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शोध: मोटापा कम करने में उपयोगी बांस की कोंपल का अर्क, त्वचा को गहराई से हाइड्रेट में भी सक्षम
Sat, 14 Dec 2024 08:00 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 14 Dec 2024 08:00 AM IST
सार
शोधकर्ताओं ने उत्तर पूर्वी इलाकों के पारंपरिक किण्वित बांस की टहनियों की विभिन्न किस्मों में मोटापा कम करने वाले प्रभावों की जांच-पड़ताल की। इस दाैरान शोधकर्ताओं ने पाया कि बांस की किस्म मेली-एमिली इंट्रासेल्युलर लिपिड को कम जमा कर सकती है। इस प्रक्रिया में लिपोलिटिक और फैट ब्राउनिंग रेगुलेटर जीन में वृद्धि शामिल थी।
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बांस
- फोटो : Free Pic
विस्तार
भारतीय शोधकर्ताओं ने बढ़ते वजन और मोटापा से मुकाबला करने के लिए प्राकृतिक तरीका खोज निकला है। शोधकर्ताओं ने भारत के राज्य त्रिपुरा की पारंपरिक बांस की किस्म 'मेली-एमिली ' की कोंपल (बैम्बू शूट) से प्राप्त अर्क के रूप में मोटापा कम करने और वजन नियंत्रण तथा चयापचय के लिए एक बेहतर समाधान खोज निकला है। शोधकर्ता ने कहा यह लिपिड को कम जमा करता है और फैटी एसिड बीटा-ऑक्सीकरण को बढ़ाता है।
डीएसटी और आईएएसएसटी का शोध
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, इंस्टीटूट ऑफ एडवांस स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के शोधकर्ताओं ने उत्तर पूर्वी इलाकों के पारंपरिक किण्वित बांस की टहनियों की विभिन्न किस्मों में मोटापा कम करने वाले प्रभावों की जांच-पड़ताल की। इस दाैरान शोधकर्ताओं ने पाया कि बांस की किस्म मेली-एमिली इंट्रासेल्युलर लिपिड को कम जमा कर सकती है। इस प्रक्रिया में लिपोलिटिक और फैट ब्राउनिंग रेगुलेटर जीन में वृद्धि शामिल थी।
इसके साथ ही शोध में पाया गया कि इंट्रासेल्युलर लिपिड कोशिका के अंदर पाए जाने वाले लिपिड होते हैं वायरल संक्रमण के बाद कोशिका के अंदर लिपिड ड्रॉपलेट का संचय होता है जो इंटरफेरॉन प्रतिक्रिया के लिए जरूरी होता है। यह लिपिड चयापचय और सेल सिग्नलिंग में शामिल होते हैं तथा बाईलेयर कोशिका की सुरक्षा करते हैं और व्यवहार्यता (होमियोस्टेसिस) को बनाए रखते हैं। इंटरफेरॉन, प्रतिविषाणु प्रोटीन हैं। यह एक सुरक्षात्मक तंत्र है जो मुख्य रूप से विषाणु संक्रमण से सुरक्षा करता है। यह शरीर में सबसे तेजी से बनने वाला सबसे अहम रक्षा कवच है।
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मोटापे से जुड़े विकारों को रोकने में सक्षम
प्रमुख शोधकर्ता प्रो. मोजीबुर खान का कहना है कि निष्कर्षों से पता चलता है कि किण्वित बांस की टहनी का अर्क सफेद एडीपोसाइट्स में ऊर्जा खपत बढ़ाकर मोटापा को रोकने वाला प्रभाव डालता है। दुनियाभर में मोटापे और संबंधित विकारों के बढ़ते प्रचलन के साथ मेली एमिली जैसे प्राकृतिक उपचार समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस शोध के नतीजे प्रतिष्ठित पत्रिका फूड फ्रंटियर्स में प्रकाशित हुए हैं।
त्वचा के लिए भी उपयोगी...
बांस का अर्क त्वचा के लिए भी उपयोगी है। इसमें तीव्र मॉइस्चराइजिंग और एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो इसे एंटी-एजिंग और रिपेरेटिव त्वचा देखभाल के लिए आदर्श बनाता है। बांस का अर्क त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने की क्षमता के साथ त्वचा की लोच को बहाल करने, पर्यावरणीय आक्रामकता से बचाने क लिए भी बेहद प्रभावी है।
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डीएसटी और आईएएसएसटी का शोध
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, इंस्टीटूट ऑफ एडवांस स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के शोधकर्ताओं ने उत्तर पूर्वी इलाकों के पारंपरिक किण्वित बांस की टहनियों की विभिन्न किस्मों में मोटापा कम करने वाले प्रभावों की जांच-पड़ताल की। इस दाैरान शोधकर्ताओं ने पाया कि बांस की किस्म मेली-एमिली इंट्रासेल्युलर लिपिड को कम जमा कर सकती है। इस प्रक्रिया में लिपोलिटिक और फैट ब्राउनिंग रेगुलेटर जीन में वृद्धि शामिल थी।
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इसके साथ ही शोध में पाया गया कि इंट्रासेल्युलर लिपिड कोशिका के अंदर पाए जाने वाले लिपिड होते हैं वायरल संक्रमण के बाद कोशिका के अंदर लिपिड ड्रॉपलेट का संचय होता है जो इंटरफेरॉन प्रतिक्रिया के लिए जरूरी होता है। यह लिपिड चयापचय और सेल सिग्नलिंग में शामिल होते हैं तथा बाईलेयर कोशिका की सुरक्षा करते हैं और व्यवहार्यता (होमियोस्टेसिस) को बनाए रखते हैं। इंटरफेरॉन, प्रतिविषाणु प्रोटीन हैं। यह एक सुरक्षात्मक तंत्र है जो मुख्य रूप से विषाणु संक्रमण से सुरक्षा करता है। यह शरीर में सबसे तेजी से बनने वाला सबसे अहम रक्षा कवच है।
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मोटापे से जुड़े विकारों को रोकने में सक्षम
प्रमुख शोधकर्ता प्रो. मोजीबुर खान का कहना है कि निष्कर्षों से पता चलता है कि किण्वित बांस की टहनी का अर्क सफेद एडीपोसाइट्स में ऊर्जा खपत बढ़ाकर मोटापा को रोकने वाला प्रभाव डालता है। दुनियाभर में मोटापे और संबंधित विकारों के बढ़ते प्रचलन के साथ मेली एमिली जैसे प्राकृतिक उपचार समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस शोध के नतीजे प्रतिष्ठित पत्रिका फूड फ्रंटियर्स में प्रकाशित हुए हैं।
त्वचा के लिए भी उपयोगी...
बांस का अर्क त्वचा के लिए भी उपयोगी है। इसमें तीव्र मॉइस्चराइजिंग और एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो इसे एंटी-एजिंग और रिपेरेटिव त्वचा देखभाल के लिए आदर्श बनाता है। बांस का अर्क त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने की क्षमता के साथ त्वचा की लोच को बहाल करने, पर्यावरणीय आक्रामकता से बचाने क लिए भी बेहद प्रभावी है।