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एसआईआर: भारत रत्न सीएनआर राव को नोटिस मिला या नहीं? ग्रेटर बंगलूरु अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त ने किया स्पष्ट
Wed, 09 Sep 2026 03:43 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 09 Sep 2026 03:43 PM IST
सार
महान वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित प्रोफेसर सीएनआर राव को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन यानी एसआईआर के तहत नोटिस भेजे जाने की खबरों से हलचल मच गई थी। कई जगह दावा किया गया कि नाम में गड़बड़ी के चलते उन्हें सुनवाई के लिए तलब किया गया है। क्या प्रशासन ने सच में 92 साल के इस वरिष्ठ वैज्ञानिक को नोटिस भेजा था या सच्चाई कुछ और है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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सीएनआर राव, वैज्ञानिक और प्रोफेसर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश के जाने-माने वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित 92 वर्षीय प्रोफेसर सीएनआर राव को लेकर मतदाता सूची संशोधन मामले में एक बड़ा प्रशासनिक स्पष्टीकरण सामने आया है। मीडिया के कुछ हिस्सों में यह दावा किया जा रहा था कि मतदाता सूची में नाम की स्पेलिंग गलत होने की वजह से प्रोफेसर राव को एसआईआर यानी विशेष गहन संशोधन का नोटिस थमाया गया है और उन्हें खुद पेश होकर अपनी पहचान साबित करने के लिए कहा गया।
इस दावे के बाद से ही देश में बहस छिड़ गई कि देश को गौरान्वित करने वालो को भी अपने पहचान का सबूत देना पड़ रहा है। अब बंगलूरू शहर के जिला चुनाव अधिकारी और ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त महेश्वर राव ने बुधवार को खुद सामने आकर इस पूरे मामले की असल हकीकत साफ कर दी है।
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इस दावे के बाद से ही देश में बहस छिड़ गई कि देश को गौरान्वित करने वालो को भी अपने पहचान का सबूत देना पड़ रहा है। अब बंगलूरू शहर के जिला चुनाव अधिकारी और ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त महेश्वर राव ने बुधवार को खुद सामने आकर इस पूरे मामले की असल हकीकत साफ कर दी है।
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क्या सच में प्रोफेसर सीएनआर राव को कोई नोटिस जारी हुआ था?
ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त महेश्वर राव ने साफ किया कि भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव को एसआईआर प्रक्रिया के तहत कोई भी नोटिस जारी नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि मीडिया में चल रहे वे सभी दावे पूरी तरह गलत हैं जिनमें कहा गया था कि 92 साल के बुजुर्ग वैज्ञानिक को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए बुलाया गया है। हकीकत यह है कि चुनाव विभाग के अधिकारी खुद प्रोफेसर राव के घर पहुंचे थे। राज्य के स्वीप नोडल अधिकारी और बंगलूरू वेस्ट सिटी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से उनके आवास पर जाकर फॉर्म सौंपे थे। अधिकारियों ने खुद बैठकर परिवार को जरूरी जानकारी भरने में पूरी मदद की थी।
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क्या मतदाता सूची के रिकॉर्ड में नाम को लेकर कोई विसंगति थी?
- चुनाव अधिकारी के मुताबिक प्रोफेसर राव के पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड में नाम को लेकर अंतर जरूर दर्ज था। साल 2002 में पूर्ववर्ती 76-मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची के भाग संख्या 129 और क्रम संख्या 431 में उनका नाम राम के रूप में दर्ज था। वहीं वर्तमान में 157-मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 59 और क्रम संख्या 187 में उनका नाम प्रोफेसर सी.एन. राव एम दर्ज है।
- उनका नाम प्रारूप मतदाता सूची में भी शामिल है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि पुरानी सूची में उनका नाम 'Prof C.N.R. Rao' था, जबकि मौजूदा सूची में एक अतिरिक्त 'f' जुड़कर 'Proff C.N.R. Rao' हो गया था। इस वजह से 'सेल्फ-नेम मिसमैच' का हवाला देकर आईआईएससी के पास मल्लेश्वरम में सुनवाई के लिए बुलाए जाने की अफवाह फैली थी।
बूथ लेवल ऑफिसर ने नोटिस जारी किया या नहीं?
- मुख्य आयुक्त महेश्वर राव ने विस्तार से स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में नाम का अंतर सामने आने के बावजूद बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ ने प्रोफेसर राव को एसआईआर सुनवाई का कोई नोटिस नहीं भेजा।
- प्रोफेसर राव को समाज का एक बेहद 'सम्मानित व्यक्ति' मानते हुए बीएलओ ने सीधे यह सिफारिश की कि उनका नाम बिना किसी परेशानी के अंतिम मतदाता सूची में बरकरार रखा जाए और शामिल किया जाए।
- चुनाव अधिकारी ने पुष्टि की है कि प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम अंतिम मतदाता सूची में सम्मानपूर्वक शामिल करने के लिए सभी जरूरी प्रशासनिक कदम पहले ही उठा लिए गए हैं।
- चुनाव अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रतिष्ठित नागरिक को परेशान करने का सवाल ही नहीं उठता, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी ने खुद उनके घर पहुंचकर सम्मानपूर्वक प्रक्रिया को पूरा कराया है।