीतिक मनोबल पर पड़ सकता है।
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बिहार में राजनीतिक सर्वेक्षण में अच्छा समय देने वाले अनुपम कहते हैं कि नतीजा महागठबंधन के पक्ष में आएगा तो एनडीए और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की राजनीतिक छवि को झटका लगेगा। विपक्ष का उत्साह बढ़ेगा और आगामी राज्यों के चुनाव में भाजपा की मुश्किल बढ़ सकती है। लेकिन नतीजा एनडी के पक्ष में आने पर तेजस्वी की राजनीतिक लड़ाई थोड़ी बड़ी हो जाएगी। राहुल गांधी के सामने भी स्टार प्रचारक से आगे बढ़कर नेता के तौर पर अपने राजनीतिक कौशल को साबित करने की चुनौती बढ़ेगी।
क्या कह रही है भाजपा, क्या जद(यू) तीसरे नंबर की पार्टी बनेगी?
भाजपा का उत्साह इस समय आसमान पर है। एक्जिट पोल के नतीजे ने भी उत्साह से भर दिया है। आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय कहते हैं कि बस थोड़ा सा इंतजार कर लीजिए। इस तरह से एनडीए 145-165 सीट पा सकता है। अमित मालवीय तेजस्वी यादव के बारे में भी विष्लेषण देते हैं। कहते हैं कि 2020 में तेजस्वी लालू प्रसाद यादव के वारिस और नेतत्व वाले नेता के तौर पर उभरे थे, लेकिन 2025 आते-आते वह विलासी, हिलने डुलने में परहेज करने वाले, स्वाथ्य में ढीले, शारीरिक वजन में अधिक और जन सभा स्थगित करने वाले वाले नेता का व्यवहार किए हैं। इसका उनके दल को नुकसान हो सकता है।
आइए जद(यू) की तरफ चलें, क्या नंबर -1 पर रहेगी?
अमित मालवीय भले पहले नंबर पर भाजपा और इसके आस-पास राजद को बताएं। तीसरा नंबर जद(यू) को, चौथा कांग्रेस और पांचवां लोजपा(10-15 सीट, 50 प्रतिशत स्ट्राइकिंग रेट) दें। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को अधिकतम पांच प्रतिशत वोट के साथ फुस्स बताएं, लेकिन जद(यू) के नेता अभी संयम नहीं खोना चाहते। जद(यू) के एक वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के मंत्री का कहना है कि क्या पता तीसरे नंबर पर भाजपा ही रहे। नंबर-1 हमारे पास हो। सूत्र ने सवाल पूछते हुए कहा कि पूरा चुनाव बीत गया, आपने कहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कोई नाराजगी, जनता में सरकार विरोधी लहर या कुछ देखा? सूत्र का कहना है कि जद(यू) के नेता अभी नीतीश कुमार हैं। जनता में उनकी छवि है। बेदाग है। आप बता दीजिए कि किसी राज्य में 20 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले किस नेता की ऐसी छवि है? कोई भाजपा में ऐसा कोई नेता है क्या? जद(यू) को उम्मीद है कि उसकी सीटें और राजद की सीटें लगभग बराबर रहेगी।