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Bangladesh: अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर बढ़ा दबाव

Mon, 22 Dec 2025 07:34 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 22 Dec 2025 07:34 PM IST
सार

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ ढाका में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या के बाद अल्पसंख्यक संगठनों ने अंतरिम सरकार पर सुरक्षा में नाकामी का आरोप लगाया। सरकार ने कई गिरफ्तारियों का दावा किया है।

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Bangladesh People take to streets against attacks minorities increasing pressure on interim government
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा और कथित उत्पीड़न को लेकर राजधानी ढाका में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक संगठनों ने अंतरिम सरकार पर सुरक्षा देने में नाकामी का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है और अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

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सोमवार को अल्पसंख्यक संगठनों के नेताओं ने ढाका में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया। यह प्रदर्शन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या के खिलाफ था। दास को मध्य मयमनसिंह शहर में एक कपड़ा फैक्ट्री से भीड़ जबरन बाहर ले गई और पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसके शव को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया।
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सरकार पर लगे आरोप
माइनॉरिटी यूनिटी फ्रंट के संयुक्त संयोजक मनिंद्र कुमार नाथ ने अंतरिम सरकार के प्रमुख यूनुस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार मानवीय बांग्लादेश की बात करती है, लेकिन हकीकत में हिंसा, हत्या और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न बढ़ा है। उनका आरोप है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीन के सत्ता से हटने के बाद से हालात लगातार बिगड़े हैं।
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गिरफ्तारी और जांच
सरकार की ओर से कहा गया है कि दीपू चंद्र दास की हत्या के मामले में अब तक 12 लोगों को जेल या हिरासत में लिया गया है। रैपिड एक्शन बटालियन और पुलिस ने कुल 21 संदिग्धों की पहचान की है। इसके अलावा, राजधानी में प्रथोम आलो और डेली स्टार अखबारों के दफ्तरों, छायानट और उदिची शिल्पी गोष्ठी जैसे सांस्कृतिक संगठनों पर हमलों के सिलसिले में भी नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई है। भारतीय राजनयिक मिशन के पास उपद्रव करने वालों की पहचान भी की गई है।


हिंसा का फैलता दायरा
बांग्लादेश में हाल के दिनों में भीड़ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। इंकीलाब मंच नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में हिंसा भड़क उठी। वहीं, दक्षिण-पश्चिमी खुलना शहर में छात्र आंदोलन से जुड़े नेता मोतालेब शिकदर को गोली मार दी गई, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इन घटनाओं ने देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी ने भी भीड़ हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने की अपील की है। पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि देश को भीड़तंत्र से बचाने के लिए अब चुप रहना विकल्प नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश एक अहम लोकतांत्रिक दौर से गुजर रहा है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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