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Bamboo Charcoal: इंफ्रारेड किरणों को रोक सकता है बांस का चारकोल, प्राकृतिक उपचार में किया जाता है प्रयोग

Tue, 22 Oct 2024 05:33 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 22 Oct 2024 05:33 AM IST
सार

Bamboo Charcoal: बांस का चारकोल इंफ्रारेड किरणों और प्रदूषण कणों को रोकने में सक्षम पाया गया है। चिकित्सा अध्ययन में दावा किया है कि ये मानव आंखों को सीधे दिखाई नहीं देतीं, लेकिन इन्सानों के चेहरे, त्वचा और मांसपेशियों पर काफी गंभीर असर डाल सकती हैं।

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Bamboo Charcoal: Bamboo charcoal can block infrared rays, is used in natural treatment
इंफ्रारेड किरणों को रोक सकता है बांस का चारकोल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांस का चारकोल इंफ्रारेड किरणों और प्रदूषण कणों को रोकने में सक्षम है। इन्हें थर्मल या हीट वेव भी कहा जाता है। एक चिकित्सा अध्ययन में दावा किया है कि ये मानव आंखों को सीधे दिखाई नहीं देतीं, लेकिन इन्सानों के चेहरे, त्वचा और मांसपेशियों पर काफी गंभीर असर डाल सकती हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सबसे तेजी से बढ़ने वाले इस बांस में कई अनूठी विशेषताएं हैं, जिसमें अन्य नियमित कोयले की तुलना में इसकी अवशोषण दर चार गुना और सतह क्षेत्र 10 गुना अधिक है।
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अध्ययन में खुलासा
मेडिकल जर्नल इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑफ मल्टीडिसीप्लिनरी रिसर्च एंड प्रैक्टिस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, चारकोल अन्य लकड़ियों से भी बनता है, लेकिन वन कानूनों के चलते इसे हासिल करना आसान नहीं है। इसे ब्लैक डायमंड के नाम से भी जानते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि बांस चारकोल प्राकृतिक रूप से कई खनिजों जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, एसिटिक एसिड, हाइड्रॉक्सिल बेंजीन से भरपूर है। इसलिए चेहरे की त्वचा को पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषकों से बचाव में यह काफी सक्षम है। यह हवा में मौजूद जहरीले तत्वों को चेहरे पर टिकने नहीं देता है। ब्यूरो
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प्राकृतिक उपचार में किया जाता है प्रयोग
आयुथवेदा के निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि त्वचा की गंदगी और अशुद्धियों को बाहर निकालने में यह काफी बेहतर है। इसमें सक्रिय बांस चारकोल के साथ अति लाभकारी कमल, पलाश, गेंदा, गुलाब के फूलों और संतरे का अर्क भी मिलाते हैं। मुंहासे के प्राकृतिक उपचार में, बांस के चारकोल का कई एशियाई देशों में लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है।
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बात अगर इसके प्रक्रिया की करें तो बांस की कटाई के बाद इसे बहुत उच्च तापमान पर कार्बोनाइज्ड किया जाता है, जिससे इसका सतह क्षेत्र और वजन का अनुपात लगभग 1200:1 तक बढ़ाया जा सके और इस विधि से बने सक्रिय बांस चारकोल को विभिन्न उत्पादों में उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने बताया कि जब सक्रिय बांस चारकोल के साथ किसी फेसवॉश को बनाते हैं तो यह त्वचा से विषाक्त व हानिकारक पदार्थों को अवशोषित करने में अधिक सक्षम होता है, जिसके चलते त्वचा अधिक स्वस्थ होती है। यही वजह है कि इसकी कई किस्म बाजार में मौजूद हैं।
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