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भीमा-कोरेगांव : 2018 के अनुभव से सचेत हुई सरकार, 1200 पर निरोधक कार्रवाई

Sun, 30 Dec 2018 05:32 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: Gaurav Pandey Updated Sun, 30 Dec 2018 05:32 AM IST
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Bhima Koregaon : Government learned lesson from last experience, prevention action against 1200
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एक जनवरी को 200 साल पुरानी कोरेगांव-भीमा लड़ाई की स्मृति में होने वाले आयोजनों को लेकर इस बार महाराष्ट्र सरकार पहले ही सचेत हो गई है। पुणे जिले में इस लड़ाई के स्मारक के आसपास हिंसक हालात बनने से रोकने के लिए पुलिस ने पहले ही 1200 से ज्यादा लोगों के खिलाफ निरोधक कार्रवाई कर दी है। 

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एसपी पुणे देहात संदीप पाटिल ने रविवार को मीडिया को बताया कि 1211 लोगों के खिलाफ सीआरपीसी के तहत निरोधक कार्रवाई के अतिरिक्त 64 लोगों को चिह्नित करते हुए उनके इस स्मारक के चारों तरफ 40 किलोमीटर के क्षेत्र में घुसने पर रोक लगाई गई है, जबकि 6 अन्य को जिला बदर कर दिया गया है। 
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एसपी पाटिल के मुताबिक, इनमें दक्षिण पंथी हिंदू नेता मिलिंद एकबोट और वामपंथी झुकाव वाले सांस्कृतिक संगठन कबीर कला मंच (केकेएम) के सदस्य भी शामिल हैं। इनमें से कुछ पर 1 जनवरी, 2018 के बाद हुई हिंसा के मामले में गंभीर आरोप वाले मामले दर्ज हैं।

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इसलिए बरती जा रही है सतर्कता

बता दें कि दलित हर साल एक जनवरी को पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध के जय स्तंभ पर एकत्र होते हैं। ब्राह्मण पेशवा की सेना के खिलाफ इस युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना (जिसमें अधिकतर दलित महार सैनिक थे) को जीत मिली थी, जिसे दलित समुदाय अपने निर्वाण का प्रतीक मानता है। 

इस जीत की 200वीं सालगिरह मनाने के लिए 1 जनवरी, 2018 को दलितों के जय स्तंभ पर एकत्र होने के बाद हिंसा भड़क गई थी, जिसमें एक आदमी की मौत हो गई थी। इस हिंसा के लिए 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित की गई एल्गर परिषद को जिम्मेदार माना जाता है, जिसका आयोजन माओवादियों से मिले धन से होने का आरोप है।

संभाजी भिडे पर जवाब देने से बचा प्रशासन

मीडिया से बातचीत के दौरान मौजूद विशेष आईजी कोल्हापुर रेंज विश्वास नागरे-पाटिल और पुणे के जिलाधिकारी नवल किशोर राम राव से जब यह पूछा गया कि दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिडे को भी क्या नोटिस दिया गया है, तो उन्होंने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। भिडे भी एकबोट के साथ पिछले साल हुई हिंसा के मामले में मुख्य आरोपी हैं। 

जिलाधिकारी ने इस बार 1 जनवरी को 7 से 10 लाख लोगों के युद्ध स्मारक पर पहुंचने की संभावना जताई है। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती के अलावा क्षेत्र पर निगरानी रखने के लिए 500 सीसीटीवी कैमरे, 11 ड्रोन कैमरे और 40 वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले लगाए गए हैं। साथ ही पुणे जिले की सीमाओं पर अतिरिक्त चेकपोस्ट बनाकर जांच की जा रही है।

दो महीने से चल रही कवायद

सरकार की यह सक्रियता दो महीने पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ भड़काऊ संदेशों के वायरल होने पर शुरू हो गई थी, जिसमें 45 लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसके बाद से ही जिला प्रशासन और स्थानीय खुफिया इकाई के साथ अधिकारियों की बैठकों का दौर चल रहा था। 

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