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Supreme Court: तमिलनाडु और प. बंगाल में SIR प्रक्रिया को चुनौती, DMK-TMC की याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब तलब

Tue, 11 Nov 2025 04:21 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 11 Nov 2025 04:21 PM IST
सार

चुनाव आयोग तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया जाना है। दोनों राज्यों की सत्ताधारी पार्टियों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। DMK और TMC की याचिकाओं पर अदालत ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

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Supreme Court notice to Election Commission DMK-TMC challeng SIR process in Tamil Nadu and West Bengal
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को संक्षिप्त सुनवाई के बाद अदालत ने चुनाव आयोग (EC) को कहा कि तमिलनाडु में सत्ताधारी दल- DMK की याचिका पर अलग से जवाब दें। एक अन्य याचिका पश्चिम बंगाल से जुड़ी है। यह याचिका- CPIM, बंगाल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दायर की है। बता दें कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती दी है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से दो सप्ताह के भीतर नई याचिकाओं पर जवाब मांगे हैं।

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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सभी याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने के साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ताओं से यह भी पूछा कि वे इस प्रक्रिया को लेकर इतने आशंकित क्यों हैं। पीठ ने हाईकोर्ट को इन राज्यों और बिहार की मतदाता सूचियों के संबंध में दायर याचिकाओं को स्थगित रखने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अब 26 नवंबर को सुनवाई करेगा। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से यह भी कहा कि यदि पीठ संतुष्ट होती है तो वह इस प्रक्रिया को रद्द कर देगी।
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जल्दबाजी में किया जा रहा एसआईआर: सिब्बल
डीएमके की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में की जा रही है, जबकि पहले मतदाता सूची में संशोधन में तीन साल लगते थे। अब चुनाव आयोग कह रहा है कि एक महीना लगेगा। लाखों लोग इससे बाहर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नवंबर-दिसंबर तमिलनाडु में भारी बारिश का समय होता है और अधिकतर अधिकारी बाढ़ राहत कार्यों में व्यस्त हो सकते हैं। दिसंबर में क्रिसमस की छुट्टियां होंगी, जिसके दौरान लोगों के अपने मूल स्थानों पर मौजूद रहने की संभावना कम है। जनवरी फसल-पोंगल का मौसम है। सिब्बल ने कहा कि यह अवधि तमिलनाडु राज्य में एसआईआर आयोजित करने के लिए सबसे अनुपयुक्त है।
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आप ऐसे बर्ताव कर रहे जैसे ऐसा पहली बार हो रहा: जस्टिस कांत
जस्टिस कांत ने कहा, भारत जैसे बड़े देश में कुछ राज्यों को हमेशा प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। सिब्बल ने कहा कि दक्षिणी राज्य के कुछ इलाकों में कनेक्टिविटी बहुत खराब है और दस्तावेज़ अपलोड करने में दिक्कतें आएंगी। इसी तरह, पश्चिम बंगाल में भी ग्रामीण कनेक्टिविटी बहुत खराब है और तमिलनाडु के मामले में तो यह और भी बदतर है। जस्टिस कांत ने कहा कि आप लोग ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे मतदाता सूची में संशोधन पहली बार हो रहा हो! हम भी जमीनी हकीकत से वाकिफ हैं। जस्टिस कांत ने चुनाव आयोग पर भरोसा करने का सुझाव देते हुए कहा कि एक सांविधानिक संस्था ऐसा कर रही है। कोई भी प्रक्रियागत कमियां हो सकती है, वे सुधार करेंगे।

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कौन अधिक पिछड़ा...राज्य यह दिखाने की होड़ में हैं
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह ऐसा मामला है जहां राज्य यह दिखाने की होड़ में लगे हैं कि कौन अधिक पिछड़ा है। द्विवेदी ने न्यायालय से यह भी आग्रह किया कि परस्पर विरोधी आदेश पारित होने की आशंका से बचने के लिए हाईकोर्ट को समान मामलों से निपटने से रोका जाए। जिसके बाद पीठ ने ऐसा आदेश पारित करने पर सहमति जताई।

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