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वायरल वीडियो मामला: आंदोलन के आयोजक की शशि थरूर को चुनौती, बोले- संसद में लाएं धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध कड़ा कानून

Mon, 09 Aug 2021 06:29 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 09 Aug 2021 06:29 PM IST
सार

भारत जोड़ो आंदोलन की मुहिम चलाने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि वे इस वीडियो में शामिल लोगों को न ही जानते हैं, न ही पहचानते हैं। उन्हें इस कार्यक्रम में बुलाया भी नहीं गया था। उनके आंदोलन का समय केवल एक घंटे का था। कोविड नियमों का पालन करते हुए एक घंटे के बाद कार्यक्रम का समापन कर दिया गया...

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Bharat Jodo Andolan Ashwini Upadhyay challenged Shashi Tharoor to bring a stringent law against those who show religious atrocities
भारत जोड़ो आंदोलन - फोटो : Amar ujala

विस्तार

भारत जोड़ो आंदोलन के आयोजकों में से एक वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने कांग्रेस नेता शशि थरूर को मजहबी कट्टरता दिखाने वालों के विरुद्ध कड़ा कानून लाने के लिए पहल करने की चुनौती दी है। उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि शशि थरूर सोशल मीडिया पर एक वीडियो के आधार पर ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर थरूर धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध हैं तो वे संसद में धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध कड़ा कानून लाने की पहल करें जिसमें धार्मिक कट्टरता दिखाने वाले आरोपियों को कम से कम 10 साल की सजा और उनकी पूरी संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान हो। वे इसमें उनका साथ देंगे।

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क्यों बढ़ा विवाद

दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार आठ अगस्त को ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की गई। इस आंदोलन में अंग्रेजी शासन में बने 222 कानूनों को समाप्त करने की मांग की गई। इसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय के अलावा कई संगठन और उनके कार्यकर्ता शामिल हुए। अभिनेता गजेंद्र चौहान और कई शीर्ष लोग इस आंदोलन में शामिल थे। लेकिन कथित तौर पर इस आंदोलन के दौरान एक धर्म विशेष के लोगों के विरुद्ध अवांछित टिप्पणियां की गईं और धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाले नारे लगाए गए। इसका वीडियो भी बना लिया गया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

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इस वीडियो के वायरल होते ही भारत जोड़ो आंदोलन के आयोजक अचानक आलोचना के केंद्र में आ गए। कांग्रेस नेता शशि थरूर और कुछ अन्य लोगों ने इस बयानबाजी की कड़ी निंदा की और आयोजकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। वीडियो की संवेदनशीलता देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध शांति भंग करने और माहौल बिगाड़ने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।

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आयोजकों ने कहा- जांच हो

भारत जोड़ो आंदोलन की मुहिम चलाने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय ने अमर उजाला से कहा कि इस वीडियो के सत्यता की जांच होनी चाहिए। वे इस वीडियो में शामिल लोगों को न ही जानते हैं, न ही पहचानते हैं। उन्हें इस कार्यक्रम में बुलाया भी नहीं गया था। उनके आंदोलन का समय केवल एक घंटे का था। कोविड नियमों का पालन करते हुए एक घंटे के बाद कार्यक्रम का समापन कर दिया गया। इस पूरे समय के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी।

उन्होंने संदेह व्यक्त किया कि यह वीडियो फर्जी हो सकता है, इसलिए इसकी सत्यता की जांच होनी चाहिए। अगर जांच में वीडियो सही पाया जाता है तो आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस से की है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

लेकिन इसकी आड़ में उनके आंदोलन को कमजोर करने की साजिश नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि उन पुराने कानूनों का उद्देश्य अंग्रेजों की सरकार के लिए काम करना था, और आजादी के 70 साल में ये कानून समाज से अपराध रोकने में असफल साबित हुए हैं। इसलिए उनकी मांग है कि नये भारत के अनुसार अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई वाले कानून बनने चाहिए जिससे सभी सुरक्षित महसूस करें और देश-समाज विकास कर सके।

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