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असम-मेघालय विवाद : खून से रंगा है इतिहास, जानिए दोनों राज्यों के बीच किस चीज के लिए होती रही है लड़ाई?

Tue, 29 Mar 2022 06:53 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 29 Mar 2022 06:53 PM IST
सार

असम व मेघालय के बीच 50 साल पुराना सीमा विवाद खत्म हो गया है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आज दिल्ली में एक समझौते पर हस्ताक्षर कर विवाद का अंत कर दिया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में ही गृह मंत्रालय में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के सीएम कोनराड संगमा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद थे। 

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Assam Meghalaya Border Dispute Know the Detailed Study of 50 Years Old Dispute In Hindi
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज पूर्वोत्तर से जुड़े राज्य असम और मेघालय के लिए ऐतिहासिक दिन है। साल 1972 से दोनों राज्यों के बीच चला आ रहा विवाद आज काफी हद तक हल हो गया। इस विवाद का इतिहास खून से रंगा है। बीते 50 साल में कई सरकारें बदलीं। सुलह की कई कोशिशें भी हुईं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।  आइए जानते हैं 50 साल पुराने इस विवाद का क्या है कारण और अब तक क्या-क्या हुआ?  
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884.9 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े 12 क्षेत्रों का विवाद

Assam Meghalaya Border Dispute Know the Detailed Study of 50 Years Old Dispute In Hindi
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा - फोटो : अमर उजाला
विवाद 1972 से ही शुरू हो गया था। तब असम से अलग करके मेघालय को एक नया राज्य बनाया गया था। उसी दौरान बॉर्डर में बसे 12 इलाकों को लेकर मेघालय ने असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 को चुनौती दी थी। दोनों के बीच 884.9 किलोमीटर लंबी सीमा के जुड़े 12 क्षेत्रों से विवाद पैदा हो गया था।

इन 12 विवादित क्षेत्रों में ऊपरी ताराबारी, गजांग रिज़र्व फॉरेस्ट, हाहिम, लंगपीह, बोरदुआर, बोकलापारा, नोंगवा, मातमूर, खानापारा-पिलंगकाटा, देशदेमोरिया ब्लॉक-वन और ब्लॉक-टू, खंडुली और रेटाचेरा शामिल हैं। 

क्या था विवाद का जड़? 
पूर्वोत्तर में अलग राज्यों का गठन पहाड़ियों के आधार पर हुआ। इसके चलते आबादी के बीच से जिलों की सीमा बन जाती थी। यही असम और मेघालय के बीच भी हुआ। जब मेघालय अलग राज्य बना तो यहां के खासी और गारो समुदाय के काफी लोग मैदानी इलाके में रह गए थे। 

बाद में इन लोगों के विकास को लेकर विवाद शुरू हो गया। कई लोग ऐसे भी हैं जो रहते तो असम की जमीन पर हैं, लेकिन उनका नाम मेघालय में दर्ज है। विवाद के चलते दोनों के नक्शे में भी कोई सुधार नहीं हो पाया। 

 
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2010 में हुई हिंसा, चार लोग मारे गए

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असम-मेघालय बॉर्डर पर कई बार हिंसा हो चुकी है। - फोटो : अमर उजाला
यूं तो नए राज्य के गठन के बाद से ही दोनों के बीच सीमा पर हिंसक झड़पें होती रहीं, लेकिन 14 मई 2010 को असम और मेघालय के बॉर्डर पर लंगपीह में बड़ी हिंसा हुई। इसमें कथित तौर पर असम पुलिस की गोलीबारी में खासी समुदाय के चार ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। घटना के बाद दोनों राज्यों के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने बैठक की। मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। उन्होंने दोनों राज्यों को इस विवाद का हल निकालने के लिए कहा। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच कई बैठकें हुईं, लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। 

क्या फैसला हुआ? 
दोनों मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवाद को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को सिफारिशें सौंपी थीं। इसके मुताबिक कुल 36.79 वर्ग किलोमीटर जमीन से असम अपने पास लगभग आधी यानी 18.51 वर्ग किलोमीटर विवादित भूमि रखेगा और बाकी 18.28 वर्ग किलोमीटर जमीन मेघालय को देगा। इसी पर दोनों राज्यों के बीच समझौता भी हो गया है।  

मेघालय ने 20, असम ने 17 सीएम देखे
भले ही असम से अलग होकर मेघालय बना हो, लेकिन बीते 50 साल में यहां 19 मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। अभी कोनार्ड संगमा यहां मुख्यमंत्री हैं। दूसरी ओर, असम का इतिहास काफी पुराना है। यहां अब तक 16 मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। अभी 17वें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा हैं। दोनों राज्यों में भाजपा और उसके गठबंधन की सरकारें हैं। इसके चलते आसानी से गृहमंत्री शाह ने इस विवाद का निस्तारण करवा दिया।
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