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बेअंत सिंह हत्याकांड: मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग, राजोआना की याचिका पर फैसला सुरक्षित

Thu, 02 Mar 2023 10:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 02 Mar 2023 10:12 PM IST
सार

जस्टिस बीआर गवई, विक्रम नाथ और संजय करोल की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले दोषी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज की दलीलें सुनीं। राजोआना पिछले 26 साल से जेल में है। 

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beant singh murder case Verdict reserved on plea seeking commutation of Rajoanas sentence
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए बलवंत सिंह राजोआना की याचिका पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की गई है।

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जस्टिस बीआर गवई, विक्रम नाथ और संजय करोल की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले दोषी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज की दलीलें सुनीं। राजोआना पिछले 26 साल से जेल में है। 
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रोहतगी ने कहा, मौत की सजा के मामले में लंबे समय तक दया याचिका को लंबित रखना मौलिक अधिकार का हनन है। राजोआना की दया याचिका एक दशक से अधिक समय से सरकार के समक्ष लंबित है। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल 11 अक्टूबर को कहा था कि राजोआना की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल 26 साल से जेल में हैं और शीर्ष कोर्ट के फैसलों के आधार पर उनके पास एक ठोस मामला है कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण के अधिकार) के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन किया गया है।

पिछले साल 28 सितंबर को शीर्ष कोर्ट ने राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की याचिका पर फैसला लेने में केंद्र की विफलता पर असंतोष व्यक्त किया था। रोहतगी ने कहा था कि राजोआना जनवरी 1996 से जेल में है और उसकी दया याचिका मार्च 2012 में दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को 2007 से मौत की सजा सुनाई गई है।


राजोआना ने 26 साल की लंबी कैद के आधार पर अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल दो मई को केंद्र से राजोआना की ओर से दायर कम्युटेशन याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा था। बाद में केंद्र के वकील के द्वारा दिए गए  27 जुलाई, 2022 के एक पत्र के संदर्भ में मामले को 13 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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