अयोध्या: फैसले के 116वें पेज में निष्कर्ष के रूप में सुप्रीम कोर्ट ने क्या लिखा
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आखिरकार बहुप्रतीक्षित अयोध्या राम जन्मभूमि प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ गया। अदालत ने अयोध्या प्रकरण पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाएगी और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह जमीन मिलेगी। कोर्ट ने शुरू में ही शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा की याचिकाएं खारिज कर दी। साथ ही कहा कि मुसलमानों को मस्जिद के लिए दूसरी जमीन दी जाएगी।
अदालत ने 1045 पन्नों में अपना फैसला लिखा है, कहा जा रहा है कि इसके एक मुद्दे पर एक न्यायाधीश सहमति नहीं हैं। पांचों न्यायाधीशों की खंडपीठ में से असहमत जज का नाम गोपनीय रखा गया है।
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इस फैसले के पृष्ठ संख्या 116 के 170वें पैराग्राफ में अदालत ने निष्कर्ष के रूप में क्या लिखा है उसका पूरा हिंदी अनुवाद यह है:
इस प्रकार यह निष्कर्ष निकाला गया है कि हिंदुओं की आस्था और विश्वास इस स्थान के प्रति मस्जिद के निर्माण के पहले से है। इस स्थान को हमेशा भगवान राम का जन्मस्थान माना जाता रहा है और यहीं पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसकी पुष्टि अदालत में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और मौखिक साक्ष्यों से भी हुई है।
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