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बाबरी विध्वंस केसः आडवाणी-जोशी के लिए बंद नहीं हुआ राष्ट्रपति भवन का दरवाजा

Wed, 31 May 2017 10:52 AM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 31 May 2017 10:52 AM IST
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Babri case has no effects on L K Advani joshi presidential cantidate, its tough on morality ground
लालकृष्ण आडवाणी - फोटो : amar ujala
बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई कोर्ट का आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा रद्द की अपील ठुकराने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के लिए राष्ट्रपति भवन का दरवाजा बंद नहीं हुआ है। आपराधिक साजिश का मुकदमा जारी रहने के बावजूद इन नेताओं को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की राह में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। मामला बस राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा है।
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इस मामले में आपराधिक साजिश का आरोप पत्र दायर होने के कारण करीब दो दशक बाद राम मंदिर मुद्दे को फिर से राजनीति के केंद्र में आने की छाने की स्थिति बन रही है। चूंकि सुनवाई दो साल तक चलेगी, ऐसे में अगले लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा नए सिरे से तूल पकड़ सकता है। गौरतलब है कि सुनवाई जब अंतिम दौर में होगी, तभी लोकसभा चुनाव हो रहे होंगे।
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आडवाणी-जोशी के लिए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी में बाधा नहीं आपराधिक मुकदमा

Babri case has no effects on L K Advani joshi presidential cantidate, its tough on morality ground
murali manohar joshi
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि आपराधिक मुकदमा जारी रहते राष्ट्रपति चुनाव लड़ने को ले कर कोई कानूनी रोक नहीं है। संविधान में ऐसी स्थिति का सामना कर रहे नेता के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है। भाजपा अगर चाहे तो इन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि यह मामला राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या भाजपा इस मामले के नैतिक पहलू को महत्व देगी या नहीं।

​मामले का महत्वपूर्ण पहलू इस मामले की अगले दो साल तक लगातार चलती रहने वाली सुनवाई है। अगर तय योजना के मुताबिक सुनवाई चली तो सीबीआई अदालत वर्ष 2019 के अंत में अपनी सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाएगा। चूंकि मई महीने में वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल पूरा होगा, ऐसे में वर्ष 2019 के अप्रैल और मई महीने में देश में आमचुनाव हो रहे होंगे। चूंकि इस दौरान इस मामले में आरोपी बनाए गए नेताओं की सुनवाई जारी रहेगी, ऐसे में यह मुद्दा अगले दो साल तक लगातार राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।
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