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अयोध्या राम मंदिर: सुप्रीम कोर्ट का आएगा अहम फैसला, इस मामले में अब तक यह हुआ

Thu, 27 Sep 2018 05:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 27 Sep 2018 05:56 PM IST
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Ayodhya: Supreme Court will deliver its verdict on whether Namaz is integral part of Islam or not
अयोध्या की विवादित जमीन

27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित एक अहम फैसला दिया। कोर्ट ने नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं, इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने से मना कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि सभी धर्मों और धार्मिक स्थलों की समान रूप से इज्जत की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या भूमि विवाद पर 29 अक्टूबर से सुनवाई होगी। नमाज पर यह फैसला इसलिए भी मबहत्वपूर्ण था क्योंकि 1994 में दिए अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। 6 दिसंबर 1992 को भीड़ ने बाबरी मस्जिद तोड़ दी थी। जिसके बाद यह मामला कोर्ट पहुंच गया था। 

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30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाया था। अपने आदेश में बेंच ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि के तीन बराबर हिस्सा किए थे। राम मूर्ति वाले पहले हिस्से में राम लला को विराजमान कर दिया गया। राम चबूतरा और सीता रसोई वाले दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े को दिया गया और बाकी बचे हुए हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले से जुड़े पक्षकार इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। जहां इसकी सुनवाई चल रही है।
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यह है इस विवाद की पूरी कहानी

1528: अयोध्या में बाबर ने एक ऐसी जगह मस्जिद का निर्माण कराया जिसे हिंदू राम जन्म भूमि मानते हैं।
1853: हिंदुओं का आरोप- मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। पहला हिंदू-मुस्लिम संघर्ष हुआ।
1859: ब्रिटिश सरकार ने विवादित भूमि को बांटकर आंतरिक और बाहरी परिसर बनाए। 
1885: राम के नाम पर इस साल कानूनी लड़ाई शुरू हुई। महंत रघुबर दास ने राम मंदिर निर्माण के लिए इजाजत मांगी।
1949: 23 दिसंबर को लगभग 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल में भगवान राम की मूर्ति रखी।
1950: 16 जनवरी को एक अपील में मूर्ति को विवादित स्थल से हटाने से न्यायिक रोक की मांग।
1950: 5 दिसंबर को मस्जिद को ढांचा नाम दिया गया और राममूर्ति रखने के लिए केस किया।
1959: 17 दिसंबर को निर्मोही अखाड़ा विवाद में कूदा, विवादित स्थल के लिए मुकदमा दायर।
1961: 18 दिसंबर को सुन्नी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मालिकाना हक के लिए केस किया।
1984: विश्व हिंदू परिषद विशाल मंदिर निर्माण और मंदिर के ताले खोलने के लिए अभियान शुरू। 
1986: 1 फरवरी फैजाबाद जिला अदालत ने विवादित स्थल में हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी। 
1989: जून में भारतीय जनता पार्टी ने मंदिर आंदोलन में वीएचपी का समर्थन किया। 
1989: 1 जुलाई को मामले में पांचवा मुकदमा दाखिल हुआ।
1989: 9 नवंबर को बाबरी के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी गई। 
1990: 25 सितंबर को लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा की। जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए।
1990: नवंबर में आडवाणी गिरफ्तार। भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस लिया।
1991: अक्टूबर में कल्याण सिंह सरकार ने विवादित क्षेत्र को कब्जे में लिया।
1992: 6 दिसंबर को कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया। एक अस्थाई मंदिर बनाया गया। 
1992: 16 दिसंबर को तोड़फोड़ की जांज के लिए एस.एस. लिब्रहान आयोग का गठन हुआ। 
2002:  तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने विवाद सुलझाने के लिए अयोध्या विभाग शुरू किया।
2002: अप्रैल में विवादित स्थल पर मालिकाना हक के लिए हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई।
2003: मार्च से अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद विवादित स्थल पर खुदाई हुई और मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष के प्रमाण मिले।
2003: सितंबर में सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाने का फैसला दिया गया।
2005: जुलाई में विवादित क्षेत्र पर इस्लामिक आतंकवादियों का हमला, पांच आतंकी मारे गए।
2009: जुलाई में पीएम मनमोहन सिंह को लिब्रहान आयोग ने रिपोर्ट सौंपी।
2010: 28 सितंबर को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की। 
2010: 30 सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया। 
2017: 21 मार्च सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता की पेशकश की।
2017: 5 दिसंबर से इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू हुई।
2018: जुलाई में बौद्ध धर्म को मानने वालों ने विवादित जमीन पर अपना दावा करने वाली याचिका दायर की। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
2018: 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट नमाज मामले में अपना फैसला देगा।

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