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Ayodhya Ram Temple: '33 साल का इंतजार खत्म होने वाला है'; मंदिर आंदोलन में शामिल रहे कारसेवकों की बहन का बयान
Fri, 12 Jan 2024 06:22 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 12 Jan 2024 06:22 PM IST
सार
Ayodhya Ram Temple: 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। देश और दुनिया के राम भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। करीब तीन दशक पहले मंदिर के लिए हुए आंदोलन में कई कारसेवक शामिल हुए थे। इनमें दो कारसेवकों- राम और शरद कोठारी का नाम भी शामिल है। दोनों की बहन के मुताबिक मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ 33 साल का इंतजार खत्म होने वाला है।
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दोनों कारसेवक- राम और शरद कोठारी (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का इंतजार करोड़ों श्रद्धालु कर रहे हैं। 22 जनवरी को भव्य मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई गणमान्य मेहमान मौजूद रहेंगे। मंदिर के लिए 1989-90 में बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ था। इसमें देशभर के हजारों-लाखों श्रद्धालु शामिल हुए थे। मंदिर निर्माण के आंदोलन में शामिल लोगों को कारसेवक कहा जाता है। इन कारसेवकों में राम और शरद कोठारी भी शामिल थे। बाबरी विध्वंस के बाद राम मंदिर की स्थापना की घटना को कारसेवा भी कहा जाता है।
करीब तीन दशक पहले हुई कारसेवा में शामिल कोठारी बंधुओं की पुलिसिया कार्रवाई में मौत हो गई थी। लगभग 33 साल पहले हुई इस घटना के बाद दोनों की बहन पूर्णिमा कोठारी ने कहा, मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ उनका 33 साल का इंतजार खत्म होने वाला है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रहने वाले कोठारी परिवार का मानना है कि इस दिन का लंबे समय से इंतजार था। दो भाई राम और शरद कोठारी की मौत नवंबर, 1990 में हुई थी।
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30 अक्तूबर 1990 को विवादित बाबरी मस्जिद पर चढ़े कारसेवकों में दोनों भाई शामिल थे। विवादित ढांचे पर भगवा झंडा फहराने वाले पहले लोगों में दोनों भाई शामिल थे। कानून व्यवस्था बिगड़ने पर 2 नवंबर, 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने अयोध्या में तैनात पुलिस बलों को कार-सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। इसी में राम और शरद कोठारी राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के लिए शहीद माने गए।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों की बहन पूर्णिमा कोठारी को 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण भेजा गया है। कोठारी बंधुओं की बहन ने कहा, 33 साल के बाद उनके पास पहली बार खुशी का मौका आया है। उन्होंने कहा कि भाइयों के बलिदान के बाद मंदिर के लिए 33 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन वे बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि भाइयों के साथ जो हुआ, उसे भुला नहीं पाई हैं, लेकिन आज आंखों के सामने भव्य राम मंदिर साकार होने की खुशी है।
पूर्णिमा बताती हैं कि उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सारी उम्मीदें खो दीं। हालांकि, आज भाइयों के बलिदान को उचित सम्मान मिलता देखकर उन्हें काफी खुशी और गर्व का एहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले लगता था कि भाइयों का बलिदान बेकार गया। एक समय भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए गए। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का जिक्र करते हुए पूर्णिमा कोठारी ने कहा कि एक समय राम भक्तों को अराजक माना जाता था, लेकिन आज देश का माहौल बहुत अच्छा है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को अगर गोलियां चलानी थीं, तो पैर में भी गोली मारी जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने पुलिस को गोली चलाने का आदेश राजनीतिक फायदे के लिए दिया। उन्होंने कहा कि बाद में मुलायम ने घटना / फैसले पर अफसोस भी जाहिर किया, लेकिन इससे उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
विपक्षी दलों के नेता 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हो रहे हैं। इस पर पूर्णिमा ने कहा, राम मंदिर की तरफ से आमंत्रित किए जाने के बाद भी नहीं आने का फैसला करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को अयोध्या न पहुंच पाने का अफसोस हो रहा है। कई ऐसे लोग भी हैं जो केवल अयोध्या में मौजूद होने को लेकर आनंदित हैं, भले ही वे प्राण प्रतिष्ठा के प्रत्यक्ष साक्षी नहीं बन पा रहे हैं। विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता सबकुछ सियासी चश्मे से देख रहे हैं।
