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लिखित शिकायत के बिना साक्ष्यों के आधार पर भी शुरू की जा सकती है विभागीय जांच: बांबे हाईकोर्ट

Mon, 07 May 2018 09:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Updated Mon, 07 May 2018 09:43 PM IST
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Based on evidence without written complaint can also be started on departmental inquiry
हाई कोर्ट, मुम्बई
बांबे हाईकोर्ट ने एक कनिष्ठ न्यायाधीश के खिलाफ विभागीय जांच के मुद्दे पर महत्वपूर्ण राय दी है। कोर्ट ने कहा है कि अगर साक्ष्य हों तो बिना लिखित शिकायत के भी मामले की जांच शुरू की जा सकती है। बांबे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरएम सावंत और न्यायमूर्ति एसवी कोतवाल की खंडपीठ ने कनिष्ठ जज आसिफ तहसीलदार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही।
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हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से 15 जुलाई 2017 में एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें कनिष्ठ न्यायाधीश आसिफ तहसीलदार के खिलाफ दो अलग-अलग मामले में जांच शुरू करने का आदेश था। आसिफ तहसीलदार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तहसीलदार के खिलाफ पहला आरोप जालना में न्यायाधीश रहते हुए पद के दुरुपयोग करने, राजस्व को नुकसान पहुंचाने का लगा था जबकि दूसरा आरोप कोल्हापुर में न्यायाधीश रहते हुए एक व्यक्ति पर हमला करने और उसे झूठे मामले में फंसाने का लगा था। 
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याचिका में दावा किया गया था कि बिना लिखित शिकायत के विभागीय जांच शुरू करने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी अनिवार्य दिशानिर्देश का उल्लंघन है। खंडपीठ ने तथ्यों को ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद कहा कि संबंधित अदालत (जालना और कोल्हापुर) के प्रमुख न्यायाधीशों से राय लेने और रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद रजिस्ट्रार ने विभागीय जांच के लिए आदेश जारी किया था।
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अदालत ने याचिकाकर्ता के उस तर्क को अस्वीकार कर दिया कि कारण बताओ नोटिस जारी करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। कोर्ट ने कहा कि जहां तक याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय जांच का सवाल है वहां आरोप को साबित करने के लिए सत्यापन योग्य सामग्री थी। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ बिना लिखित शिकायत के भी विभागीय जांच शुरू कराई जा सकती है। 


अदालत ने कहा कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी को केवल यह विचार करना होगा कि जांच शुरू करने के लिए आगे आधार है ताकि सच्चाई का पता चल सके। खंडपीठ ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया है। याचिकाकर्ता चाहे तो विभागीय जांच का हिस्सा बन सकता है अथवा आरोपों को खारिज कर सकता है।
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