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बंगाल: भाजपा विधायक रेखा पात्रा ने जिला नेताओं पर लगाए आरोप, कहा- पढ़ी-लिखी नहीं हूं, इसलिए करते हैं गुमराह
Sat, 12 Sep 2026 10:00 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 12 Sep 2026 10:00 PM IST
सार
संदेशखाली आंदोलन से चर्चा में आईं भाजपा विधायक रेखा पात्रा और उनकी पार्टी की स्थानीय इकाई के बीच तनातनी सामने आई है। हिंगलगंज से जीतकर विधानसभा पहुंचीं पात्रा ने आरोप लगाया कि जिला स्तर के कुछ नेता उनकी पढ़ाई-लिखाई में कमी का फायदा उठाकर उन्हें बार-बार नीचा दिखाते हैं, जिस कारण वह जिला इकाई के आयोजनों से किनारा कर चुकी हैं।
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संदेशखाली की चर्चित चेहरा रेखा पात्रा नाराज
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
संदेशखाली आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शुमार रहीं भाजपा विधायक रेखा पात्रा ने अपनी ही पार्टी के संगठन पर आरोप लगाए हैं। विधायक रेखा पात्रा ने बशीरहाट संगठनात्मक जिला नेतृत्व के एक वर्ग पर उन्हें बार-बार अपमानित करने और उनकी औपचारिक शिक्षा की कमी का हवाला देकर 'गुमराह' करने का आरोप लगाया है।
हिंगलगंज की विधायक ने कहा कि वह जिला इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से दूर रही हैं, क्योंकि उन्हें वहां "असहयोग" और कथित अनादर का सामना करना पड़ा। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप कर "न्याय दिलाने" की अपील की।
रेखा पात्रा ने लगाए क्या-क्या आरोप?
रेखा पात्रा ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे जिला नेतृत्व गुमराह करता है, इसलिए मैं उनके द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होती। मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहती हूं और काम करती हूं।" उन्होंने आरोप लगाया कि बशीरहाट संगठनात्मक जिला समिति के सदस्य उनकी औपचारिक शिक्षा की कमी का इस्तेमाल उन्हें गलत दिशा में ले जाने के लिए कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा, "मुझे पढ़ाई-लिखाई के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए बशीरहाट संगठनात्मक जिला समिति मुझे गुमराह करती है। वे हमेशा मेरा अपमान करते हैं। कार्यक्रमों में बुलाने के बावजूद मेरा अपमान किया जाता है। मुझे ये बातें पसंद नहीं हैं।" पात्रा का यह सार्वजनिक असंतोष भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर सामने आया है। राज्य में पार्टी की सरकार है और आगामी पंचायत चुनाव भी नजदीक हैं।
संगठन या पार्टी: किससे नाराज है भाजपा विधायक?
जिला नेतृत्व की तीखी आलोचना के बावजूद पात्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी संगठन के एक वर्ग से है, न कि भाजपा या उसकी सरकार से। उन्होंने कहा, "पार्टी संगठनात्मक जिला, मंडल या बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की वजह से नहीं रुकती। पार्टी अपने तरीके से आगे बढ़ती है।" साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि सत्ता में आते ही सरकार ने काम करना शुरू कर दिया था।
विधायक ने कहा, "पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ऊंचाइयों तक जाएगी। यह सत्ता में आने के बाद से ही काम कर रही है। इसने काम शुरू करने में एक पल की भी देरी नहीं की।" पात्रा ने राजनीतिक गतिविधियों को सोशल मीडिया पर प्रदर्शित करने के महत्व को भी नकारते हुए कहा कि उनका ध्यान प्रचार के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्र के काम पर है।
उन्होंने कहा कि मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ता हिंगलगंज में उनके द्वारा भाग लिए गए कार्यक्रमों से वाकिफ हैं, भले ही वे हमेशा ऑनलाइन पोस्ट न हों। उन्होंने कहा, "मैं उन नेताओं जैसी नहीं हूं जो राजनीति में बने रहने या बड़ा नेता बनने के लिए हर समय सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। मैं यह करने के लिए राजनीति में नहीं आई।" पात्रा ने बताया कि उनके कार्यालय में मदद मांगने वालों की भीड़ लगी रहती है और वह लोगों की समस्याएं सुनने में काफी समय देती हैं।
जिला भाजपा ने विवाद पर क्या कहा?
हालांकि, जिला भाजपा ने इस विवाद को कमतर आंकने की कोशिश की। बशीरहाट संगठनात्मक जिला अध्यक्ष सुकल्याण बैद्य ने कहा कि पार्टी ने हमेशा पात्रा को एक विधायक और जिला समिति सदस्य के तौर पर उचित सम्मान देने का प्रयास किया है।
बैद्य ने कहा, "जिला समिति के कार्यकर्ता और विधायक के तौर पर उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए, हमने हमेशा देने की कोशिश की है। उन्हें कुछ महसूस हुआ होगा, यह उनका मामला है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है।" पंचायत चुनाव नजदीक होने के मद्देनजर बैद्य ने कहा कि यह मतभेद पार्टी की चुनावी तैयारियों में बाधा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा, "हम आगे के दिनों में साथ मिलकर लड़ेंगे। वरिष्ठ नेता मौजूद हैं और वे इस मामले को देख रहे हैं। वे जो भी कहेंगे, हम उसी के अनुसार काम करेंगे।"
कैसा रहा है रेखा पात्रा का सियासी सफर?