कोठारी बंधुओं की याद में राम-शरद कोठारी स्मृति संघ बनाया गया। इसके उपाध्यक्ष दोनों भाइयों के करीबी रहे अशोक जयसवाल भी कोठारी बंधुओं को याद करते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वे तीनों एक ही शाखा में थे। 1990 में अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ उस समय उनकी आयु 18 साल से कम थी। किसी कारण से वे अयोध्या नहीं जा सके। लेकिन दोनों भाई गए। उस समय शरद की आयु 20 साल थी।
अशोक के मुताबिक दो नवंबर, 1990 के दिन यूपी पुलिस ने निहत्थे कारसेवकों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अफरा-तफरी के दौरान दोनों भाई एक घर में छिप गए। अशोक का आरोप है कि यूपी पुलिस ने दोनों को जबरन घर से निकालकर गोली मार दी। परिवार ने दोनों भाइयों की याद में राम-शरद कोठारी स्मृति संघ की स्थापना की है जो विभिन्न सामाजिक कार्य करता है।
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करीब तीन दशक पहले हुई कारसेवा में शामिल कोठारी बंधुओं की पुलिसिया कार्रवाई में मौत हो गई थी। लगभग 33 साल पहले हुई इस घटना के बाद दोनों की बहन पूर्णिमा कोठारी ने कहा, मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ उनका 33 साल का इंतजार खत्म होने वाला है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रहने वाले कोठारी परिवार का मानना है कि इस दिन का लंबे समय से इंतजार था। दो भाई राम और शरद कोठारी की मौत नवंबर, 1990 में हुई थी।
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30 अक्तूबर 1990 को विवादित बाबरी मस्जिद पर चढ़े कारसेवकों में दोनों भाई शामिल थे। विवादित ढांचे पर भगवा झंडा फहराने वाले पहले लोगों में दोनों भाई शामिल थे। कानून व्यवस्था बिगड़ने पर 2 नवंबर, 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने अयोध्या में तैनात पुलिस बलों को कार-सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। इसी में राम और शरद कोठारी राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के लिए शहीद माने गए।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों की बहन पूर्णिमा कोठारी को 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण भेजा गया है। कोठारी बंधुओं की बहन ने कहा, 33 साल के बाद उनके पास पहली बार खुशी का मौका आया है। उन्होंने कहा कि भाइयों के बलिदान के बाद मंदिर के लिए 33 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन वे बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि भाइयों के साथ जो हुआ, उसे भुला नहीं पाई हैं, लेकिन आज आंखों के सामने भव्य राम मंदिर साकार होने की खुशी है।
पूर्णिमा बताती हैं कि उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सारी उम्मीदें खो दीं। हालांकि, आज भाइयों के बलिदान को उचित सम्मान मिलता देखकर उन्हें काफी खुशी और गर्व का एहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले लगता था कि भाइयों का बलिदान बेकार गया। एक समय भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए गए। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का जिक्र करते हुए पूर्णिमा कोठारी ने कहा कि एक समय राम भक्तों को अराजक माना जाता था, लेकिन आज देश का माहौल बहुत अच्छा है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को अगर गोलियां चलानी थीं, तो पैर में भी गोली मारी जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने पुलिस को गोली चलाने का आदेश राजनीतिक फायदे के लिए दिया। उन्होंने कहा कि बाद में मुलायम ने घटना / फैसले पर अफसोस भी जाहिर किया, लेकिन इससे उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
विपक्षी दलों के नेता 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हो रहे हैं। इस पर पूर्णिमा ने कहा, राम मंदिर की तरफ से आमंत्रित किए जाने के बाद भी नहीं आने का फैसला करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को अयोध्या न पहुंच पाने का अफसोस हो रहा है। कई ऐसे लोग भी हैं जो केवल अयोध्या में मौजूद होने को लेकर आनंदित हैं, भले ही वे प्राण प्रतिष्ठा के प्रत्यक्ष साक्षी नहीं बन पा रहे हैं। विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता सबकुछ सियासी चश्मे से देख रहे हैं।
कोठारी बंधुओं की याद में राम-शरद कोठारी स्मृति संघ बनाया गया। इसके उपाध्यक्ष दोनों भाइयों के करीबी रहे अशोक जयसवाल भी कोठारी बंधुओं को याद करते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वे तीनों एक ही शाखा में थे। 1990 में अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ उस समय उनकी आयु 18 साल से कम थी। किसी कारण से वे अयोध्या नहीं जा सके। लेकिन दोनों भाई गए। उस समय शरद की आयु 20 साल थी।
अशोक के मुताबिक दो नवंबर, 1990 के दिन यूपी पुलिस ने निहत्थे कारसेवकों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अफरा-तफरी के दौरान दोनों भाई एक घर में छिप गए। अशोक का आरोप है कि यूपी पुलिस ने दोनों को जबरन घर से निकालकर गोली मार दी। परिवार ने दोनों भाइयों की याद में राम-शरद कोठारी स्मृति संघ की स्थापना की है जो विभिन्न सामाजिक कार्य करता है।