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स्कूल भर्ती घोटाला मामला: बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी तीन साल बाद जमानत पर रिहा, ED ने किया था गिरफ्तार
Tue, 11 Nov 2025 05:58 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 11 Nov 2025 05:58 PM IST
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पार्थ चटर्जी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को कथित स्कूल भर्ती घोटाले के मामले में तीन साल बाद मंगलवार को जमानत मिल गई। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था।
पार्थ चटर्जी को बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी कई मामलों में गिरफ्तार किया था, जो राज्य में एसएससी की 2016 की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े थे। ये मामले कक्षा 9-10, 11-12 के शिक्षकों और ग्रुप सी और डी के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों से जुड़े हैं।
ये भी पढ़ें: अब जज की मंजूरी पर ही सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग, CJI की फर्जी वीडियो पर चिंता के बीच फैसला
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पार्थ चटर्जी पिछले 203 दिनों से दक्षिण-पूर्व कोलकाता के मुकुंदपुर इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। बताया गया कि उन्हें किडनी और दिल से जुड़ी बीमारियां थीं। जमानत बांड भरने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया।
सोमवार को एक विशेष सीबीआई अदालत में गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद उनकी रिहाई हुई। अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर फैसला अलीपुर कोर्ट को भेजा, जिसके बाद प्रेसिडेंसी जेल प्रशासन को रिहाई आदेश जारी किया गया।
ये भी पढ़ें: तमिलनाडु और प. बंगाल में SIR प्रक्रिया को चुनौती, DMK-TMC की याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब तलब
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पार्थ चटर्जी को दोपहर करीब दो बजे अस्पताल से निकाला गया। उस समय बड़ी संख्या में उनके समर्थक 'पार्थ दा जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे। वे बिना कुछ बोले कार की फ्रंट सीट पर हाथ जोड़कर बैठे नजर आए।
पार्थ चटर्जी को पहले ईडी के मामलों में जमानत मिल चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि ग्रुप सी भर्ती मामले में गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद उन्हें जमानत दी जा सकती है। 26 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भी उन्हें सशर्त जमानत दी थी। शर्तों में यह शामिल था कि जांच और मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने तक वे किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्त नहीं होंगे। हालांकि वह विधायक बने रह सकते हैं।
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पार्थ चटर्जी को बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी कई मामलों में गिरफ्तार किया था, जो राज्य में एसएससी की 2016 की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े थे। ये मामले कक्षा 9-10, 11-12 के शिक्षकों और ग्रुप सी और डी के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों से जुड़े हैं।
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पार्थ चटर्जी पिछले 203 दिनों से दक्षिण-पूर्व कोलकाता के मुकुंदपुर इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। बताया गया कि उन्हें किडनी और दिल से जुड़ी बीमारियां थीं। जमानत बांड भरने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया।
सोमवार को एक विशेष सीबीआई अदालत में गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद उनकी रिहाई हुई। अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर फैसला अलीपुर कोर्ट को भेजा, जिसके बाद प्रेसिडेंसी जेल प्रशासन को रिहाई आदेश जारी किया गया।
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अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पार्थ चटर्जी को दोपहर करीब दो बजे अस्पताल से निकाला गया। उस समय बड़ी संख्या में उनके समर्थक 'पार्थ दा जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे। वे बिना कुछ बोले कार की फ्रंट सीट पर हाथ जोड़कर बैठे नजर आए।
पार्थ चटर्जी को पहले ईडी के मामलों में जमानत मिल चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि ग्रुप सी भर्ती मामले में गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद उन्हें जमानत दी जा सकती है। 26 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भी उन्हें सशर्त जमानत दी थी। शर्तों में यह शामिल था कि जांच और मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने तक वे किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्त नहीं होंगे। हालांकि वह विधायक बने रह सकते हैं।