पात्रा का राजनीतिक सफर असामान्य रूप से तेज रहा है। संदेशखाली की एक गृहिणी रहीं पात्रा, तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस के मजबूत नेता शेख शाहजहां और उनके सहयोगियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरीं। भाजपा ने उन्हें महिलाओं के प्रतिरोध के जमीनी प्रतीक के रूप में पेश किया।
रैलियों में अपनी छोटी बेटी को गोद में लेकर चलने वालीं पात्रा संदेशखाली आंदोलन के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक बन गईं। यह आंदोलन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2024 में बशीरहाट लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन वह यह चुनाव हार गई थीं। पार्टी ने उन्हें 2026 के विधानसभा चुनाव में एक और मौका दिया और हिंगलगंज सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के आनंद सरकार को 5,421 वोटों से हराया।
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हिंगलगंज की विधायक ने कहा कि वह जिला इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से दूर रही हैं, क्योंकि उन्हें वहां "असहयोग" और कथित अनादर का सामना करना पड़ा। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप कर "न्याय दिलाने" की अपील की।
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रेखा पात्रा ने लगाए क्या-क्या आरोप?
रेखा पात्रा ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे जिला नेतृत्व गुमराह करता है, इसलिए मैं उनके द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होती। मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहती हूं और काम करती हूं।" उन्होंने आरोप लगाया कि बशीरहाट संगठनात्मक जिला समिति के सदस्य उनकी औपचारिक शिक्षा की कमी का इस्तेमाल उन्हें गलत दिशा में ले जाने के लिए कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा, "मुझे पढ़ाई-लिखाई के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए बशीरहाट संगठनात्मक जिला समिति मुझे गुमराह करती है। वे हमेशा मेरा अपमान करते हैं। कार्यक्रमों में बुलाने के बावजूद मेरा अपमान किया जाता है। मुझे ये बातें पसंद नहीं हैं।" पात्रा का यह सार्वजनिक असंतोष भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर सामने आया है। राज्य में पार्टी की सरकार है और आगामी पंचायत चुनाव भी नजदीक हैं।
संगठन या पार्टी: किससे नाराज है भाजपा विधायक?
जिला नेतृत्व की तीखी आलोचना के बावजूद पात्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी संगठन के एक वर्ग से है, न कि भाजपा या उसकी सरकार से। उन्होंने कहा, "पार्टी संगठनात्मक जिला, मंडल या बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की वजह से नहीं रुकती। पार्टी अपने तरीके से आगे बढ़ती है।" साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि सत्ता में आते ही सरकार ने काम करना शुरू कर दिया था।
विधायक ने कहा, "पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ऊंचाइयों तक जाएगी। यह सत्ता में आने के बाद से ही काम कर रही है। इसने काम शुरू करने में एक पल की भी देरी नहीं की।" पात्रा ने राजनीतिक गतिविधियों को सोशल मीडिया पर प्रदर्शित करने के महत्व को भी नकारते हुए कहा कि उनका ध्यान प्रचार के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्र के काम पर है।
उन्होंने कहा कि मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ता हिंगलगंज में उनके द्वारा भाग लिए गए कार्यक्रमों से वाकिफ हैं, भले ही वे हमेशा ऑनलाइन पोस्ट न हों। उन्होंने कहा, "मैं उन नेताओं जैसी नहीं हूं जो राजनीति में बने रहने या बड़ा नेता बनने के लिए हर समय सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। मैं यह करने के लिए राजनीति में नहीं आई।" पात्रा ने बताया कि उनके कार्यालय में मदद मांगने वालों की भीड़ लगी रहती है और वह लोगों की समस्याएं सुनने में काफी समय देती हैं।
जिला भाजपा ने विवाद पर क्या कहा?
हालांकि, जिला भाजपा ने इस विवाद को कमतर आंकने की कोशिश की। बशीरहाट संगठनात्मक जिला अध्यक्ष सुकल्याण बैद्य ने कहा कि पार्टी ने हमेशा पात्रा को एक विधायक और जिला समिति सदस्य के तौर पर उचित सम्मान देने का प्रयास किया है।
बैद्य ने कहा, "जिला समिति के कार्यकर्ता और विधायक के तौर पर उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए, हमने हमेशा देने की कोशिश की है। उन्हें कुछ महसूस हुआ होगा, यह उनका मामला है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है।" पंचायत चुनाव नजदीक होने के मद्देनजर बैद्य ने कहा कि यह मतभेद पार्टी की चुनावी तैयारियों में बाधा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा, "हम आगे के दिनों में साथ मिलकर लड़ेंगे। वरिष्ठ नेता मौजूद हैं और वे इस मामले को देख रहे हैं। वे जो भी कहेंगे, हम उसी के अनुसार काम करेंगे।"
कैसा रहा है रेखा पात्रा का सियासी सफर?
पात्रा का राजनीतिक सफर असामान्य रूप से तेज रहा है। संदेशखाली की एक गृहिणी रहीं पात्रा, तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस के मजबूत नेता शेख शाहजहां और उनके सहयोगियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरीं। भाजपा ने उन्हें महिलाओं के प्रतिरोध के जमीनी प्रतीक के रूप में पेश किया।
रैलियों में अपनी छोटी बेटी को गोद में लेकर चलने वालीं पात्रा संदेशखाली आंदोलन के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक बन गईं। यह आंदोलन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2024 में बशीरहाट लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन वह यह चुनाव हार गई थीं। पार्टी ने उन्हें 2026 के विधानसभा चुनाव में एक और मौका दिया और हिंगलगंज सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के आनंद सरकार को 5,421 वोटों से हराया।