फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bihar Election 2025 Tejashwi Yadav Poll Promises from Jobs to Pension and more news and updates

Bihar: तेजस्वी की घोषणाएं कितनी असरदार, अलग-अलग राज्यों-आम चुनावों में क्या रहा वादों का नतीजा? जानें

Sun, 26 Oct 2025 02:26 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 26 Oct 2025 02:26 PM IST
सार

केंद्र और राज्यों के चुनावों में बड़ी घोषणाएं करने के मिलेजुले परिणाम मिले हैं। ज्यादा जमीनी अनुभव यह है कि जनता केवल उसी राजनीतिक दल या नेता के दावों पर भरोसा करती है जिसके जीतने की संभावना अधिक होती है। जिस दल के जीतने की संभावना कम होती है, जनता उनके बड़े बड़े वादों से भी आकर्षित नहीं होती। 

विज्ञापन
Bihar Election 2025 Tejashwi Yadav Poll Promises from Jobs to Pension and more news and updates
तेजस्वी यादव। - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

बिहार चुनाव जीतने को बेकरार तेजस्वी यादव ने रविवार को भी वादों की झड़ी लगा दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने वादा किया कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनते ही पंचायत स्तरीय जनप्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ा दिया जाएगा। उन्हें 50 लाख रुपए का इंश्योरेंस देने के साथ पेंशन भी दिया जाएगा। नीतीश कुमार की एक योजना की बराबरी करने की कोशिश में उन्होंने नाई, धोबी और बढ़ई जैसे वर्गों को कर्ज उपलब्ध कराने का वादा भी कर दिया है। इसके पहले भी हर घर में एक सरकारी नौकरी जैसी कई बड़ी घोषणाएं कर तेजस्वी यादव ने जनता को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश की है। लेकिन इन दावों के बीच एक बड़ा प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या केवल बड़ी घोषणाओं से चुनाव जीता जा सकता है? स्वयं नीतीश कुमार ने जनता के लिए बड़े काम किए हैं। क्या ये घोषणाएं उनके कार्यों से ऊपर उठकर जनता को तेजस्वी यादव के लिए वोट करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं? 
विज्ञापन

इसके पहले केंद्र और राज्यों के चुनावों में बड़ी घोषणाएं करने के मिलेजुले परिणाम मिले हैं। ज्यादा जमीनी अनुभव यह है कि जनता केवल उसी राजनीतिक दल या नेता के दावों पर भरोसा करती है जिसके जीतने की संभावना अधिक होती है। जिस दल के जीतने की संभावना कम होती है, जनता उनके बड़े बड़े वादों से भी आकर्षित नहीं होती। जैसे 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने देश के एक बड़े वर्ग में बदलाव और विकास की उम्मीद पैदा कर दी थी। यही कारण है कि कई अच्छे कार्य करने के बाद भी सत्तारूढ़ यूपीए सरकार को हार का सामना करना पड़ा। 

उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने कई बड़ी घोषणाएं की थी, लेकिन इसके बाद भी वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार कड़ी एंटी इंकमबेंसी फैक्टर का सामना कर रही थी, इसलिए हर परिवार को 25 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज करने जैसी बड़ी घोषणा भी उसे जीत नहीं दिला सकी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

कांग्रेस को तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के चुनावों में मजबूत स्थिति में घोषणाओं का भी लाभ भी मिला और वह चुनाव जीतने में सफल रही, लेकिन कमजोर स्थिति में दिख रहे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में बड़ी- बड़ी घोषणाएं करने के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं हुआ। यानी कांग्रेस जहां जहां मज़बूत स्थिति में थी, उसकी घोषणाओं से भी उसे लाभ मिला। लेकिन जहां वह कमज़ोर स्थिति में थी, वहां बड़ी घोषणाएं करने के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं मिला। 

2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा कमजोर स्थिति में थी। यही कारण है कि महिलाओं को स्कूटी, महिलाओं युवाओं को भत्ता, 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने जैसी बड़ी घोषणाएं करने के बाद भी वह चुनाव नहीं जीत सकी। इसी चुनाव में सबसे कमज़ोर दिख रही कांग्रेस ने 600 यूनिट फ्री बिजली देने और हर घर को राशन देने जैसी कई बड़ी घोषणाएं की, लेकिन वह खाता खोलने तक में कामयाब नहीं हुई। जबकि इस बार 2025 के चुनाव में अरविंद केजरीवाल की छवि खराब होने के कारण वे कमजोर पिच पर थे। जनता ने इस बार भाजपा के दावों पर ज्यादा भरोसा किया और उसे शानदार सफलता दी। 
विज्ञापन

अनुभव यह भी है कि जो सरकार सत्ता में रहती है, उसके द्वारा दी गई सहायता लोगों पर अधिक असर करती है। जैसे 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए सम्मान राशि देने की घोषणा गेम चेंजर साबित हुई क्योंकि सरकार ने चुनाव में उतरने से पहले ही किसानों के खाते में पैसे देने शुरू कर दिए थे। इसी तरह मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने लाडली बहना योजना के अंतर्गत महिलाओं को आर्थिक सहायता देनी शुरू कर दी थी। इसका असर हुआ कि कांग्रेस के द्वारा अधिक पैसा देने की घोषणा भी असरदार नहीं हुई। 

तेजस्वी कितने विश्वसनीय?
नीतीश कुमार सरकार के विरोध में कोई बड़ी लहर चल रही हो, ऐसा जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। उल्टे महागठबंधन में सीटों के मामले पर तेज हुई लड़ाई ने जनता के मन में यही भाव पैदा किया है कि कांग्रेस- राजद में आपसी सामंजस्य नहीं है। तेजस्वी यादव ने पिछली सरकार में नौकरियां दी थीं, लेकिन इस बार जिस तरह हर घर को एक सरकारी नौकरी देने का वादा उन्होंने किया है, लोग भी मान रहे हैं कि सरकार के पास बजट के बिना इसे जमीन पर उतारना संभव नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के उदाहरण भी लोगों के सामने हैं जहां कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए बड़ी घोषणाएं कर दी, लेकिन ये सरकारें अपने कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रही हैं। ऐसे उदाहरणों के बीच तेजस्वी यादव अपनी घोषणाओं से कितना विश्वास हासिल कर पाएंगे, कहना मुश्किल है ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed