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भेंडवल की भविष्यवाणी: इस साल भी जारी रहेगी महामारी और कुदरत का कहर
Sun, 16 May 2021 02:08 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 16 May 2021 02:08 AM IST
सार
- सलामत रहेगी पीएम मोदी की कुर्सी लेकिन चुनौतीपूर्ण होंगी राहें
- भेंडवल ने अपनी भविष्यवाणी घुसपैठ बढ़ने की आशंका जताई
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कोरोना का कहर
- फोटो : ANI
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विस्तार
बीते 350 साल से परंपरागत रूप से चली आ रही महाराष्ट्र के बुलढाणा की प्रसिद्ध भेंडवल भविष्यवाणी इस साल फिर सार्वजनिक हुई है, जिसमें कोरोना महामारी को लेकर महत्वपूर्ण बात कही गई है।
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भेंडवल की भविष्यवाणी में कहा गया है कि देश में इस साल भी महामारी और कुदरत का कहर जारी रहेगा। इससे देश में आर्थिक संकट और महंगाई बढ़ेगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा गया है कि राजा की कुर्सी सलामत रहेगी लेकिन उनकी राहें चुनौतीपूर्ण होंगी।
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बुलढाणा के भेंडवल गांव में इस साल की भविष्यवाणी करते हुए सारंगधर महाराज वाघ ने कहा कि कोरोना महामारी का संकट इस साल भी कायम रहता दिखाई दे रहा है। क्योंकि यह वर्ष रोग और महामारियों का साल रहेगा। पृथ्वी पर अनेक संकट आएंगे। कुदरत का कहर टूटेगा जिसमें बड़ी संख्या में मौतें होंगी।
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भेंडवल की भविष्यवाणी में युद्ध जैसे हालात का भय नहीं दिखाया गया है लेकिन विदेशी घुसपैठ बढ़ने की आशंका जताई गई है। वहीं, कृषि को लेकर सारंगधर महाराज ने कहा है कि इस साल कपास, ज्वार, मूंग की फसल अच्छी होगी। धान, चना-मटर, जौ-गेहूं की फसल भी अच्छी होगी लेकिन उसका वाजिब दाम नहीं मिलेगा।
मौसम के बारे में कहा गया है कि जून महीने में कम तो जुलाई में अधिक बारिश होगी। लेकिन किसानों पर बेमौसम बारिश का संकट कम होगा। कुदरती कहर से बड़ी संख्या में मौत होने और महामारी को लेकर की गई भविष्यवाणी से लगता है कि इस साल भी कोरोना से निजात नहीं मिल पाएगी।
किसान भेंडलल की भविष्यवाणी का विश्वास करते हैं। इसके लिए महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, खानदेश सहित गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश भी किसान भेंडवल आते हैं। लेकिन, इस साल कोरोना संकट के कारण किसान नहीं पहुंचे।
ऐसे होती है भेंडवल की भविष्यवाणी
भेंडवल में 350 साल से कलश स्थापना के जरिए भविष्यवाणी का विधान है। भविष्यवाणी की यह परंपरा चंद्रभान महाराज वाघ ने शुरू की थी। अब उनके वंशज इस परंपरा के तहत भविष्वाणी करते हैं। हर साल अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पहले गांव के बाहर खेत में वाघ घराने के वंशज कलश रखते हैं। घड़े में 18 प्रकार के अनाज रखे जाते हैं जिसमें गेहूं, ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, तिल, मसूर, तांदूल, मटर आदि अनाज प्रमुख होते हैं।
खेत में मिट्टी खोदकर पानी भरकर घड़ा रखा जाता है और उसके आस-पास चार पिंड बनाई जाती है। उस पर पान-सुपाड़ी आदि रखकर घट रचना की जाती है और दूसरे दिन सूर्योदय के साथ घड़े को बाहर निकालकर भविष्यवाणी की जाती है।